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मै आया हूँ तेरे द्वारे गणराज गजानन प्यारे लिरिक्स (Mai Aaya Hu Tere Dware Ganaraj Gajanan Pyare Lyrics in Hindi) - Ganeh Bhajan - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणराज गजानन की भक्ति का सूत्रधार

इस भजन के द्वारा गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद के लिए सच्चे मन से प्रार्थना की जाती है।

 मै आया हूँ तेरे द्वारे गणराज गजानन प्यारे लिरिक्स (Mai Aaya Hu Tere Dware Ganaraj Gajanan Pyare Lyrics in Hindi) - श्लोक - 1 || प्रथमे गौराजी को वंदना, द्वितीय आदि गणेश |||| ओ तृतीय सुमिरां माँ शारदा, मेरे कारज करो हमेश ||  श्लोक - 2|| पहले किसे मनाइए,किसका कीजे ध्यान |||| मात पिता गुरु आपणा सकल पुरुष का नाम || मै आया हूँ तेरे द्वारे,गणराज गजानन प्यारेमेरी नैया पड़ी है किनारे,ओ विघन विनाशन हारेमुझे कौन संभाले,मेरी लाज बचाले,मेरे मन मोहियातेरा बस ध्यान किया गजानन नाम लिया ||प्रथम मनाऊं मैं तुम्हे,गौरी पुत्र गणेश जीदुस्टों का करते दमन,काटो कठिन कलेश जीविद्या का भंडार है, माया बड़ी अपार हैये अद्भुत अवतार है, सबका बेड़ा पार हैमुझे कौन संभाले,मेरी लाज बचाले,मेरे मन मोहियातेरा बस ध्यान किया गजानन नाम लिया ||रूप चतुर्भुज है तेरा,मूरत बड़ी विशाल हैमूसे पे असवार हो,बड़ी निराली चाल हैरिद्धि सिद्धि सेवा करे,योगीजन तेरा ध्यान धरेभक्तो का उद्धार करे,भवसागर से पार करेमुझे कौन संभाले,मेरी लाज बचाले,मेरे मन मोहियातेरा बस ध्यान किया गजानन नाम लिया ||शिवमण्डल गणराज का गाता हरदम गीत हैइच्छा पूरी हो रही, होती सदा ही जीत हैजीवन मे जो चैन है,गणपति जी की देन हैअपना बनाया है तुझे,खुशी से चमके नैन हैंमुझे कौन संभाले,मेरी लाज बचाले,मेरे मन मोहियातेरा बस ध्यान किया गजानन नाम लिया ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में मुख्य रूप से भक्त की विनम्रता और गणेश जी के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की गई है। 'मै आया हूँ तेरे द्वारे, गणराज गजानन प्यारे' से भक्ति की भावना व्यक्त होती है, जहां भक्त अपने सारे दुःख और समस्याएँ लेकर गणेश जी के दर पर पहुंचता है। गणेश जी, जिन्हें विघ्न विनाशक कहा जाता है, का स्मरण करते हुए भक्त उनसे सहायता की याचना करता है। इसके अलावा, 'मुझे कौन संभाले, मेरी लाज बचाले' जैसे पंक्तियाँ एक गहरी भावनात्मक स्थिति को दर्शाती हैं, जहां भक्त अपनी असहायता को स्वीकार रहा है और गणेश जी से संरक्षण के लिए प्रार्थना कर रहा है।

गीत में भावार्थ उस आध्यात्मिक अनुभूति का भी है, जो भक्त को भगवान के समीप लाने का कार्य करती है। 'रूप चतुर्भुज है तेरा, मूरत बड़ी विशाल है' कहने से, भक्त गणेश जी के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है, जो उनकी महिमा को दर्शाता है। उनका ध्यान करने से, भक्त को शक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है। 'विद्या का भंडार है, माया बड़ी अपार है' दर्शाता है कि गणेश जी ज्ञान और विवेक के प्रदाता हैं, जो दुनिया की कठिनाईयों को पार करने में मदद करते हैं। यह भजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भक्तों को बाहरी संसार की विकृतियों से परे ले जाकर आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।

गणेश जी का महत्व केवल उनके विघ्न विनाशक स्वरूप में नहीं है, बल्कि वे दूसरों के उद्धार की भी प्रतीक हैं। उपनिषदों और पुराणों में गणेश जी की उपासना का विशेष महत्व है, विशेष रूप से भक्तों की कठिनाइयों का सामना करते समय। यह भजन हमें भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करता है, जहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से हम आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। गणेश जी का नाम लेने से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा हमें कठिनाइयों से उबारने का सामर्थ्य देती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की उपासना का महत्व वैदिक साहित्य में गहराई से निहित है। उदाहरण के लिए, गणेश तंत्र और मुद्गल पुराण में उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। इस भजन में यह उल्लेखित किया गया है कि कैसे गणेश जी भक्तों की इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं और उनके द्वारा ध्यान करने से सभी विघ्नों का नाश होता है। महाभारत में भी गणेश जी को 'विद्या' और 'सिद्धि' का अधिष्ठाता माना गया है। इस प्रकार, यह भजन हमारे जीवन में गणेश जी के महत्व को समझने का एक साधन प्रदान करता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश जी का ध्यान करने से मानसिक तनाव कम किया जा सकता है, और इसके साथ ही आत्मशक्ति में वृद्धि होती है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से भक्त की इच्छाओं की पूर्ति एवं जीवन में सकारात्मकता का अनुभव होता है। इसे पढ़ने से मन की शांति मिलती है और किसी भी परेशानी में भय का अभाव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना शुभ माना जाता है। पूजा में एक दीया जलाना, फूलों का भोग अर्पित करना और कच्ची मिठाई चढ़ाना उत्तम होता है। उचित मुद्रा में बैठकर, शांत मन से गणेश जी का स्मरण करते हुए इस भजन का पाठ किया जाना चाहिए। इस समय ध्यान और समर्पण का भाव महत्वपूर्ण होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की उपासना का क्या महत्व है?

गणेश जी सभी विघ्नों का नाशक हैं। उनकी उपासना से जीवन में आने वाले सभी बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

क्या इस भजन का पाठ करने का कोई विशेष समय है?

इस भजन का पाठ प्रात: काल के समय करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय वातावरण साधना के लिए उपयुक्त होता है।

गणेश जी की पूजा करते समय क्या-क्या सामग्री लगती है?

गणेश जी की पूजा में अक्सर मोदक, फल, फूल, और एक दीया जलाना शामिल होता है, जो श्रद्धा का प्रतीक है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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