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Krishna Bhajan

करुणामयी कृपा कीजिये श्री राधे (karunamayi kripa kijiye shri radhe Lyrics in Hindi) - Radha Krishna Bhajan Chitra Vichitra Ji - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री राधा की करुणामयी कृपा का महापाठ

श्री राधे की कृपा से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने के लिए इस भजन का आचरण करें।

करुणामयी कृपा कीजिये श्री राधेचरणों से लगा लीजिये श्री राधेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधाना मैं जानू भजन साधना श्री राधेना मैं जानू भजन साधना श्री राधेमुझे अपना बना लीजिये श्री राधेकरुणामयी कृपा कीजिए श्री राधेचरणों से लगा लीजिये श्री राधेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधादे के चरणों की सेवा श्री राधे मेरी किस्मत बना दीजिये श्री राधेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधाबिच मजधार में आ फसी श्री फसीपार नैया लगा दीजिये श्री राधेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधाछोड़ दर तेरा जाये कहा लाडली युवृन्धावन में वसा लीजियेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधाकहे चित्र विचित्र लाडली श्री राधेअपने काबिल बना लीजिये श्री राधेजय राधा राधा श्री राधाजय राधा राधा श्री राधा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त श्री राधे की करुणा और कृपा को प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। 'करुणामयी कृपा कीजिये श्री राधे' का अर्थ है कि भक्त श्री राधा से करुणा की याचना कर रहे हैं ताकि उनकी कृपा से भक्ति मार्ग की कठिनाइयों को पार किया जा सके। 'चरणों से लगा लीजिये श्री राधे' का स्पष्ट संकेत है कि भक्त श्री राधा के चरणों में आत्मसमर्पण करना चाहते हैं। भक्ति में, चरणों की सेवा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो अनुराग और भक्ति के अहसास को बढ़ाती है। भक्त की यह प्रार्थना है कि श्री राधा उन्हें अपने भक्तों में शामिल कर लें और उनकी जीवन की दिशा को सही कर दें।

भावार्थ के अनुसार, 'बिच मजधार में आ फसी पार नैया लगा दीजिये श्री राधे' का संकेत किसी समस्या या संकट की स्थिति में हैं। भक्त प्रार्थना कर रहे हैं कि जब वो समस्याओं में घिरे हों, तब श्री राधा उन्हें सुरक्षित करें और उनके जीवन की नैया को पार लगाएं। यह एक अपेक्षा है कि भक्तों की परेशानियों को भक्ति में बदलकर भगवान संवेदनशीलता से सुनेंगे। 'मेरी किस्मत बना दीजिये श्री राधे' से यह अभिप्राय है कि भक्त अपनी संपूर्ण किस्मत को श्री राधा के हाथ में सौंपते हैं। यह आत्मसमर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहरा भाव छिपा हुआ है। भक्त की भावना है कि जब हम भक्ति से जुड़ते हैं, तब हमें श्री राधा की अनुकंपा की आवश्यकता होती है। राधा-कृष्ण का संबंध प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, और इस भजन के माध्यम से भक्त इस प्रेम को अनुभव करने की प्रार्थना कर रहे हैं। 'लाडली युवृन्धावन में वसा लीजिये' का अर्थ है कि श्री राधा अपने प्रिय स्थान में भक्त को बसाने की प्रार्थना कर रहे हैं। यह आत्मा की शुद्धता की खोज करने की अद्वितीय अभिव्यक्ति है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय भक्तिसंस्कृति में अत्यधिक है। भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा का प्रेम एवं समर्पण अनंत है, और यह भजन श्री राधा की करुणा के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। भक्तिपूरणों में राधा की महिमा का विभिन्न स्थलों पर उल्लेख है, जहां उनकी कृपा को जीवन के मार्ग में रुकावटों को दूर करने का माध्यम माना गया है। महाभारत में, राधा-कृष्ण का संबंध प्रेम और भक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी प्रकार, भक्ति ग्रंथों जैसे भागवत पुराण में राधा का विशेष स्थान है, जो भक्तों को भक्ति मार्ग की प्रेरणा देते हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का नियमित जप करने से मानसिक शांति, संतोष और आध्यात्मिक विकास में वृद्धि होती है। भक्त श्री राधा की कृपा से जीवन में नकारात्मकता और कठिनाइयों को दूर करके सकारात्मकता को ग्रहण करते हैं। भक्तिपूर्णता से किया गया जप स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक ताज़गी लाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात:काल या संध्या समय में करना श्रेष्ठ है। ऐसा करने से मन शांत होता है और दिन की सकारात्मकता में वृद्धि होती है। पूजा के समय एक दीया जलाकर, श्री राधा का स्मरण करते हुए इस भजन को गुनगुनाना चाहिए। शरीर को शांत और सीधा रखना आवश्यक है ताकि ध्यान केंद्रित किया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव कम होता है?

हाँ, इस भजन को सुनने और गुनगुनाने से मानसिक तनाव कम होता है और मन में शांति का अनुभव होता है। यह करुणामयी राधा की कृपा से संभव है।

क्या यह भजन विशेष अवसरों पर गाया जा सकता है?

इस भजन को किसी भी धार्मिक अवसर या उत्सव पर गाया जा सकता है, विशेष रूप से जब भक्त राधा-कृष्ण की भक्ति करना चाहते हैं।

क्या इस भजन के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है?

भजन का उद्देश्य भक्ति, प्रेम और समर्पण है। भक्त यदि मन से इस भजन को गाता है, तो राधा की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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