( ब्रह्म स्तोत्रम् देव कृतम् )
इसमें ब्रम्हा स्तोत्रम का पाठ किया गया है यह भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। भगवान ब्रह्म संसार के रचयिता और 4 वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) के रचयिता हैं। इस स्तोत्रम के माध्यम से, हम भगवान की स्तुति करते हैं और उन्हें हर चीज के निर्माण के लिए बार-बार नमस्कार करते हैं। इस स्तोत्रम का सुबह-सुबह प्रतिदिन जाप किया जा सकता है।
ब्रह्म स्तोत्रम् देव कृतम् (Brahma Stotram Deva Kritam Lyrics in Hindi) -
देवा ऊचुः ।
ब्रह्मणे ब्रह्मविज्ञानदुग्धोदधि विधायिने ।
ब्रह्मतत्त्वदिदृक्षूणां ब्रह्मदाय नमो नमः ॥ १ ॥
कष्टसंसारमग्नानां संसारोत्तारहेतवे ।
साक्षिणे सर्वभूतानां साक्षिहीनाय ते नमः ॥ २ ॥
सर्वधात्रे विधात्रे च सर्वद्वन्द्वापहारिणे ।
सर्वावस्थासु सर्वेषां साक्षिणे वै नमो नमः ॥ ३ ॥
परात्परविहीनाय पराय परमेष्ठिने ।
परिज्ञानवतामात्तस्वरूपाय नमो नमः ॥ ४ ॥
पद्मजाय पवित्राय पद्मनाभसुताय च ।
पद्मपुष्पैः सुपूज्याय नमः पद्मधराय च ॥ ५ ॥
सुरज्येष्ठाय सूर्यादिदेवता तृप्तिकारिणे ।
सुरासुरनरादीनां सुखदाय नमो नमः ॥ ६ ॥
वेधसे विश्वनेत्राय विशुद्धज्ञानरूपिणे ।
वेदवेद्याय वेदान्तनिधये वै नमो नमः ॥ ७ ॥
विधये विधिहीनाय विधिवाक्यविधायिने ।
विध्युक्त कर्मनिष्ठानां नमो विद्याप्रदायिने ॥ ८ ॥
विरिञ्चाय विशिष्टाय विशिष्टार्तिहराय च ।
विषण्णानां विषादाब्धिविनाशाय नमो नमः ॥ ९ ॥
नमो हिरण्यगर्भाय हिरण्यगिरिवर्तिने ।
हिरण्यदानलभ्याय हिरण्यातिप्रियाय च ॥ १० ॥
शताननाय शान्ताय शङ्करज्ञानदायिने ।
शमादिसहितायैव ज्ञानदाय नमो नमः ॥ ११ ॥
शम्भवे शम्भुभक्तानां शङ्कराय शरीरिणाम् ।
शाङ्करज्ञानहीनानां शत्रवे वै नमो नमः ॥ १२ ॥
नमः स्वयम्भुवे नित्यं स्वयं भूब्रह्मदायिने ।
स्वयं ब्रह्मस्वरूपाय स्वतन्त्राय परात्मने ॥ १३ ॥
द्रुहिणाय दुराचारनिरतस्य दुरात्मनः ।
दुःखदायान्यजन्तूनां आत्मदाय नमो नमः ॥ १४ ॥
वन्द्यहीनाय वन्द्याय वरदाय परस्य च ।
वरिष्ठाय वरिष्ठानां चतुर्वक्त्राय वै नमः ॥ १५ ॥
प्रजापतिसमाख्याय प्रजानां पतये नमः ।
प्राजापत्यविरक्तस्य नमः प्रज्ञाप्रदायिने ॥ १६ ॥
पितामहाय पित्रादिकल्पनारहिताय च ।
पिशुनागम्यदेहाय पेशलाय नमो नमः ॥ १७ ॥
जगत्कर्त्रे जगद्गोप्त्रे जगद्धन्त्रे परात्मने ।
जगद्दृश्यविहीनाय चिन्मात्रज्योतिषे नमः ॥ १८ ॥
विश्वोत्तीर्णाय विश्वाय विश्वहीनाय साक्षिणे ।
स्वप्रकाशैकमानाय नमः पूर्णपरात्मने ॥ १९ ॥
स्तुत्याय स्तुतिहीनाय स्तोत्ररूपाय तत्त्वतः ।
स्तोतृणामपि सर्वेषां सुखदाय नमो नमः ॥ २० ॥
इति स्कान्दपुराणे सूतसंहितायां देवकृत ब्रह्म स्तोत्रम् ।
🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)
भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "ब्रह्म स्तोत्रम् देव कृतम् (Brahma Stotram Deva Kritam Lyrics in Hindi) - Bramha stotra - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।
भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)
सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।
🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)
राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।
राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?
भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?
हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।
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