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Punjabi Devi Bhajan

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले लिरिक्स

108 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति में ज्योति: माँ जगतजननी की अराधना

इस भजन से माँ का ध्यान करते हुए आत्मा को शांति और सुकून प्राप्त करें।

जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले तेरी ज्योत जगाकर मैया मन का फूल खिले जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले जब मै खोलू अखिया अपनी तब हो दर्शन तेरा तेरी मूरत देख के मैया सच हो सपना मेरा पड़ी रहू दिन रात भवानी ममता की छाव तले जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले सात रंग की ज्योति वाला जग में नूर निराला कही दिखे तू छोटे रुप में कही दिखे तू ज्वाला तू जिसको वर देती भवानी टला नही टले जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले जब आव्हान करू मै तेरी दरश मुझे दिखलाना इस बालक भक्त के सब दुःख दर्द मिटाना सुबह श्याम मै नाम तेरा तेरा ही नाम जपु जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'जगमग ज्योत जले माँ तेरी जगमग ज्योत जले' में भक्त श्री माँ भगवती की दिव्य ज्योति का गुणगान कर रहे हैं। पहले अध्याय में 'तेरी ज्योत जगाकर मैया मन का फूल खिले' की पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि माँ की ज्योति से भक्त का मन खिल उठता है, उनके द्वारा दी गई प्रेरणा जीवन में सकारात्मकता का संचार करती है। साथ ही, जब भजनकार कहते हैं 'जब मै खोलू अखिया तब हो दर्शन तेरा', तो यह भक्त की गहरी इच्छा को दर्शाता है कि वह माँ के दिव्य रूप को निहार कर मानसिक शांति का अनुभव करना चाहता है। माँ की ज्योति केवल एक अदृश्य शक्ति नहीं बल्कि भक्त के जीवन में प्रकाश और मार्गदर्शन का स्रोत है।

भावनात्मक रूप से इस भजन में भक्ति का एक अनूठा स्वरूप दर्शाया गया है। जब भजनकार कहते हैं 'पड़ी रहू दिन रात भवानी ममता की छाव तले', तो यह माँ के प्रति असीम प्रेम और श्रद्धा को प्रकट करता है। भक्त का यह भाव प्रकट करता है कि माँ की ममता में वह हर स्थिति में सुरक्षित और खुश महसूस करता है। 'सात रंग की ज्योति वाला जग में नूर निराला' के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि माँ की ज्योति सांसरिक जीवन में रंगमयता और सुंदरता भर देती है। इससे भी महत्वपूर्ण, 'तू जिसको वर देती भवानी टला नही टले' का अर्थ है कि माँ की कृपा से भक्त के हर दुःख और क्लेश मिट जाते हैं, जिससे वे मानसिक सुरक्षात्मकता का अनुभव करते हैं।

भक्ति मार्ग के अंतर्गत इस भजन में भक्त की सच्ची भक्ति और दैवीय शक्ति का अद्भुत समन्वय देखा जा सकता है। 'जब आव्हान करू मैं' वाक्य में भक्त की ईच्छा प्रकट होती है कि वह मातृशक्ति का आह्वान कर रहा है, जिससे उसकी सभी समस्याएं समाप्त हो जाएं। भक्त का यह विश्वास मायावी शक्ति के निर्बाध प्रभाव को दर्शाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त आत्मा की सच्ची पवित्रता और माँ भगवती की असीम कृपा के प्रति उत्साह से भरा होता है। अंततः, माँ के नाम का जप करते हुए, 'सुबह श्याम मैं नाम तेरा तेरा ही नाम जपु' से स्पष्ट है कि हर सुबह और शाम माँ को स्मरण करना एक महान साधना है जो भक्त के आध्यात्मिक जीवन को बेहतर बनाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्त्व बहुत गहरा है। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में माँ के प्रति भक्ति एक प्रमुख तत्व है, और माँ भगवती की उपासना करने से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है। माँ की ज्योति का संदर्भ उपनिषदों और पुराणों में भी मिलता है, जहां इसे जीवन के चारों ओर प्रकाश फैलाने वाली शक्ति माना गया है। इसके साथ ही, भक्तों की श्रद्घा और भक्ति के द्वारा माँ की कृपा प्राप्त होने की कहानियाँ भी पुराणों में दर्ज हैं, जैसे देवी भागवत पुराण में माँ की शक्तियों का विशद वर्णन किया गया है, जो इस भजन की भावनाओं से पूर्णतः मेल खाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है। नियमित रूप से इस भजन का गायन करने से भक्त के जीवन में सकारात्मकता, स्वास्थ्य में सुधार और आत्मसमर्पण की भावना बढ़ती है। यह नकारात्मक विचारों को दूर करता है और भक्त को आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह-सवेरे सूर्योदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद किया जाना श्रेयस्कर है। पूजा करते समय शुद्ध वस्त्र पहनना चाहिए और सामने एक दीपक जलाना चाहिए। भक्त भावुकता से ध्यान लगाते हुए माँ का ध्यान करें, जिससे मन शांत और केंद्रित रहे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माँ भगवती की ज्योति और कृपा का गुणगान करना है, जो भक्तों के जीवन में शांति और सकारात्मकता लाता है।

क्या इस भजन का पाठ व्यक्तिपरक अनुभव पर प्रभाव डालता है?

हां, इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्त की मानसिक स्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन होता है और आध्यात्मिक साक्षात्कार की प्रेरणा उत्पन्न होती है।

क्या इसे हर दिन गाना चाहिए?

जी हाँ, दिन की शुरुआत और अंत में इस भजन का गायन करने से मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, जिससे जीवन में संतुलन बना रहता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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