आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२० PM | सूर्यास्त: ०५:४८ AM
भक्ति रस काव्य व भजन

श्री गणेश प्यारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे लिरिक्स (Shri Ganesh Pyare Gaura Maat Ke Lalan Lyrics in Hindi) - Pamela Jain Ganesh Bhajan - Bhaktilok

85 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सब देवो में प्रथम श्री गणेश प्यारे श्री गणेश प्यारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे सबसे प्रथम देवा होवे तेरा पूजन होवे तेरा पूजन होवे तेरा पूजन धन वैभव देता बाप्पा तेरा सुमिरन बाप्पा तेरा सुमिरन बाप्पा तेरा सुमिरन शुभ लाभ रिद्धि सिद्धि मिले सुख सारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे लम्बोदर स्वामी दाता गणनायक दाता गणनायक दाता गणनायक मस्तक चन्द्रमा लगे सुख दायक लगे सुख दायक लगे सुख दायक तेरे धाम फलदायी रूप मनोहरे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे मंगल मूरत विघनो को हरते विघनो को हरते विघनो को हरते धर्म ज्ञान हर मन में भरते मन में भरते मन में भरते सारे जग में तुझी से है उजियारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे आन विराजो देवा अंगना हमारे अंगना हमारे अंगना हमारे रोग दोष मेरे हरलो सारे हरलो सारे हरलो सारे हाथ जोड़के पुकारे देव तेरे द्वारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे सब देवो में प्रथम श्री गणेश प्यारे गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन श्री गणेश को समर्पित एक परम महत्वपूर्ण आरती है जो उनके सर्वोच्च स्थान और सर्वप्रथम पूजनीयता को रेखांकित करती है। 'सब देवो में प्रथम श्री गणेश प्यारे' की पंक्ति स्पष्ट करती है कि किसी भी शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान में गणेश का पूजन सर्वप्रथम किया जाता है। 'गौरा मात के ललन शिव सूत न्यारे' पंक्ति गणेश को माता पार्वती के प्रिय पुत्र और शिव के अद्वितीय पुत्र के रूप में प्रस्तुत करती है। भजन में 'धन वैभव देता बाप्पा', 'शुभ लाभ रिद्धि सिद्धि' जैसे मंत्र भक्तों के सांसारिक कल्याण और आध्यात्मिक समृद्धि की कामना व्यक्त करते हैं। 'लम्बोदर स्वामी' उनके विशिष्ट रूप को दर्शाता है जबकि 'दाता गणनायक' उनकी दाता और नेतृत्व की शक्ति को इंगित करता है।

इस भजन का भावार्थ केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक संदेश को व्यक्त करता है। 'मस्तक चन्द्रमा लगे सुख दायक' पंक्ति गणेश के शांत और मनोहारी स्वरूप को दर्शाती है जो भक्त के हृदय को शांति प्रदान करता है। 'मंगल मूरत विघनो को हरते' से स्पष्ट होता है कि गणेश का आशीर्वाद सभी बाधाओं को दूर करता है और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। 'धर्म ज्ञान हर मन में भरते' पंक्ति यह सिद्ध करती है कि गणेश केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान और धार्मिक चेतना का भी स्रोत हैं। 'रोग दोष मेरे हरलो सारे' में भक्त के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक कष्टों को दूर करने की विनती निहित है। यह भजन दर्शाता है कि गणेश की कृपा से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता संभव है।

