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भक्ति रस काव्य व भजन

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है भजन लिरिक्स

62 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मैया जी की कृपा का आह्वान: दिव्य बसेरा

इस भजन में मैया जी की कृपा और संरक्षण की प्रतीकात्मकता का वर्णन किया गया है, जो हमें आस्था के साथ गाने के लिए प्रेरित करता है।

ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैया जी के द्वारे पे एक अँधा पुकार रहा मैया अंधे को आंखे दो उसे तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैया जी के द्वारे पे कोढ़ी पुकार रहा मैया कोढ़ी को काया दो उसे तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैया जी के द्वारे पे निर्धन पुकार रहा मैया निर्धन को माया दो उसे तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैया जी के द्वारे पे बाँझन पुकार रही मैया बाँझन को बेटा दो उसे तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैयाजी के द्वारे पे एक कन्या पुकारी रही मैया कन्या को वर घर दो उसे तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||मैया जी के द्वारे पे तेरे भगत पुकार रहे मैया भगतो को दर्शन दो उन्हें तेरा ही सहारा है ऊँचे ऊँचे पहाड़ो पे मैया जी का बसेरा है निचे हम रहते है ऊपर मैया जी का डेरा है ...||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ के प्रति श्रद्धा और अनुरोध है, जो विभिन्न प्रकार के भिक्षुकों और साधकों की पुकार को दर्शाता है। 'ऊँचे ऊँचे पहाड़ों पे मैया जी का बसेरा है' इस पंक्ति से यह संकेत मिलता है कि माँ की कृपा और उनकी उपस्थिति केवल भौतिक रूप से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी सर्वोच्च है। भजन में अंधे, कोढ़ी, निर्धन, बाँझन, कन्या आदि की पुकारें है, जो यह दर्शाती हैं कि व्यक्ति की स्थिति चाहे जैसी भी हो, माँ कि कृपा का आश्रय सबको मिलता है। यह भजन माँ की अनुकंपा को समर्पित है, जो समाज के हर वर्ग के व्यक्ति की मदद करती हैं। यहां 'मैयाजी के द्वारे' की आवाहन और उनकी करुणा का अनुभव करने की गहरी भावना मौजूद है।

इस भजन का भावार्थ मानव जीवन के विभिन्न दुखों और संतापों का प्रतिक है। पुकारने वाले सभी पात्र एक तरह से मानवता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे अंधा अपनी आँखों की पूर्ति के लिए पुकारता है, उसी तरह अन्य श्रेणियों के लोग भी अपनी समस्याओं का समाधान माँ से मांगते हैं। 'उसे तेरा ही सहारा है' यह दर्शाता है कि सभी भक्त केवल माँ की कृपा पर निर्भर हैं। यह आस्था और विश्वास का एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो भक्त को यह विश्वास दिलाती है कि कठिनाइयों में माँ का आश्रय ही अंतिम उपाय है। भजन के सभी पात्रों की पुकार में शुद्धता और भक्ति की भावना प्रकट होती है, जो हर भक्त के हृदय को छू जाती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का पालन करने की शिक्षा दी गई है। भक्त को अपने दुख और संताप को माँ के समक्ष रखने के लिए प्रेरित किया गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि कैसे हमें अपनी परेशानियों को माँ के आगे रखना चाहिए, साथ ही यह विश्वास करना चाहिए कि माँ हमारे साथ हैं। माँ की उपस्थिति का अहसास ऊपर पहाड़ों पर बसेरे के रूप में किया गया है, जो हमें यह समझाता है कि माँ की शक्ति और करुणा हमारी पहुँच से ऊपर है, परंतु हमारी भक्ति उसे अवश्य तक लाती है। इस प्रकार, भक्ति का यह मार्ग मानव को सच्चे विश्वास और शुद्ध हृदय से माँ की शरण में लेने के लिए प्रेरित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय धर्म और संस्कृति में गहराई से निहित है। माँ दुर्गा, काली, सरस्वती आदि देवी-देवताओं की उपासना के संदर्भ में इसे देखा जा सकता है, जिनका पूजा समय-समय पर भक्तों द्वारा किया जाता है। पुराणों में भी देवी माँ का वर्णन उनकी करुणामयी स्वरूप के रूप में किया गया है, जो अपने भक्तों की हर प्रकार की समस्या सुनने और उन्हें सुलझाने के लिए सदा तत्पर रहती हैं। माँ का प्रतीकात्मक रूप सर्वोच्च शांति, करुणा और प्रेम का है। इस भजन के द्वारा हम देवी माँ के प्रति अपने श्रद्धा का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं और उनकी क्षेत्र में जाकर उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, उच्चाकांक्षा, और संजीवनी शक्ति की प्राप्ति होती है। यह भजन ध्यान और प्रार्थना के समय में आस्था को मजबूत करता है, जिससे व्यक्ति की आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है। नियमित रूप से इस भजन का गूंजने से भक्त को मानसिक स्थिरता और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय करना अत्यंत लाभकारी होता है। पूजा में एक दीया जलाना, फूलों की मालाएँ अर्पित करना और अपने मन में सच्चे विश्वास और प्रेम से भजन का पाठ करना चाहिए। ध्यान की मुद्रा में बैठकर भजन का गायन करना चाहिए, जिससे मन की एकाग्रता बढ़ सके और माँ जी की कृपा का अनुभव हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन कब और किसके लिए गाया जाता है?

यह भजन आमतौर पर देवी माँ की आराधना में गाया जाता है, खासकर संकट के समय या विशेष पूजा अवसरों पर।

इस भजन में किस तरह की समस्याओं का उल्लेख किया गया है?

भजन में अंधापन, बीमारी, निर्धनता, और संतान सुख जैसी समस्याओं का उल्लेख है, जो भक्तों के जीवन का हिस्सा हैं।

क्या इस भजन का पाठ करने से किसी विशेष लाभ मिलते हैं?

जी हाँ, इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और मुश्किल समय में सहारा मिलता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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