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बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotram Lyrics in Hindi) - by आचार्य अभिराम शास्त्री - Bhaktilok

179 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotram Lyrics in Hindi) - 


।। भैरव ध्यान ।।

वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम् कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।

दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥

दीप्ताकारं विशद-वदनं सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।

हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं शूल–दण्डौ दधानम्॥


।। भैरव मानस पूजन ।।

ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।

ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।

ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।

ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।

ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।


।। मूल स्तोत्र ।।

ॐ भैरवो भूत-नाथश्च भूतात्मा भूत-भावनः।

क्षेत्रज्ञः क्षेत्र-पालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट् ॥


श्मशान-वासी मांसाशी खर्पराशी स्मरान्त-कृत्।

रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धि-सेवितः॥


कंकालः कालः-शमनः कला-काष्ठा-तनुः कविः।

त्रि-नेत्रो बहु-नेत्रश्च तथा पिंगल-लोचनः॥


शूल-पाणिः खड्ग-पाणिः कंकाली धूम्र-लोचनः।

अभीरुर्भैरवी-नाथो भूतपो योगिनी – पतिः॥


धनदोऽधन-हारी च धन-वान् प्रतिभागवान्।

नागहारो नागकेशो व्योमकेशः कपाल-भृत्॥


कालः कपालमाली च कमनीयः कलानिधिः।

त्रि-नेत्रो ज्वलन्नेत्रस्त्रि-शिखी च त्रि-लोक-भृत्॥


त्रिवृत्त-तनयो डिम्भः शान्तः शान्त-जन-प्रिय।

बटुको बटु-वेषश्च खट्वांग -वर – धारकः॥


भूताध्यक्षः पशुपतिर्भिक्षुकः परिचारकः।

धूर्तो दिगम्बरः शौरिर्हरिणः पाण्डु – लोचनः॥


प्रशान्तः शान्तिदः शुद्धः शंकर-प्रिय-बान्धवः।

अष्ट -मूर्तिर्निधीशश्च ज्ञान- चक्षुस्तपो-मयः॥


अष्टाधारः षडाधारः सर्प-युक्तः शिखी-सखः।

भूधरो भूधराधीशो भूपतिर्भूधरात्मजः॥


कपाल-धारी मुण्डी च  नाग- यज्ञोपवीत-वान्।

जृम्भणो मोहनः स्तम्भी मारणः क्षोभणस्तथा॥


शुद्द – नीलाञ्जन – प्रख्य – देहः मुण्ड -विभूषणः।

बलि-भुग्बलि-भुङ्- नाथो बालोबाल – पराक्रम॥


सर्वापत् – तारणो दुर्गो दुष्ट- भूत- निषेवितः।

कामीकला-निधिःकान्तः कामिनी वश-कृद्वशी॥


जगद्-रक्षा-करोऽनन्तो माया – मन्त्रौषधी -मयः।

सर्व-सिद्धि-प्रदो वैद्यः प्रभ – विष्णुरितीव हि॥


।।फल-श्रुति।।


अष्टोत्तर-शतं नाम्नां भैरवस्य महात्मनः।

मया ते कथितं देवि रहस्य सर्व-कामदम् ।।


य इदं पठते स्तोत्रं नामाष्ट-शतमुत्तमम्।

न तस्य दुरितं किञ्चिन्न च भूत-भयं तथा ।।


न शत्रुभ्यो भयं किञ्चित् प्राप्नुयान्मानवः क्वचिद्।

पातकेभ्यो भयं नैव पठेत् स्तोत्रमतः सुधीः ।।


मारी-भये राज-भये तथा चौराग्निजे भये।

औत्पातिके भये चैव तथा दुःस्वप्नजे भये ।।


बन्धने च महाघोरे पठेत् स्तोत्रमनन्य-धीः।

सर्वं प्रशममायाति भयं भैरव-कीर्तनात्।।


।।क्षमा-प्रार्थना।।


आवाहनङ न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजा-कर्म न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।


मन्त्र-हीनं क्रिया-हीनं भक्ति-हीनं सुरेश्वर।

मया यत्-पूजितं देव परिपूर्णं तदस्तु मे।।


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "बटुक भैरव स्तोत्र (Batuk Bhairav Stotram Lyrics in Hindi) - by आचार्य अभिराम शास्त्री - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 15 Aug 2026

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