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भक्ति रस काव्य व भजन

रुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में लिरिक्स भजन इन हिंदी (roonajhun baaje paliya moree maiya ke paanv mein lyrics bhajan in hindi)

46 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मैया के पाँव में रुनझुन: भक्ति की लहर

इस भजन के माध्यम से मां के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम का संचार करें।

रुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में,\nया माधव मुरली तोरि ये बिरुद है।\nश्री राधा राधा राधा राधा गोपियाँ भवानी,\nये तो भक्ति के मन में बसी सी सवारी।\nरुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में।\nया माधव मुरली तोरि ये बिरुद है। भवानी तू जो करण संजीवनी जो तोड़।\nमनन मनन हसीना थोड़ना तो रक्खा एक्सप्रेस।\nजुग-जुग जियूं भक्ति ये ठानी जो रे फीका।\nगीता गीता गीता गीता।\nरुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में।\nया माधव मुरली तोरि ये बिरुद है। दोनों हाथ में जो लड्डू तोल-सोल,\nकैसे पावगी कागज दिखाते।\nकहिए क्यूं पवित्र जो मयूर मरीचिका।\nरुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में।\nया माधव मुरली तोरि ये बिरुद है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

‘रुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में’ इस भजन का प्रारंभिक स्वरूप न केवल मातृत्व का प्रतीक है, बल्कि यह भाव नृत्य और आनंद का भी प्रतीक है। यहां, ‘पायलिया’ का उल्लेख चाहते हैं जो माता की उपस्थिति का अहसास कराता है। यह पंक्ति दर्शाती है कि जब हम भक्ति में लीन होते हैं, तो हमारे मन में एक संगीत गूंजता है, जो हमें माता के निकट लाता है। इस भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि भक्ति में लय और ताल का महत्व है। इसलिए भक्त अपनी दिव्य माता के चरणों में, उनकी कृपा का अनुसरण करता है। इस पंक्ति में ‘माधव मुरली’ का उल्लेख करते हुए, भक्ति और प्रेम का संचार किया जाता है, जिससे भक्त की राह में प्रकाश फैलता है।

इस भजन में भावना की गहराई दर्शाने वाली कई पंक्तियाँ हैं। उन पंक्तियों में माता के प्रति समर्पण और प्रेम की सूक्ष्मता को दर्शाया गया है। ‘भवानी तू जो करण संजीवनी जो तोड़’ की पंक्ति में भक्त यह प्रार्थना करता है कि माँ उसकी आध्यात्मिक यात्रा में सजीवता प्रदान करें। यह पंक्ति जीवन की संजीवनी शक्ति और उसके संघर्ष को संबोधित करती है। यहाँ भावना के साथ-साथ भक्ति का स्वर भी सुनाई दे रहा है। माँ का स्मरण करते हुए भक्त अपनी कठिनाइयों को पार करने का संदेश देता है, जिससे उसके जीवन की नकारात्मकता दूर होती है।

इस भजन में समर्पण और विश्वास का गहरा दर्शन है। ‘दोनों हाथ में जो लड्डू तोल-सोल’ की पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त जीवन में संतोष प्राप्त करने के लिए अपने प्रयासों को मूल्यांकित करता है। इसका आध्यात्मिक पक्ष यह है कि जब हम भगवान की भक्ति करते हैं, तो हमें जीवन में संतोष और सुख की प्राप्ति होती है। यह सिद्धांत भक्ति मार्ग के अंतर्गत आता है, जहाँ भक्त अपने समर्पण के माध्यम से अपने संसार और परलोक को समझने का प्रयत्न करता है। भक्त का विश्वास और भक्ति ही उसे जीवन की कठिनाइयों में भी समर्पित रखती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में माँ दुर्गा और माँ काली से जुड़ा होता है, जहाँ देवी की अनुकंपा और सहायता के लिए उन्हें पुकारा जाता है। यह भजन न केवल माता रानी की आराधना में समर्पित है, बल्कि यह भक्तों को याद दिलाता है कि जब हम माता के चरणों में समर्पित होते हैं, तो जीवन में कठिनाइयाँ आसानी से पार हो जाती हैं। इस दृष्टिकोण से, यह भजन न केवल भक्ति दर्शाता है, बल्कि भारतीय संस्कृति में माता की महत्ता को भी उजागर करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मन में शांति और सुकून की अनुभूति होती है। मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मकता का संचार होता है। यह भक्तों को आध्यात्मिक रूप से जागरूक करता है एवं जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने के लिए शक्ति प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

‘रुनझुन बाजे पायलिया मोरी मैया के पाँव में’ का जाप सुबह या संध्या के समय किया जा सकता है। पूजा के दौरान एक दीया जलाना चाहिए और माता को फूल और मिठाई अर्पित करनी चाहिए। उचित मुद्रा में बैठकर, एकाग्रता के साथ इसके मंत्रों का उच्चारण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य विषय क्या है?

इस भजन का मुख्य विषय माँ के प्रति प्रेम और भक्ति है, जिसमें भक्त माता की कृपा की कामना करता है।

क्या इस भजन का जाप करते समय विशेष वस्त्र धारण करना चाहिए?

हां, भजन का जाप करते समय स्वच्छ और सरल वस्त्र धारण करना चाहिए, जिससे मन एकाग्रता की ओर बढ़े।

भजन का जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना शुभ माना जाता है, जब वातावरण शांति प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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