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भक्ति रस काव्य व भजन

गजानन पूरण काज करो सफल हमारा ये आयोजन लिरिक्स (Gajanan Puran Kaj Karo Safal Hamara Ye Aayojan Lyrics in Hindi) - by Lakhbir Singh Lakha - Bhaktilok

48 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गजानन की कृपा: भक्तों के संकट निवारण का भजन

गजानन की महिमा का गुणगान कर, संकटों से मुक्ति का मार्ग सुलभ करें।

गजानन पूरण काज करो सफल हमारा ये आयोजनहे महाराज करो गजानन पूरण काज करो..।।..।। विघ्न हरण मंगल के दाता प्रथम तुम्हारा सुमिरण ध्यान धरे गुणगान करे क्या धनवान क्या निर्धन पधारो सर पर हाथ धरो गजानन पूरण काज करो..।।..।। पिता महाशिव भोले शंकर गौरी माँ के दुलारे रिद्धि सिद्धि अंग संग साजे शुभ शुभ चरण तुम्हारे गजानन जीवन तार करो गजानन पूरण काज करो..।। पान सुपारी श्रीफल दूर्वा मोदक भर भर थाल लड्डुवन भर भर थाल रखियो अपने भक्तो की दीजो सुर और ताल जी मेरे अवगुण दोष हरो सफल हमारा ये आयोजन गजानन पूरण काज करो..।। गजानन पूरण काज करो..।। सफल हमारा ये आयोजन हे महाराज करो गजानन पूरण काज करो..।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान गणेश की महिमा का बखान किया गया है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। 'गजानन पूरण काज करो' से स्पष्ट है कि भक्त गणेश से यह प्रार्थना कर रहे हैं कि वे उनके कार्यों को सफल बनाएं। भजन की दूसरी पंक्ति 'विघ्न हरण मंगल के दाता' भगवान गणेश की सकारण शक्ति का प्रतीक है, जो सभी विघ्न और बाधाओं को दूर करता है। यह भजन भक्तों को सच्चे मन से ध्यान करने, गणेश की विभूतियों का स्मरण करने और उनके गुणगान करने की प्रेरणा देता है, जिससे मन और जीवन में शांति का अनुभव होता है।

इस भजन का भावार्थ गहन और भावनात्मक है। भक्त गणेश को न केवल व्यक्तिगत संकटों से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें सुख और समृद्धि के लिए भी पुकारते हैं। पंक्ति 'पिता महाशिव भोले शंकर' से पता चलता है कि गणेश, शिव और पार्वती के पुत्र हैं, जो उन्हें विशेष स्थान देता है। भक्तों की भावना यह है कि गणेश अपने माता-पिता के गुणों को अपने में समेटे हुए हैं और उनकी कृपा से जीवन में रिद्धि और सिद्धि की प्राप्ति संभव है। यह उन्हें न केवल भक्ति का मार्ग दिखाता है, बल्कि उनके प्रति अटूट विश्वास दिलाता है।

भक्ति मार्ग में भगवान गणेश का स्थान अद्वितीय है। उनके गुण, जैसे 'विघ्न हरण', 'मंगल के दाता', और 'जीवन तार' भक्तों को सिखाते हैं कि कैसे कठिनाइयों और विघ्नों से पार पाया जाए। भक्त गणेश की भक्ति में से आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति करते हैं। यह भजन भक्तों के लिए उनके विचारों में स्पष्टता, मानसिक शांति और बाधाओं को पार करने की प्रेरणा देता है। बाधाओं को दूर करने के लिए, गणेश के चरणों में विनम्रता और समर्पण से भक्ति की जाती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश का पूजन भारतीय पौराणिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है। भगवान गणेश का उल्लेख विभिन्न पुराणों, जैसे गणेश पुराण, स्कंद पुराण और यजुर्वेद में मिलता है। वे मंगलकारी देवता हैं जिन्हें सभी शुभ कार्यों का आरम्भक माना जाता है। भजन में गाया गया 'गजानन पूरण काज' भावार्थ देता है कि जब भी कोई विशेष आयोजन हो, गणेश का स्मरण करना चाहिए ताकि कार्य में कोई विघ्न न आए। यह भजन गणेश की महिमा का एक अनुपम उदाहरण है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। भक्त अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन महसूस करते हैं, समस्याओं का समाधान सहजता से मिलता है, और संतोष की भावना उत्पन्न होती है। यह भजन ध्यान एवं साधना का एक अभूतपूर्व साधन है, जो भक्तों को हृदय से जोड़ता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सामूहिक पाठ सुबह या शाम के वक्त करना सबसे उचित है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे पूजा स्थल पर जाकर दीप जलाएं, भोग में पान, सुपारी, और मोदक का अर्पण करें। ध्यान करें कि मन में श्रद्धा हो और भगवान गणेश की कृपा की भावना बनी रहे। सही मुद्रा में जीवित रहकर भजन का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गजानन पूरण काज करो सफल हमारा ये आयोजन भजन का मूल संदेश क्या है?

इस भजन का मूल संदेश भगवान गणेश से प्रार्थना करना है कि वे हमारे सभी कार्यों को सफल बनाएं और जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करें।

भजन के दौरान क्या विशेष सामग्री अर्पित करनी चाहिए?

इस भजन के दौरान भक्तों को पान, सुपारी, मोदक, और फल जैसे शुभ खाद्य पदार्थ अर्पित करने चाहिए, ताकि भगवान गणेश की कृपा प्राप्त हो सके।

इस भजन का पाठ किस समय करना लाभकारी है?

इस भजन का सामूहिक या व्यक्तिगत पाठ सुबह या शाम के समय करना लाभकारी होता है, क्योंकि यह समय ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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