उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया शिव भजन (Ujjain ke raja kabhi kirpa najariya Lyrics in Hindi) -
अकाल मृत्यु वो मरे
जो काम करे चांडाल का
और काल उसका क्या बिगाड़े
जो भगत हो महाकाल का.......||
उज्जैन के राजा कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे उज्जैन के राजा
कभी किरपा नजरिया.......||
दुखिया पे डालना रे राजा महाराजा
कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे.......||
पार्वती पति शिवजी है प्यारे
कैलाश पर मेरे भोले विराजे
मेरे भोले विराजे मनकामेश्वर
बाबा मन की मुरादे.......||
महाकालेश्वर बाबा मन की मुरादे
झोली मे डालना रे उज्जैन के राजा
कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे.......||
नैनो मे ज्वाला आँखो मे ज्वाला
जटा मे गंगा पहने मृगछाला
भोले पहने मृगछाला खुलती है जब उनकी
तीसरी वो अँखियाँ .......||
खुलती है जब उनकी तीसरी वो अँखियाँ
तांडव कर डालना रे उज्जैन के राजा
कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे......||
पीते है प्याले भर भर के भंगिया
लगाए दम भोले दिन और रतियाँ
भोले दिन और रतियाँ
बाबा तेरा भगत हूँ ......||
मैं बहुत दीवाना किशन भगत है
बाबा तेरा दीवाना उज्जैन के राजा
कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे......||
के राजा कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे उज्जैन के राजा
कभी किरपा नजरिया......||
दुखिया पे डालना रे राजा महाराजा
कभी किरपा नजरिया
दुखिया पे डालना रे......||
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
देवादिदेव महादेव को समर्पित यह भजन "उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया शिव भजन (Ujjain ke raja kabhi kirpa najariya Lyrics in Hindi) - Kishan Bhagat Shiv Bhajan - Bhaktilok" भगवान शिव के कल्याणकारी और वैराग्यपूर्ण रूप का सजीव चित्रण करता है। शिव का अर्थ ही कल्याण है। इस भजन के शब्दों के माध्यम से साधक शिव की अनंत चेतना, भस्म आरती, डमरू की ध्वनि और ध्यानमग्न मुद्रा का ध्यान करता है।
शिव भक्ति का मूल सिद्धांत यही है कि जगत की प्रत्येक नश्वर वस्तु का अंत शिव में ही होना है। यह भजन भक्त को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने की प्रेरणा देता है। शिव का नाम पंचमहाभूतों को नियंत्रित करने वाली परम शक्ति का प्रतीक है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव अत्यंत भोले हैं और साधारण जल तथा बेलपत्र अर्पण करने मात्र से भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस शिव भजन का संकीर्तन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और कुंडली के ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। नियमित शिव भजन और पंचाक्षरी मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप से तनाव का नाश होता, अवसाद दूर होता है और अंतर्मन में अपूर्व शांति का उदय होता है। यह आरोग्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
शिव संकीर्तन के लिए प्रदोष काल (संध्या समय) अथवा सोमवार का दिन सर्वोत्तम माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठकर शिवजी का ध्यान करते हुए भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने की सरल विधि क्या है?
शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक शिव मंत्र अथवा भजनों का संकीर्तन करने से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
शिव भजनों के लिए कौन सा दिन विशेष है?
सोमवार, प्रदोष व्रत की तिथि और महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना और भजन संकीर्तन के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
क्या शिव जी की उपासना से कुंडली के दोष दूर होते हैं?
हाँ, भगवान शिव (महाकाल) की आराधना से कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष और शनि जनित कष्टों का निवारण होता है।
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