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Punjabi Devi Bhajan

देवी सूक्तम लिरिक्स (Devi Suktam Lyrics in Hindi) - नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम: Ya Devi Sarva Bhutesh - Bhaktilok

77 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव रूप देवी सूक्त: सम्पूर्ण जीवन का आधार

शिव की कृपा पाने और जीवन में शक्ति के लिए देवी सूक्त का पाठ करें।

 देवी सूक्तम लिरिक्स (Devi Suktam Lyrics in Hindi) -नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम ।।रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नम:ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नम: ।।कल्याण्यै प्रणतां वृध्द्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नम:नैर्ऋत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नम: ।।दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यैख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नम: ।।अति सौम्याति-रौद्रायै नतास्तस्यै नमो नम:नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्य नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयतेनमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषुच्छायारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थितानमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।इन्द्रियाणा-मधिप्ठात्री भूतानां चाखिलेषु याभूतेषु सततं तस्यै वियाप्तिदेव्यै नमो नम:चितिरूपेण या कृत्स्न-मेदद्-व्याप्य स्थिता जगत्नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमस्तस्यै नमो नम: ।।स्तुता सुरै: पूर्वमभीष्ट-संश्रयात्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविकाकरोतु सा न: शुभहेतुरीश्र्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापद:।।या साम्प्रतं चोध्दत-दैत्य-तापितैरस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यतेया च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति न:सर्वापदो भक्ति-विनम्र-मूर्तिभि:।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

देवी सूक्त का प्रमुख विषय देवी की महिमा प्रकट करना है। भजन की आरंभिक पंक्तियाँ 'नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:' माता की आराधना की एक सुंदर विधि है, जिसमें भक्त देवी के प्रति अपनी भक्ति का समर्पण करते हैं। इस सूक्त में देवी की सर्वव्यापकता और उनकी शक्तियों का उल्लेख है; जैसे कि 'या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता' यह दर्शाता है कि देवी सभी प्राणियों में बुद्धि के रूप में उपस्थित हैं। इस प्रकार भक्तगण उन्हें सभी प्रकार की शक्तियों के रूप में मानते हैं जो सम्पूर्ण सृष्टि में विद्यमान हैं। देवी के अनेक रूपों का वर्णन जैसे दुर्गा, लक्ष्मी और मातृरूप, साधकों को देवी की विविधा शक्तियों को पहचानने का अवसर भी देते हैं।

भजन के द्वारा देवी की आराधना भक्तों में आंतरिक शक्ति और तन्मयता का संचार करती है। 'या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता' हमसे यह प्रेरणा लेती है कि शांति का स्रोत भी देवी में ही है। देवी सूक्त का पाठ करते समय भक्त अपने मन को शांत करते हुए उनके प्रति समर्पण और प्रेम का अनुभव करते हैं। इन पंक्तियों में वर्णित देवी विभिन्न भावनाओं जैसे श्रद्धा, द्वेष, और दया रूप हैं; यह दर्शाता है कि वे केवल पूजा का विषय नहीं हैं, बल्कि जीवन के प्रत्येक पहलू का प्रतिनिधित्व करती हैं। जिससे भक्त उनका ध्यान करके मानसिक शांति की अनुभूति कर सकते हैं।

देवी सूक्त भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो भक्तों को समर्पण और परिश्रम के द्वारा आनन्द और मोक्ष की प्राप्ति की ओर ले जाती है। यह भजन हमें सिखाता है कि तप और भक्ति के साथ जो विनम्रता का भाव जुड़ा है, वह भगवान को आकर्षित करता है। भगवान शिव और देवी का एकाकार स्वरूप हमें यह बताता है कि जब तक हम सृष्टि के इस चक्र में देवी के प्रति समर्पित नहीं होते तब तक हम सही रास्ते पर नहीं बढ़ सकते। इसलिए, देवी के प्रति यह समर्पण हमें एक धार्मिक यात्रा में ले जाता है जो न केवल आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग है, बल्कि दैनिक जीवन को उन्नत करने की दिशा में भी बढ़ाने वाला है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवी सूक्त का धार्मिक महत्व उपनिषदों और पुराणों में व्याप्त देवी की दिव्यता के अनंत स्वरूपों में बसा हुआ है। विशेष रूप से, देवी से संबंधित विभिन्न ग्रंथों जैसे देवी भागवतम्, दुर्गा सप्तशती, और ऋग्वेद में भी देवी की अद्वितीयता का प्रमाण मिलता है। यह आराधना ज्ञान, प्रेम और शक्ति का समुचित संबोधन प्रस्तुत करती है, जहां देवी किसी न किसी रूप में हर जीव में विद्यमान हैं, जो हमें अपने आसपास के संसार में उनकी उपस्थिति का बोध कराती है। यह हमें सिखाती है कि जीवन की चुनौतियों में भी आशा और सकारात्मकता का दीप जलाए रखना चाहिए।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। देवी सूक्त के नियमित पाठ से मानसिक शांति, ध्यान स्थिरता और आत्मिक बल की वृद्धि होती है। यह भजन न केवल मानसिक चिकित्सा प्रदान करता है, बल्कि व्यक्ति को आत्मविश्वास के साथ जीवन के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देता है। इसके जाप से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

देवी सूक्त का पाठ करने का उत्तम समय प्रातः काल और संध्या का है। भक्त एक शांत स्थान पर बैठकर, सफेद वस्त्र धारण करें और एक दीया जलाएँ। इस दौरान भक्त को मन में समर्पण और भक्ति का भाव लाना चाहिए, जिससे वे भावनात्मक रूप से देवी से जुड़ सकें। ध्यान और स्मरण करते हुए, सूक्त का जाप करने से एकाग्रता और आध्यात्मिक संवेदनाएं जागृत होती हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

देवी सूक्त का महत्व क्या है?

देवी सूक्त का महत्व देवी की सर्वव्यापिता और शक्ति का बोध कराना है, जो हमारे सभी भावों में वास करती हैं। यह भजन विभिन्न रूपों में देवी की आराधना का माध्यम है।

इस भजन के पाठ का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इस भजन का पाठ प्रात: और संध्या में किया जाना चाहिए। इस दौरान मन को शांत कर, ध्यान लगाकर पाठ करना उपयुक्त होता है।

क्या देवी सूक्त पाठ करने से कोई विशेष लाभ होता है?

देवी सूक्त का पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मबल और धार्मिक भावना में वृद्धि होती है। यह जीवन में आशा और सुधार लाने में मदद करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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