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भक्ति रस काव्य व भजन

गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आज लिरिक्स (Ganaraj Ganaraj More Angana Padharo Aaj Lyrics in Hindi) - Shahnaaz Akhtar Ganesh BHajan - Bhaktilok

100 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश का स्वागत: विनाशक विघ्नहर

अपने अंगना में गणराज का स्वागत करें, उनके दर्शन की आराधना से सभी विघ्न दूर होंगे।

गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आजदेवो दरश महाराज मोहे देवो दरश महाराज गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आजविघ्न विनाशक विघ्न हरैया तुम भक्तन के काज करैया पूराण करो मेरो काज देवा पूरण करो mero काज गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आजरिद्धि सद्धि के तुम हो स्वामी मंगल करता पालन हारी तिनों लोको में तुमरा राज तिनों लोको में तुमरा राज गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आजये तेरा दास करे यही अर्जी सुनलो देवा मेरी विनती सब कि रख लो लाज गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आजदेवो दरश महाराज मोहे देवो दरश महाराज गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आज ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपने प्रिय deity गणेश को पुकार रहे हैं और उनसे आग्रह कर रहे हैं कि वे उनके अंगना में पधारें। 'गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आज' का अर्थ है कि भक्त गणराज का स्वागत करना चाहते हैं, जो विघ्न विनाशक और भक्तों के काजों को पूरा करनेवाले हैं। यह भजन विशेष रूप से नए प्रारंभ, जैसे किसी कार्य के आरंभ में, गुनगुनाया जाता है। भक्त गणेश से अनुरोध करते हैं कि वे 'पूरण करो मेरो काज' यानी उनके सभी कार्यों में सफलता प्रदान करें। यहां पर 'विघ्न हरैया' शब्द का उपयोग किया गया है जो यह दिखाता है कि गणेश बाधाओं का नाशक हैं।

भजन में एक गहरी भावनात्मक छाया है, जहां भक्त अपनी समस्त समस्याओं और विघ्नों के लिए गणेश से सहायता मांगते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी चिंता और इच्छाओं को व्यक्त कर रहे हैं, साथ ही गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा और विश्वास को भी प्रकट कर रहे हैं। वे 'आपके दर्शन' की प्रार्थना करते हैं ताकि गणेश उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। भजन में 'सुनलो देवा मेरी विनती' का अर्थ है कि भक्त अपनी प्रार्थना को गणेश तक पहुँचाने में पवित्रता से आगे बढ़ रहे हैं। यह भक्त की भक्ति और समर्पण को दर्शाता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहराई है, जहां भक्त कमल की पंखुड़ियों की भांति संवेदनाओं के साथ भगवान की ओर अग्रसर है। 'रिद्धि' और 'सिद्धि' के रूप में गणेश को दर्शाने से यह पता चलता है कि वे केवल पूर्णता और कल्याण का ही प्रतीक नहीं हैं, अपितु समृद्धि के भी स्वामी हैं। यहाँ पर 'तीनों लोकों में तुमका राज' का उल्लेख करने से यह सिद्ध होता है कि गणेश का अधिकार संपूर्ण सृष्टि पर है। यह एक संकेत है कि भक्त का संबंध केवल धरती ही नहीं, बल्कि आकाश और पाताल से भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की पृष्ठभूमि सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और यह बात हिन्दू पौराणिक कथा में स्पष्टता से दर्शाई गई है। गणेश की उपासना से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इस भजन का उल्लेख विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के पर्व पर प्रार्थ کردم होता है, जो कि भक्तों के लिए नए कार्यों का शुभारंभ बिंदु होता है। पौराणिक ग्रंथों में गणेश को पूजा करते समय धार्मिक मंत्रों का उच्चारण करना और भक्ति के साथ उनका स्मरण करना बताया गया है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। इस भजन का उच्चारण करने से मानसिक शांति, मानसिक तनाव में कमी एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित रूप से इसे सुनने से भक्त के जीवन में अच्छे संयोग और समृद्धि के द्वार खुलते हैं। यह भजन नकारात्मकता को हटाकर सकारात्मकता लाने में भी सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण प्रातः काल या संध्या समय में करना सर्वोत्तम है। इसे सुनने या गाने के समय एक दीप जलाना, नैवेद्य अर्पित करना और मन में श्रद्धा रखना आवश्यक है। साधना करते समय अच्‍छा होता है की भक्त एक उत्तर कुंड में बैठकर ध्‍यान लगाए एवं गणेश जी की कृपा की प्रार्थना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणराज गणराज मोरे अंगना पधारो आज भजन का महत्व क्या है?

यह भजन गणेश जी की कृपा और उनकी उपस्थिति की प्रार्थना करता है, जिससे सभी विघ्न दूर होते हैं এবং सफलताओं की संभावनाएं बढ़ती हैं।

इस भजन को कौन गाता है?

इस भजन को शाहनाज़ अख्तर ने गाया है, जो भक्तिभाव से भरा हुआ है और गणेश जी की आराधना के लिए आदर्श है।

भजन का सही समय क्या है इसे गायन करने का?

इस भजन का गायन प्रात:काल या संध्या समय में करना अधिक प्रभावी होता है, साथ ही भक्तों को दीया जलाकर या नैवेद्य अर्पित करके इसे करना चाहिए।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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