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भक्ति रस काव्य व भजन

लाल लाल चुनरी मैया तेरी लेकर आयेंगे भजन इन हिंदी लिरिक्स

83 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ अम्बे की भक्ति: लाल चुनरी भजन

माँ अम्बे के प्रति भक्ति का यह भजन हृदय में भक्ति और प्रेम का संचार करता है।

लाल लाल चुनरी मैया तेरी लेकर आयेंगे लाल लाल चुनरी मैया तेरी लेकर आयेंगे धानी चुनर में ओ माँ अम्बे जगदम्बे सितारे हम जड़वाएंगे ||मैया जी का रूप अपने हाथो से सजायेंगे मैया को सजायेंगे हम मैया को सजायेंगे गोरे गोरे हाथो में हम मेहंदी लगायेंगे मेहंदी लगायेंगे हम मेहंदी लगायेंगे पाव में पायल माँ हाथो प्यारी चूड़ी हम पहनाएंगे लाल लाल चुनरिया में तेरी लेकर आयेंगे || चरणों से मैया तेरी दूर नहीं जायेंगे दूर नहीं जायेंगे हम दूर नहीं जायेंगे कहा ऐसी ममता कहा प्यार तेरा पाएंगे मैया के दरश के नज़ारे बड़े प्यारे नैना बस जायेंगे लाल लाल चुनरिया मैया तेरी लेकर आयेंगे || हे जगजननी हमपे कृपा इतनी करना कृपा तू करना माँ तू कृपा तू करना भक्ति का दान देके झोली तू भरना झोली तू भरना || माँ झोली तू भरना सुबह श्याम मैया रानी दर पे तेरे नाम तेरा हम गायेंगे लाल तेरा चुनरिया मैया तेरी लेकर आयेंगे धानी चुनर में ओ माँ अम्बे जगदम्बे सितारे हम जड़वाएंगे || लाल चुनार में रूप लगे कितना प्यारा वैष्णो माँ मिल के बोलो जयकारा लाल तेरा चुनरिया मैया तेरी लेकर आयेंगे !!

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में, 'लाल लाल चुनरी' का उल्लेख माँ अम्बे के प्रति श्रद्धा और समर्पण को प्रदर्शित करता है। यह 'लाल लाल चुनरी' केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि माँ के प्रति श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक है। भजन में यह कहा गया है कि माँ के चरणों को नहीं छोड़ेंगे, जो इस बात का संकेत है कि भक्त अपने जीवन में माँ की उपस्थिति को अनिवार्य मानते हैं। विशेष रूप से, 'क्या ऐसी ममता, क्या प्यार तेरा पाएंगे' पंक्ति यह दर्शाती है कि माँ का प्यार और ममता अनंत है, और भक्त उस प्रेम को हर परिस्थिति में चाहिए। इस भजन में माँ के प्रति सजावट और सामर्पण की बात की गई है, जिससे भक्त की भक्ति का गहराई से परिचय मिलता है।

भजन की भावनात्मक गहराई भक्तों को माँ अम्बे की कृपा के लिए प्रार्थना करने के लिए प्रेरित करती है। 'हे जगजननी, हमपे कृपा इतनी करना' यह पंक्ति प्रार्थना की तीव्रता को दर्शाती है, जहाँ भक्त माँ से कृपा की याचना कर रहा है। यह भक्ति के मार्ग की परिचायक है, जहाँ भक्त अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को माँ के चरणों में समर्पित करता है। इस तरह के भजनों का पाठ भक्तों को मानसिक विश्राम और सत्य की खोज में सहायता करता है। जब भक्त 'तू कृपा तू करना' में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं, तो यह दर्शाता है कि भक्त केवल भक्ति और श्रद्धा से ही माँ को संतुष्ट कराना चाहता है।

इस भजन का तात्पर्य माँ अम्बे की दिव्यता और उनके अद्वितीय रूप की आराधना करना है। 'माँ झोली तू भरना' यह याचना भक्त की भक्ति में गहराई दर्शाती है। भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्त का यह संदेश है कि जबकि जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, वे आश्रय और संजीवनी माँ अम्बे से प्राप्त कर सकते हैं। इस गीत में भक्ति का मार्ग सीधा और सरल है; भक्त द्वारा किया गया यह अद्वितीय संकल्प सिर्फ अपनी माँ के प्रति प्रेम और भक्ति का आलम्बन है, जो भक्ति प्रक्रिया का उच्चतम स्वरूप है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन केवल एक भक्ति गीत नहीं है, बल्कि यह माँ दुर्गा की शक्ति और कृपा का भी प्रतीक है। देवी पुराण और मार्कंडेय पुराण में माँ अम्बे की पूजा का महत्व बताया गया है। भक्त उन्हें जीवन के सभी दुखों से मुक्ति देने वाली और हर संकट में सहारा देने वाली मानते हैं। भजन में कहा गया है कि माँ की ममता और प्रेम का कोई सामना नहीं कर सकता, जो भक्तों को यह विश्वास दिलाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति हमेशा फल देती है। यह भजन भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का संचार करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। भक्त जब इस भजन को गाते हैं, तो वे अपनी समस्याओं को माँ के चरणों में समर्पित करते हैं, जिससे तनाव कम होता है। यह भजन नियमित रूप से गाने से भक्तों को आध्यात्मिक संतोष और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय करना सर्वोत्तम होता है। भक्तों को ध्यान लगाकर, एक दीप जलाकर और माँ को फूल अर्पित करके इस भजन का पाठ करना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, अपनी हृदय की गहराइयों से भक्ति के साथ इस भजन का पाठ करना चाहिए। इससे आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश माँ अम्बे की ममता और कृपा की आराधना करना है। इसमें भक्त उनकी कृपा की याचना करते हैं।

किस देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए यह भजन गाया जाता है?

यह भजन माँ अम्बे, जिन्हें जगदम्बा के नाम से भी जाना जाता है, की कृपा प्राप्त करने के लिए गाया जाता है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और आध्यात्मिक संतोष प्राप्त होता है। यह भक्तों को उत्साहित और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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