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दामोदर अष्टकम लिरिक्स (Damodar Astakam Lyrics in Hindi) - Damodarashtakam - Bhaktilok

100 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री दामोदर अष्टकश्लोक: भक्ति की अमृतवृष्टि

यह दिव्य अष्टकम प्रेम और भक्ति से भरे हृदय के लिए समर्पित है, जो दामोदर की महिमा को झलकाता है।

 दामोदर अष्टकम लिरिक्स  (Damodar Astakam Lyrics in Hindi) - नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपंलसत्कुण्डलं गोकुले भ्राजमानंयशोदाभियोलूखलाद्धावमानंपरामृष्टमत्यं ततो द्रुत्य गोप्या ॥ १॥रुदन्तं मुहुर्नेत्रयुग्मं मृजन्तम्कराम्भोज-युग्मेन सातङ्क-नेत्रम्मुहुः श्वास-कम्प-त्रिरेखाङ्क-कण्ठस्थित-ग्रैवं दामोदरं भक्ति-बद्धम् ॥ २॥इतीदृक् स्वलीलाभिरानंद कुण्डेस्व-घोषं निमज्जन्तम् आख्यापयन्तम्तदीयेशितज्ञेषु भक्तिर्जितत्वमपुनः प्रेमतस्तं शतावृत्ति वन्दे ॥ ३॥वरं देव! मोक्षं न मोक्षावधिं वान चान्यं वृणेऽहं वरेशादपीहइदं ते वपुर्नाथ गोपाल बालंसदा मे मनस्याविरास्तां किमन्यैः ॥ ४॥इदं ते मुखाम्भोजम् अत्यन्त-नीलैःवृतं कुन्तलैः स्निग्ध-रक्तैश्च गोप्यामुहुश्चुम्बितं बिम्बरक्ताधरं मेमनस्याविरास्तामलं लक्षलाभैः ॥ ५॥नमो देव दामोदरानन्त विष्णोप्रभो दुःख-जालाब्धि-मग्नम्कृपा-दृष्टि-वृष्ट्याति-दीनं बतानुगृहाणेष मामज्ञमेध्यक्षिदृश्यः ॥ ६॥कुबेरात्मजौ बद्ध-मूर्त्यैव यद्वत्त्वया मोचितौ भक्ति-भाजौ कृतौ चतथा प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छन मोक्षे ग्रहो मेऽस्ति दामोदरेह ॥ ७॥नमस्तेऽस्तु दाम्ने स्फुरद्-दीप्ति-धाम्नेत्वदीयोदरायाथ विश्वस्य धाम्नेनमो राधिकायै त्वदीय-प्रियायइनमोऽनन्त-लीलाय देवाय तुभ्यम् ॥ ८॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

दामोदर अष्टकम का प्रत्येक श्लोक भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबे भक्तों के लिए एक दिव्य प्रार्थना है। पहले श्लोक में, ‘नमामीश्वरं सच्चिदानंदरूपं’ से भगवान के अद्वितीय स्वरूप का वर्णन होता है, जो अनंत आनंद का स्रोत है। इस श्लोक में कहा गया है कि वह यशोदा के मनोकामनाों का लगातार ध्यान और प्यार से पालन करने वाला है। यहां ‘लसत्कुण्डलं’ का उल्लेख उनके अत्यंत सुंदर कानों का प्रतीक है। इसके आगे, दामोदर के रस-filled लीलाओं का वर्णन किया गया है, जो भक्तों को भक्ति की गहराई में ले जाता है। संपूर्ण अष्टकम इस भाव में बुनता है कि दामोदर की कृपा के बिना मोक्ष नहीं है, इसलिए भक्त उनके चरणों में निवेदन करते हैं।

दामोदर अष्टकम की भावार्थ पूरी तरह से प्रभु की लीला और वात्सल्य भक्ति पर निर्भर करता है। विशेष रूप से, श्लोकों में भक्ति के विभिन्न पहलुओं का वर्णन मिलता है, जैसे ‘वरं देव! मोक्षं न मोक्षावधिं’, जहां भक्त मोक्ष की बजाय भगवान का साक्षात्कार की इच्छा रखते हैं। यह भक्त की भावनाओं की गहराई को दर्शाता है कि वे केवल मोक्ष नहीं, बल्कि दामोदर की भक्ति में जीना चाहते हैं। इस काव्य का अनिवार्य तत्व प्रेम है जो भक्त को श्री कृष्ण की वंदना के माध्यम से आत्मसात करता है, और पूरे अष्टकम में इसकी संवेगात्मक महत्ता को दर्शाता है।

इस महान भक्ति ग्रंथ में दामोदर का सारगर्भित रूप दर्शाया गया है, जो भक्ति मार्ग का पालन करने वाले प्रत्येक भक्त के लिए एक आदर्श है। ‘प्रेम-भक्तिं स्वकां मे प्रयच्छ’ में भक्त की कामना प्रकट होती है कि वे केवल भगवान के प्रेम में ही संतुष्ट हो। यह दिखाता है कि भक्ति केवल प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि एक साधना है, जो भक्त को परमशक्ति में जोड़ता है। दामोदर अष्टकम की सुंदरता उसके समर्पण और श्रद्धा में है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

दामोदर अष्टकम का उल्लेख स्कंदपुराण और भागवत पुराण में भी देखने को मिलता है। इनमें भगवान कृष्ण के दामोदर रूप का वर्णन किया गया है, जिसमें वे गोपियों और उनके माता-पिता के प्रति असीम प्रेम दर्शाते हैं। यह अष्टकम भक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहां भक्त भगवान को अपार प्रेम और आस्था के साथ समर्पित करते हैं। इसके पाठ से भक्तों को आत्मिक शांति और प्रसन्नता मिलती है। दामोदर अष्टकम पढ़ने से भक्त अपने भीतर की भक्ति को जागृत करने में सक्षम होते हैं और यह उनके आत्मा को दिव्य प्रेम में डुबो देता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस अष्टकम का जाप करने से मन में शांति और संतोष की भावना बढ़ती है। मानसिक तनाव से राहत पाने, शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार और आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने में यह अत्यंत लाभकारी है। इसके नियमित पुनरावृत्ति से समर्पण की भावना और भक्ति की अनुभूति में वृद्धि होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

दामोदर अष्टकम का पाठ सुबह जल्दी करना अत्यधिक लाभदायक होता है। इस दौरान शांतिपूर्ण वातावरण बनाना चाहिए, दीप जलाना और कुछ नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। आदरपूर्वक बैठकर ध्यान लगाना आवश्यक है और मन को एकाग्र करने का प्रयास करना चाहिए। सही मनो-स्थिति में किया गया जाप अधिक फलित होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दामोदर अष्टकम का मुख्य उद्देश्य क्या है?

दामोदर अष्टकम का उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण के दामोदर रूप की भक्ति करना और उनके प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करना है। यह उन भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो आध्यात्मिक शक्ति और मार्गदर्शन की खोज में हैं।

क्या दामोदर अष्टकम के पाठ से मोक्ष प्राप्त होता है?

जी हां, दामोदर अष्टकम का पाठ करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति की आशा होती है। भक्त अपने हृदय में भगवान की भक्ति को अनुभव करते हैं, जिससे उन्हें आत्मिक शांति और ऊँचाई मिलती है।

इस अष्टकम का जाप करने का सही समय कौन सा है?

इस अष्टकम का जाप प्रात: काल स्नान करके, पूजा करते समय करना चाहिए। सुबह का समय मन को शांत और ध्यान के लिए योग्य बनाता है, जिससे दामोदर की कृपा का अनुभव अधिक प्रबल होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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