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Krishna Bhajan

चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे लिरिक्स (Chali Ja Rahi Hai Umar Dheere Dheere Lyrics in Hindi) - Upasana Mehta Krishna Bhajan - Bhaktilok

100 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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उमर के इस प्रवाह में श्रीकृष्ण का ध्यान

यह भजन हमें जीवन के हर पल में भगवान श्रीकृष्ण की याद दिलाने का माध्यम है।

चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे गति न थम न धीमी क्यूं, कौन जाने क्यूं सारा जग भटका आ निगाहें तेरा ही दीदार करें, कर के सजदा तेरे आगे झुका चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे साँस लेता यहाँ सब कुछ, तू ही सब कुछ है ऐ मेरे ख़ुदा खुशियों की छांव तले, तुम्हीं पे मेरा सब कुछ है ये सच्चा चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे बिता न जाए ये वक्त बेकार, तेरा ही मैं लूँ नाम यहाँ संग रहूं तेरा दिल से मैं, न हो दूजा कोई जन्म के द्वार चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे चली जा रही है उमर धीरे धीरे पल पल यू आठौँ पहर धीरे धीरे

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के शब्द 'चली जा रही है उमर धीरे धीरे' में जीवन की धारा का संकेत मिलता है। यहाँ पर कवि यह बताना चाहते हैं कि समय निरंतर आगे बढ़ता है और हर पल की कीमत को समझना आवश्यक है। समय की गति अनियंत्रित है, कोई भी इसे रोक नहीं सकता। इसलिए, यह भजन हमें याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन के अंतिम क्षणों का मूल्य समझते हुए, प्रभु के प्रति समर्पित रहना चाहिए। भजन में दिए गए विशेष संकेत यह महसूस कराने के लिए हैं कि हमें जीवन के इसी सफर में अपने प्रभु को याद कर गुरुवाक्य में जीना चाहिए। यह प्रवृत्ति हमें भक्ति के रास्ते पर ले जाती है।

भावार्थ के दृष्टिकोण से, इस भजन में जीवन की थकान और उसके साथ आने वाली चिंता का उल्लेख किया गया है। 'कौन जाने क्यूं सारा जग भटका' जैसे वाक्य हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि मनुष्य क्यों अपने लक्ष्य से भटकता है। यह आत्मावलोकन का अवसर प्रदान करता है। जब भी हम भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करते हैं, हमारे मन से सभी द्वेष, माया और चिंताओं का हरण होता है। श्रीकृष्ण के भक्तों की यह विशेषता होती है कि वे न केवल प्रेम में जीते हैं बल्कि अपने हर पल का मूल्य समझते हैं।

इस भजन का मुख्य तत्व भक्ति मार्ग की अहमियत को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के हर क्षण में प्रभु को याद करने का तरीका है। 'तेरे आगे झुका' वाक्य में समर्पण की भावना व्यक्त होती है। यह भजन हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन की हर सांस में श्रीकृष्ण का ध्यान रखना चाहिए और इसे एक साधना का हिस्सा बनाना चाहिए। जब हम अपने जीवन में भक्ति को स्थान देते हैं, तो हम समय के प्रवाह में प्रभु का संरक्षण प्राप्त करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा में गहरी जड़ों वाला है। महाभारत और भगवद गीता में श्रीकृष्ण के उपदेश हमें भक्ति की गहराई का अनुभव कराते हैं। भजन का यह स्वरूप हमें जीवन के क्षणभंगुरता की याद दिलाता है और हमें सिखाता है कि किस प्रकार हमें प्रभु की संगति में अपने जीवन को सार्थक बनाना है। इस संदर्भ में, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि भाग्य की सच्चाई केवल ईश्वर की कृपा पर निर्भर करती है, जो हम सभी के साथ है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, आत्मा के सुख, और दिव्य अनुभव में वृद्धि करता है। नियमित रूप से इसे गाने से मन की उदासी और थकावट दूर होती है। भक्ति से आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है, जो व्यक्ति को निरंतर प्रेरित और सकारात्मक रखते हैं। यह भजन जीवन में भक्ति का महत्व और हर क्षण का सदुपयोग सिखाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह की आरती या शाम की पूजा में किया जा सकता है। इसे करने का सही तरीका है कि भक्त एक शांत और साफ स्थान पर बैठें, जहां वे भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने हों। दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना इस साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मन में श्रद्धा रखते हुए भजन का गान करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि हमें जीवन के हर पल का महत्व समझना चाहिए और प्रभु श्रीकृष्ण की मानसिकता के साथ जीना चाहिए।

क्या इस भजन का सुनना विशेष दिन पर करना चाहिए?

इस भजन का जाप विशेष रूप से जन्माष्टमी जैसे धार्मिक अवसरों पर किया जा सकता है, लेकिन इसे किसी भी दिन श्रद्धा पूर्वक गाया जा सकता है।

क्या यह भजन परिवार के सभी सदस्यों के लिए उपयुक्त है?

हां, यह भजन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है। यह न केवल व्यक्तिगत साधना के लिए बल्कि परिवार की एकता के लिए भी प्रेरणादायक है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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