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भक्ति रस काव्य व भजन

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती (Mere Desh Ki Dharti lyrics in Hindi) - Mahendra Kapoor Upkar Desh Bhakti Song - Bhaktilok

75 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देश की धरती: अद्भुत प्रेम और त्याग का गीत

यह भजन हमारे देश की पवित्र धरती का गुणगान करता है, जीवन की खुशियों और प्रेम की अनुभूति कराता है।

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती..|| बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं.|| सुनके रहट की आवाज़ें यूं लगे कहीं शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजेमेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती…|| जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अंगड़ाइयाँ लेती है क्यूं ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है.|| इस धरती पे जिसने जनम लिया उसने ही पाया प्यार तेरा यहां अपना पराया कोई नहीं है सब पे है मां उपकार तेरा मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती…|| ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहां गांधी सुभाष टैगोर तिलक ऐसे हैं अमन के फूल यहां.|| रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती मेरे देश की धरती.

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की मुख्य थीम हमारे देश की धरती की महानता और उसके अनंत संसाधनों की प्रशंसा है। 'मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती' इस पंक्ति के माध्यम से न केवल भौतिक धन का उल्लेख है, बल्कि हमारे देश के लोगों की मेहनत और परिश्रम का भी संकेत मिलता है। हल चलाते बैल, खुशबूदार खेत, और सुनहरे फसलें जीवन के आनंद को दर्शाती हैं। इसका केंद्र बिंदु यह है कि इस भूमि ने जीवन के आनंद, प्यार, और समर्पण को संजोया है। इसको पूजने की आवश्यकता है, क्योंकि यह हमें जीवन का सुख देती है। यहाँ धरती को मां माना गया है जो सभी प्राणियों का पालन करती है। फिर अनेकों महान विचारकों और क्रांतिकारियों का उल्लेख करते हुए यह रेखांकित किया जाता है कि कैसे इस धरती ने प्रेम, शांति और असीमित संभावनाओं का बीड़ा उठाया।

इस भजन में भावनाओं की गहराई देखने का अवसर मिलता है। जब हम कहते हैं 'बैलों के गले में जब घुंघरू जीवन का राग सुनाते हैं', तब यह दर्शाता है कि कैसे प्राकृतिक ध्वनियाँ भी हमारे जीवन में मधुरता घोलती हैं। गम को दूर करने, खुशियों के कंवल खिलने, और हर खेत के सजे होने का अर्थ है कि जब हम अपने कार्य में आत्म-समर्पण करते हैं, तो ईश्वर का आशीर्वाद हमारे साथ होता है। धरती की ममता और उसके पास आने वाले सुख-दुख के अनुभवों ने हमें एक अद्वितीय सम्बन्ध में बांध दिया है। यहाँ पराया और अपना जैसी कोई भावना नहीं है; धरती सबको एक समान जीने का अधिकार देती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का गहरा संकेत है। जब हम धरती की पूजा करते हैं और उसे जीवनदायिनी मानते हैं, तब हम भक्ति की मूल भावना के निकट पहुँचते हैं। यह सिखाता है कि हमें अपनी मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता महसूस करनी चाहिए। पौराणिक ग्रंथों में भी धरती को देवी माना गया है, जो समस्त जीवन का स्रोत होती है। रामायण, महाभारत और उपनिषदों में भूमि की महिमा का गुणगान किया गया है। यहाँ, भक्तिपूर्ण मन से धरती की पूजा और उसके प्रति श्रद्धा रखना एक सच्ची भक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन न केवल भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि यह सभी धर्मों और जातियों की एकता का भी प्रतीक है। भारतीय पौराणिक कथाओं में धरती को माता के रूप में पूजा गया है। जैसे कि महाभारत में धरती को 'धृतराष्ट्र' के रूप में संदर्भित किया गया है, जहाँ धरती सबका पालन करती है। यह भजन हमें यह याद दिलाता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने इस धरती की रक्षा के लिए बलिदान दिए और हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अपने देश का सम्मान करना चाहिए। इस भजन में उल्लिखित ऋषि-मुनियों की उपस्थिति और अद्वितीय क्रांतिकारियों की प्रशंसा हमें गाँव की ज़िन्दगी की सरलता और महानता समझने में मदद करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक विकास होता है। यह मन को सुकून देता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न करता है। दैनिक जीवन में जब हम इसे गाते हैं, तो एक सामूहिक भावनात्मक अनुभव उत्पन्न होता है जो आत्मा को सुरक्षित अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या संध्या समय किया जाना चाहिए, जब मन शांति में हो। पूजा स्थल पर एक दीया जलाएं और विधिवत आहुति दें। मन में प्रेम और श्रद्धा के भाव के साथ इसे गाएं। उचित पदचाप में बैठकर ध्यान लगाएं और इस दौरान अपने मन में केवल मातृभूमि की महिमा का स्मरण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का प्रमुख संदेश क्या है?

इस भजन का प्रमुख संदेश है हमारी भूमि की पूजा करना और उसे जीवन का स्रोत मानना, जो हमें सुख, प्रेम और समर्पण देती है।

भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है, हमारी धरती स्वर्ण, हीरे, और मोती जैसी अनमोल संपत्ति उगाती है, जो जीवन के सभी सुखों का प्रतीक हैं।

इस भजन को कब और कैसे गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह या शाम को मनोभाव से गाना चाहिए, जब मन आराम में हो। पूजा स्थल पर दीया जलाकर, श्रद्धा सहित गाना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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