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Krishna Bhajan

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर भजन लिरिक्स (Gokul Nagari Me Rahta Hai Koi Jadugar Bhajan Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Kanhaiya Ji - Bhaktilok

73 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गोकुल में कन्हा का अनोखा जादू

गोकुल नगरी में बसी भक्ति और कन्हा के जादू को समर्पित इस भजन का गुणगान करें।

गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार कल मै गयी थी सखी बेचन दहिया मिला वही चोर मेरी रोक दिया रहिया करने लगा ओ तकरार मांगे दहिया तो उतार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार नरम कलाई मेरी ऐसे मरोड़ी मार चीख सखी मै तो पड़ी रो री ताकि मेरा हो श्रृंगार मै तू उससे हुयी लाचार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार मुखड़े पे भोलापन हाथ में बासुरिया कर गया जादू मो पे नन्द का सांवरिया करके बाते ओ हजार दहिया लेना ओ उतार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार गोरी ना जा जमुना पार गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर अपना दहिया तू उतार...

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान श्रीकृष्ण का वर्णन एक जादूगर के रूप में किया गया है, जो गोकुल नगरी में निवास करते हैं। भजन की मुख्य पंक्ति 'गोकुल नगरी में रहता है कोई जादूगर' इस भाव को दर्शाती है कि कृष्ण के बारे में रोमांचक, बांड दृष्टि और अनुपम लीलाएँ है, जो भक्तों के दिलों को छू लेती हैं। आगे, 'अपना दहिया तू उतार' की पंक्तियाँ व्यक्ति की स्नेह और प्रेम की भावना को व्यक्त करती हैं और इसे एक भक्तिभाव के साथ सम्पूर्ण करती हैं। यह वाक्यांश इस बात का भी प्रतीक है कि भक्त अपनी सरलता और निस्वार्थ प्रेम के साथ भगवान के सामने आ रहा है।

भजन की कविता में सखी का कृष्ण से संवाद दर्शाया गया है, जहाँ वह अपनी भावनाएँ और चिंताओं का उल्लेख करती है। 'कल मै गयी थी सखी बेचन दहिया' पंक्ति यह दर्शाती है कि भक्त भी जनजीवन की व्यस्तता में चिंतित और व्याकुल है। कृष्ण द्वारा आवाज़ सुनने और प्रेम के धागों में बंधने को प्रेरित करना भक्त की मनोदशा को दर्शाता है। 'नरम कलाई मेरी ऐसे मरोड़ी' से भक्त की भक्ति और भगवान के प्रति सहजता प्रकट होती है।

कृष्ण भक्ति मार्ग की यह अनुपम अभिव्यक्ति है। जहाँ भक्त भगवान की लीलाओं का मधुर मनोरंजन करते हुए अपना जीवन समर्पित कर रहा है। भक्ति का यह राह भगवान से संवाद, प्रेम और समर्पण का मार्ग प्रदान करता है। 'मुखड़े पे भोलापन' वाक्यांश जीवन के सरलता और प्राकृतिकता का चित्रण करता है। यह वास्तविकता में भक्त के लिए सच्ची भक्ति का मार्ग है, जो निस्वार्थता, करुणा, और प्यार का सन्देश फैलाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व अनूपम है, क्योंकि यह हमें श्रीकृष्ण की अद्भुत लीलाओं और उनके प्रति भक्त की भावना को दर्शाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों, विशेष रूप से भागवत पुराण में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन मिलता है, जहां गोकुल उनकी बाल्यावस्था का केंद्र है। इन लीलाओं में प्रेम, जादू और अद्भुतता का एक अनुपम समावेश है, जो इस भजन में पूर्णता के साथ व्यक्त किया गया है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। मानसिक तनाव कम होता है और भक्त को सकारात्मकता प्राप्त होती है। यह भजन हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार करता है, जो आध्यात्मिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: या संध्या के समय विशेष लाभकारी होता है। एक शांत स्थान का चयन करें, एक दीप जलाएँ और भगवान के चित्र के सामने बैठें। सबसे पहले मन की एकाग्रता बनाएं, और भजन की पंक्तियों का ध्यानपूर्वक जप करें। ध्यान और भक्ति से इस भजन का जप करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी-देवता को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है, जो गोकुल नगरी में निवास करते हैं और अपनी लीलाओं से भक्तों का मन मोह लेते हैं।

गोकुल नगरी का महत्व क्या है?

गोकुल नगरी भगवान श्रीकृष्ण की बाल्यावस्था से संबंधित भूमि है, जहाँ उनकी अनेकों लीलाएँ और जादू भरे किस्से हैं, जो भक्तों के लिए प्रेरणादायक हैं।

इस भजन का जप करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, प्रेम और भक्ति का अनुभव होता है, जो व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास और शक्ति को बढ़ाता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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