इस भजन का दार्शनिक मूल्य भक्तिमार्ग की पूर्ण परिभाषा में निहित है। गणेश को सर्वप्रथम पूजने की परंपरा यह सिद्धांत प्रस्तुत करती है कि आध्यात्मिक यात्रा में बुद्धि, विवेक और बाधा-निवारण सबसे आवश्यक है। 'शिव सूत' की संज्ञा गणेश को परम चेतना के पुत्र के रूप में स्थापित करती है। तंत्र और पुराणों में गणेश को विद्या और सिद्धि के अधिपति माना गया है, जिसके बिना कोई भी साधना पूर्ण नहीं हो सकती। इस भजन में 'रिद्धि-सिद्धि' का उल्लेख सांख्य और वेदांत दर्शन से जुड़ा है, जहां रिद्धि भौतिक समृद्धि और सिद्धि आध्यात्मिक उपलब्धि को दर्शाती है। भक्ति का यह मार्ग समर्पण, श्रद्धा और आत्मसमर्पण की भावना पर आधारित है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री गणेश की महत्ता सभी हिंदू पुराणों और वैदिक साहित्य में सर्वोच्च स्थान पर है। मुंडक उपनिषद में गणेश को प्रधान देवता माना गया है। गणेश पुराण में विस्तार से उनकी कथा, महिमा और पूजन विधि का वर्णन है। शिव पुराण में उनका जन्म, माता पार्वती द्वारा उनकी रचना और शिव द्वारा हाथी का सिर लगाना इत्यादि कथाएं हैं। महाभारत और रामायण में गणेश का महत्वपूर्ण स्थान है। व्यास ने महाभारत की रचना के लिए गणेश को लेखक के रूप में चुना था। तंत्रशास्त्र में गणेश को मूलाधार चक्र का अधिपति माना जाता है। इस भजन में 'सब देवो में प्रथम' कहकर वैदिक परंपरा को पुष्ट किया गया है जहां गणेश की पूजा किसी भी शुभ कार्य से पहले की जाती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित गायन और श्रवण मानसिक शांति, स्पष्टता और आत्मविश्वास प्रदान करता है। गणेश का स्मरण बुद्धि, विद्या और विवेक को बढ़ाता है। इस भजन के माध्यम से किए गए ध्यान से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और नए अवसर आते हैं। भक्त के मन में सकारात्मकता, साहस और संकल्प शक्ति जागृत होती है। भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास होता है। शारीरिक रोगों में कमी आती है और मानसिक स्थिरता बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) में सर्वाधिक प्रभावी है। शुद्ध स्थान पर बैठकर गणेश की प्रतिमा या छवि के सामने इस भजन का गायन करें। घी का दीपक जलाएं और गणेश को फूल, अगरबत्ती, चावल और मोदक चढ़ाएं। सीधी मेरुदंड के साथ पद्मासन या सुखासन में बैठें। भजन गायन के समय मन को पूर्ण समर्पण भाव से गणेश पर केंद्रित रखें। श्वास को नियमित रखते हुए धीमे और भक्तिमय स्वर में गायन करें। कम से कम तीन बार भजन दोहराएं। गायन के बाद आरती करें और गणेश का आशीर्वाद माँगें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री गणेश को 'सब देवो में प्रथम' क्यों कहा जाता है?

गणेश को सर्वप्रथम पूजनीय माना जाता है क्योंकि वे विघ्नहर्ता हैं और किसी भी कार्य की सफलता के लिए उनका आशीर्वाद आवश्यक है। वैदिक परंपरा में किसी भी यज्ञ, पूजा या शुभ कार्य से पहले गणेश की पूजा की जाती है। वे सिद्धि के अधिपति और बुद्धि के देवता हैं।

इस भजन में 'गौरा मात के ललन' कौन हैं?

गौरा मात (माता पार्वती) के ललन (प्रिय पुत्र) श्री गणेश हैं। शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में गणेश को भगवान शिव की परिवार परंपरा में विशेष स्थान दिया गया है। 'शिव सूत' नाम उनकी दिव्य परंपरा और अलौकिक स्वरूप को दर्शाता है।

रिद्धि-सिद्धि गणेश के साथ क्यों संबंधित हैं?

रिद्धि (भौतिक समृद्धि) और सिद्धि (आध्यात्मिक उपलब्धि) गणेश की पत्नियों के नाम हैं और वे भगवान गणेश के आशीर्वाद से मिलते हैं। गणेश का आशीर्वाद पाने से भक्त को सांसारिक सुख और आध्यात्मिक लाभ दोनों प्राप्त होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!