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Krishna Bhajan

हमने आंगन नही बहारा कैसे आयेंगे भगवान भजन लिरिक्स (Hum Ne Aangan Nahi Bahara kaise Aayenge Bhagwan Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Ravi Raj - Bhaktilok

81 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान का स्वागत: आंगन की तैयारी

इस भजन के मध्यम से हम अपने हृदय और मस्तिष्क को पवित्र करके भगवान का स्वागत करने के लिए प्रेरित होते हैं।

हमने आँगन नहीं बुहाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवानचंचल मन को नहीं संभालाकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।हर कोने कल्मष कषाय कीलगी हुई है ढेरीनहीं ज्ञान की किरण कहीं भीहर कोठरी अँधेरीआँगन चौबारा अँधियाराआँगन चौबारा अँधियाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।हृदय हमारा पिघल ना पायाजब देखा दुखियाराकिसी पन्थ भूले ने हमसेपाया नहीं सहारासूखी है करुणा की धारासूखी है करुणा की धाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।अन्तर के पट खोल देख लोईश्वर पास मिलेगाहर प्राणी में ही परमेश्वरका आभास मिलेगासच्चे मन से नहीं पुकारासच्चे मन से नहीं पुकाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।निर्मल मन हो तो रघुनायकशबरी के घर जातेश्याम सूर की बाँह पकड़तेसाग विदुर घर खातेइस पर हमने नहीं विचाराइस पर हमने नहीं विचाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।हमने आँगन नहीं बुहाराकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवानचंचल मन को नहीं संभालाकैसे आयेंगे भगवानकैसे आयेंगे भगवान।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की विशेषता है कि यह भक्त की अपने भीतर के आत्मा की खोज को प्रस्तुत करता है। 'हमने आँगन नहीं बुहाराकैसे आयेंगे भगवान' का अर्थ है कि जब तक हम अपने मन और हृदय को पवित्र नहीं करेंगे, तब तक भगवान हमारे जीवन में कैसे आ सकते हैं। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि आंतरिक शुद्धता अनिवार्य है। 'हर कोने कल्मष कषाय की लगि हुई है ढेर' से दर्शाया गया है कि हमारे जीवन में पाप और कल्मष बहुतायत में हैं, जिसे हमें दूर करना होगा। भगवान का साक्षात्कार तभी संभव है जब हम अपने पापों को त्याग कर अपने हृदय को शुद्ध करें। यही शुद्धि का मार्ग है, जो हमें ईश्वर की कृपा की प्राप्ति की ओर ले जाता है।

आध्यात्मिक जीवन में करुणा और प्रेम की आवश्यकता है, जो भजन में दर्शाए गए हैं। 'हृदय हमारा पिघल ना पाए जब देखा दुखियार' का अर्थ है कि हमें दूसरों के दुख को देखकर संवेदनशील होना चाहिए। 'सूखी है करुणा की धारा' यह इंगित करता है कि जब हम दूसरों के प्रति सहानुभूति नहीं रखेंगे, तब हमारा हृदय कठोर होता जाएगा। यह भजन हमें याद दिलाता है कि दूसरों के प्रति करुणा और प्रेम दिखाना आवश्यक है ताकि भगवान हमारे हृदय में अपनी कृपा बरसाए। अंत में, यह भजन हमें सच्चे मन से भगवान को पुकारने की सलाह देता है, जिससे हमें उनकी कृपा का अनुभव हो सके।

इस भजन में भक्ति मार्ग की महत्वपूर्ण शिक्षाएँ शामिल हैं, जो हमें भगवान की ओर अग्रसर करती हैं। 'अंतर के पट खोल देख लो, ईश्वर पास मिलेंगे' का अर्थ है कि भगवान हमारे भीतर ही हैं, इसलिए हमें अपने अंदर झाँकने की आवश्यकता है। यह विद्या हमें सिखाती है कि जब हम अपने अंतर्मन की खोज करेंगे, तब हम परमेश्वर के साक्षात्कार के निकट पहुँचेंगे। यह भजन भक्तों को एकत्रित होने और सामूहिक रूप से भक्ति में लीन होने की प्रेरणा देता है। यहाँ तक कि शबरी और विदुर जैसे महान भक्तों के उदाहरणों को पेश करके यह दिखाता है कि परमेश्वर की कृपा किसी विशेष स्थिति या स्थान पर निर्भर नहीं करती।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का उच्चतम आध्यात्मिक संदर्भ हमें उपनिषदों से मिलता है, जहाँ यह बताया गया है कि आंतरिक शुद्धता और आत्मज्ञान का महत्व है। भक्ति का मार्ग धर्म ग्रंथों की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें रामायण और भागवत पुराण में भी ईश्वर की कृपा के लिए भक्ति को आवश्यक माना गया है। भक्तों को प्रकट करते हुए भजन में यह कहा गया है कि करुणा, प्रेम और शुद्धता हमारे जीवन में प्रभु को आमंत्रित करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और आत्मिक शुद्धता प्राप्त होती है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने अंतर्मन में भगवान की उपस्थिति का अनुभव कर सकता है, जिससे उसकी भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि होती है। लगातार इस भजन का पाठ करने से जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का श्रवण प्रात सुबह या संध्या समय किया जा सकता है। पूजा के समय एक दीया जलाना, पुष्प अर्पित करना और स्वच्छता का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। ध्यान मुद्रा में बैठकर या भगवान की तस्वीर के सामने बैठकर सच्चे मन से भजन का उचारण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मूल संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान का साक्षात्कार तभी संभव है जब हम अपनी आत्मा और हृदय को पवित्र करें।

क्या इस भजन को गाने का कोई विशेष समय है?

इस भजन को प्रातः या संध्या समय गाने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान मिलता है।

भगवान के प्रति हमारी करुणा का क्या महत्व है?

भगवान के प्रति करुणा का महत्व है कि यह हमें समाज में प्रेम और सद्भावना फैलाने का मार्ग प्रशस्त करती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Aug 2026

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