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मेरे घर आये प्रभु राम भजन लिरिक्स (Mere ghar aaye prabhu ram Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan Amit Mishra - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रभु राम का आगमन: भक्ति और श्रद्धा का सगम

इस भजन में प्रभु राम के आगमन की अनंत खुशी का वर्णन किया गया है, जो हर हृदय को भक्ति से भर देता है।

मेरे घर आये प्रभु राम भजन लिरिक्स (Mere ghar aaye prabhu ram Lyrics in Hindi) - जय जय राम राम राम जय सिया रामजय जय राम राम राम मेरे प्रभु रामजय जय राम राम राम जय सिया रामजय जय राम राम राम मेरे प्रभु राम।गदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु रामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु रामजनमों के पुन्य जागेजनमों के पुन्य जागेजनमों के पुन्य जागेकुटिया बनी है चारों धामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु राम ||गुण मैं गाती थी जिनकेदर्शन अब करती उनकेहर ली हर इक मजबूरीकर दी हर आशा पूरीबिन माँगे दे दी ख़ुशीदुनिया भर की तमामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु राम ||जय जय राम राम रामजय जय राम राम रामजय जय राम राम राम मेरे प्रभु रामजय जय राम राम रामजय जय राम राम रामजय जय राम राम राम जय सिया राम।इक टक रूप निहारूँ मैंतन मन अपना वारूँ मैंऐसा मनमोहक दूजाऔर नहीं जग में होगाप्यास बुझी नैनों कीमन को मिला आरामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु राम ||फल फूल ना मिसरी मेवाकुछ पास ना हे रघुदेवाखट्टे मीठे बेर धरेस्वीकारो हे नाथ मेरेलीला साहिल अतुल हैकर बद्ध करूँ प्रणामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु रामजय जय राम राम रामजय जय राम_ram राम रामजय जय राम राम राम मेरे प्रभु रामजय जय राम राम रामजय जय राम राम रामजय जय राम राम राम जय सिया रामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु रामगदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु राम ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'मेरे घर आये प्रभु राम' में मुख्य रूप से प्रभु राम के आगमन और उनके प्रति भक्त शबरी की असीम श्रद्धा का वर्णन किया गया है। भजन के आरंभ में भक्त 'जय जय राम राम' का उच्चारण करके राम के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करता है। 'गदगद भई शबरी मेरे घर आये प्रभु राम' इस पंक्ति में भक्त की गदगद भावना स्पष्ट होती है, जिसमें वह अपने हृदय में प्रभु राम के आगमन की खुशी व्यक्त करता है। 'जनमों के पुन्य जागे' का अर्थ है कि प्रभु राम से मिलने के लिए भक्त ने पिछले जन्मों में पुण्य कर्म किए हैं। यह दर्शाता है कि भक्ति का फल अनंत है। इस संदर्भ में, भक्त का घर 'चारों धाम' के समान हो जाता है। यह दिखाता है कि जहाँ राम हैं, वहाँ हर जगह का महत्व समाप्त हो जाता है।

भावार्थ की दृष्टि से, शबरी प्रभु राम को आमंत्रित करते समय अपने मन में अनंत आनंद अनुभव करती है। वह कहती हैं, 'गुण मैं गाती थी जिनके, दर्शन अब करती उनके', जिसमें उनकी भक्ति के प्राथमिकता और राम के प्रति अडिग विश्वास का संकेत मिलता है। यह दर्शाता है कि हर भक्त की जीवन में, प्रभु का साक्षात्कार संभव है। 'बिन माँगे दे दी ख़ुशी' पंक्ति यह बताती है कि प्रभु राम की करुणा में इतना बल है कि वह भक्त की हर इच्छा को बिना कहे ही पूरी कर देते हैं। यह राम की अनुकम्पा और भक्त के प्रति उनके प्रेम को समर्पित करता है। भक्त के हमराही जो राम को पूजते हैं, उनके लिए यह भजन प्यारा मार्गदर्शन प्रदान करता है।

यह भजन भक्ति मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ भक्ति का संपूर्ण अर्थ केवल अनुनय श्रद्धा में निहित है। 'इक टक रूप निहारूँ मैं' पंक्ति में भक्त की ध्यान और प्रेम दोनों का वर्णन है। राम की अनंत लीलाओं का स्मरण करते हुए, वह उनका ध्यान सच्चे मन से करता है। 'आवेदन' का अर्थ भावात्मक रूप से बहुत गहरा है, यहाँ संदर्भित भक्त अपने विविध ज्ञान और वैराग्य को छोड़कर केवल प्रभु की दिव्यता के आगे झुक जाता है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति के मार्ग पर चलने का वक्त अति महत्वपूर्ण है और भावनात्मक अहसास के साथ प्रभु का ध्यान करना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व रामायण से जुड़ा हुआ है, जहाँ प्रभु राम का जीवन हमें सिखाता है कि हमें साधारण जीवन जीने के लिए कठिनाइयों का सामना करना होता है। 'शबरी' की कथा हमें बताती है कि प्रभु राम ने भक्ति और श्रद्धा को कभी नहीं नकारा। रामायण में यह उल्लेख है कि भगवान राम ने शबरी को भरतनाट्यम का फल खाने के लिए आतुरता से स्वीकार किया था, और उनके प्रति प्रेम दर्शाने के लिए कोई सीमा नहीं थी। यह भजन इस कथा को स्मरण कराता है और भक्तों को इस भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्मिक साक्षात्कार और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाता है। राम के नाम, ध्यान और भक्ति से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में प्रेम और खुशियों का संचार होता है। इससे सकारात्मकता का प्रवाह बढ़ता है और भक्त का आत्मविश्वास वर्धित होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन का पाठ प्रात: या सायं के समय करना श्रेष्ठ माना जाता है। सच्चे मन से प्रार्थना करते हुए, दीया जलाना और फल-फूल का भोग अर्पित करना चाहिए। भक्त को ध्यान में प्रभु राम के प्रेम और करुणा का अनुभव करते हुए, भजन का पाठ करना चाहिए। साधक को एक शांत स्थल पर बैठकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मुझे इस भजन का पाठ कब करना चाहिए?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना अच्छा होता है। यह समय भक्तों के लिए साधना के लिए उत्तम है।

क्या इस भजन के पाठ से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और राम के प्रति गहरी भक्ति का अनुभव कराता है। इससे जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

क्या मुझे इस भजन में कोई विशेष सामग्री अर्पित करनी चाहिए?

भजन का पाठ करते समय, आप फूल, फल या मिठाई अर्पित कर सकते हैं। ये साधन आपके प्रेम और भक्ति को दर्शाते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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