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भक्ति रस काव्य व भजन

भोले का जयकारा तू लगा के देख ले लिरिक्स (Bhole Ka Jaikara Tu Laga Ke Dekh Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Sheela Kalson - Bhaktilok

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव की कृपा का अद्भुत जयकारा

भोलेनाथ की भक्ति में लीन होकर जीवन से सभी बाधाओं का नाश करें।

भोले का जयकारा तू लगा के देख ले बन जाए सारे काम तू भी आके देख ले... हाथो में डमरू जटाओं मे गंगातन पे विभूति और माथे पे चंदा नैनो में इस रूप को बसा के देख ले बन जाए सारे काम तू भी आके देख ले भोले का जयकारा तू लगा के देख ले... मेरे भोले बाबा की लीला है न्यारी कहते है लोग इन्हें त्रिपुरारी एक बार महिमा तू भी गा के देख ले बन जाए सारे काम तू भी आके देख ले भोले का जयकारा तू लगा के देख ले... सावन का महीना चलो भोले के द्वारे कांधे पे कावड और भोले के जय जय कारे एक बार कावड तू भी ठा के देख ले बन जाए सारे काम तू भी आके देख ले भोले का जयकारा तू लगा के देख ले..

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय शिव की महिमा और कृपा को उजागर करना है। 'भोले का जयकारा तू लगा के देख ले' से यह दर्शाया गया है कि जब हम अपने हृदय से भोलेनाथ की भक्ति करते हैं, तो सभी काम सफल हो जाते हैं। इसमें जटाओं में गंगा, हाथों में डमरू और माथे पर चंदन की विशेषताओं का उल्लेख किया गया है, जो शिव के स्वरूप को दर्शाने के लिए उपयोग किए गए हैं।'मेरे भोले बाबा की लीला है न्यारी' इस पंक्ति में शिव की अनंत लीला और अनुग्रह को व्यक्त किया गया है। ये वाक्य हमें बताती हैं कि शिव की कृपा हर परिस्थिति में हमें सहारा देती है।

भजन के भावार्थ में प्रेम और भक्ति की गहराई को समझा जा सकता है। भक्त सावन के महीने में भोलेनाथ के द्वार पर उपस्थित रहते हैं, कांधे पर कावड़ लेकर भक्ति करते हुए। यह उत्सव भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। 'बन जाए सारे काम' की पुनरावृत्ति भक्तों को प्रेरित करती है कि वे भक्ति के माध्यम से अपने सभी सपनों को साकार कर सकते हैं। शिव की भक्ति के प्रति यह समर्पण एक अद्भुत संबंध का संकेत है, जो भक्तों को मानसिक और आध्यात्मिक सुकून प्रदान करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की उत्कृष्टता व्यक्त की गई है, जो दर्शाता है कि ईश्वर की भक्ति में समर्पण और निष्ठा से जीवन में सभी कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। 'एक बार महिमा तू भी गा के देख ले' हमें बताता है कि जब हम शिव की महिमा का गुणगान करते हैं, तब हमारी अंतःकरण की शक्ति जागृत होती है। यह भजन भक्त और भगवान के बीच की दिव्य बातचीत को दर्शाता है, जहां श्रद्धा का भाव सभी अड़चनों को समाप्त कर देता है। भगवान शिव की अनुग्रह को पाने के लिए हमें अपने हृदय में श्रद्धा और प्रेम रखना चाहिए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं और पुराणों में शिव के अनंत रूपों को दर्शाता है। शिव महापुराण में शिव को कल्याणकारी और भक्तों के संकट दूर करने वाले देवता के रूप में वर्णित किया गया है। सावन का पवित्र महीना शिव की उपासना के लिए विशेष होता है, जिसमें भक्त उनके प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। आस्था के प्रतीक, कावड़ को शिव के दर पर ले जाकर भक्त उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। यह भजन भक्तों को प्रेरित करता है कि वे सावन में भोलेनाथ की भक्ति के लिए प्रतिबद्ध रहें।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। भोले का जयकारा भजन का जप करने से मानसिक शांति, आत्म-विश्वास और भक्ति की शक्ति में वृद्धि होती है। यह भजन भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और उनके जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। नियमित रूप से इस भजन का मानसिक पाठ करने से मन में एकाग्रता और शक्ति का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह या शाम के समय करना विशेष होता है। भक्ति के वातावरण को बनाने के लिए, दीये जलाएं और शिवलिंग पर फूल, बेलपत्र या फल अर्पित करें। भजन का पाठ करते समय मन को स्थिर रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ भक्ति करें। यह ध्यान लाने और शिव की कृपा प्राप्त करने में सहायक होगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भोले का जयकारा भजन कब गाना चाहिए?

भोले का जयकारा भजन सुबह या सावन माह में विशेष रूप से गाया जाना चाहिए, जब भक्त शिव के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं।

इस भजन की महत्वता क्या है?

यह भजन शिव की अद्भुत लीला और भक्तों के संकटों के निवारण में सहायक है, जो भक्तों को मानसिक सुकून देता है।

क्या इस भजन का पाठ करने से कोई लाभ होता है?

भजन के पाठ से मानसिक शांति, आत्म-विश्वास और भक्ति की शक्ति में वृद्धि होती है। इससे भक्तों की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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