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Krishna Bhajan

कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने लिरिक्स (Kaisa Chakkar Chalaya Re Shyam Teri Ungali Ne Lyrics in Hindi) - Anjali Jain krishna Bhajan - Bhaktilok

79 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम की लीला: उंगली से चक्र का वार

इस भजन के माध्यम से श्री कृष्ण की अद्भुत लीलाओं का स्मरण करें और भक्ति में लीन हो जाएं।

कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने उंगली ने तेरी उंगली ने तेरी कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने जब द्रोपदी दुष्टों ने घेरी कैसा चिर बढाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने जहर का प्याला राणाजी ने भेजा कैसा अमृत बनाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने जब प्रह्लाद पहाड़ से गिरा था कैसा कमल खिलाया रे श्याम तेरी ऊँगली ने कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने जब नरसी ने तुमको टेरा कैसा भात भराया रे श्याम तेरी ऊँगली ने कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने जब अर्जुन ने जैद्रात को मारा कैसा सूरज छिपाया रे श्याम तेरी उंगली ने||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त अपने आराध्य, श्री कृष्ण की महानता का गुणगान कर रहे हैं। "कैसा चक्र चलाया रे श्याम तेरी उंगली ने" की पंक्ति से भक्त यह बताना चाहते हैं कि श्री कृष्ण के एक इशारे से कितनी बड़ी से बड़ी समस्याएं हल हो जाती हैं। द्रोपदी की रक्षा का उल्लेख करते हुए, यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार दुष्टों के घेरे में आकर भी भगवान ने अपनी उंगली के इशारे से उसे सम्मानित किया। यह भजन हमें यह सिखाता है कि भगवान के सहारे, न तो कोई परिस्थिति बुरी होती है, न कोई संकट। भक्त आगे यह भी दर्शाते हैं कि कैसे राणाजी ने जहर का प्याला भेजा, लेकिन श्री कृष्ण ने उसे अमृत में बदल दिया। यह सब श्री कृष्ण की अद्भुत लीला का उदाहरण है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोन से देखें तो इस भजन में दृष्टांतों के माध्यम से भक्त कृतज्ञता प्रकट कर रहे हैं। जब अर्जुन ने जैद्रात का वध किया, तब श्री कृष्ण ने पहलुओं को बदलकर धर्म की रक्षा की। यहाँ भक्त श्री कृष्ण को याद करते हुए यह महसूस करते हैं कि जब भी हम भ्रमित होते हैं, तो भगवान हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। प्रह्लाद का बहादुर संपर्क और नरसी का कृष्ण से टेरा लेना भी इसी महानता का प्रतीक है। इन सब घटनाओं के माध्यम से भजन भावनाओं को व्यक्त करता है कि हमारे जीवन की हर समस्या का समाधान श्री कृष्ण के पास ही है।

इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति मार्ग का वर्णन स्पष्ट है। यह दर्शाता है कि किस प्रकार भक्त अपने आराध्य के प्रति भक्ति और प्रेम के साथ समर्पित हैं। यहाँ भगवान की लीलाओं का वर्णन करते हुए, यह भजन यह भी सिखाता है कि सच्चे प्रेम और विश्वास के साथ जब हम भगवान को पुकारते हैं, तब वे हमें अपनी कृपा से संरक्षण देते हैं। भगवान की उपस्थिति में हर संकट हल हो सकता है, यह विश्वास और संतोष उत्पन्न करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान श्री कृष्ण की लीलाएँ भारतीय पुराणों एवं विशेषकर महाभारत के साथ जुड़ी हुई हैं। इस भजन में द्रोपदी और अर्जुन का उदाहरण देते हुए, हमें उनके धार्मिक और नैतिक मूल्य का अनुभव होता है। द्रोपदी की लीला में श्री कृष्ण ने भक्तों का भक्ति भाव और विश्वास का प्रतीक बनकर उनकी रक्षा की। इसके अलावा, प्रह्लाद का उल्लेख भगवान विष्णु के परम भक्त के रूप में किया गया है, जो हमें यह सिखाता है कि भक्ति और अटल विश्वास से हम किसी भी संकट का सामना कर सकते हैं।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का सस्वर पाठ करने से मानसिक शांति, बौद्धिक विकास, और आध्यात्मिक उन्नति में सहायता मिलती है। यह भजन निराशा और तनाव को दूर कर, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से एकाग्रता में वृद्धि होती है तथा आत्मविश्वास में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप करने का सर्वोत्तम समय सुबह का होता है। प्रातः स्नान के बाद, एक शांत स्थान पर बैठें और एक दीया जलाएँ। भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर के समक्ष फल या मिठाई का भोग अर्पित करें। ध्यान लगाते हुए इस भजन का समर्पित भाव से जाप करें। ध्यान रखें कि मन में केवल श्री कृष्ण की कृपा की कल्पना हो।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भगवान श्री कृष्ण के किस रूप में इस भजन का सामर्थ्य है?

इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के अद्भुत लीला का वर्णन है, जहाँ वे भक्तों की संकटों में रक्षा करते हैं। उनकी उंगली के इशारे से कठिनाईयाँ दूर होने का संकेत है।

क्या इस भजन के माध्यम से केवल भक्ति का अनुभव होता है?

जी हाँ, यह भजन केवल भक्ति का ही विश्वास नहीं दिलाता, बल्कि यह मानसिक शांति और संकटों का समाधान भी प्रदान करता है।

क्या इस भजन का जाप प्रतिदिन करना जरूरी है?

प्रतिदिन इसका जाप करने से मन को शांति, एकाग्रता, और भगवान में विश्वास की भावना प्रबल होती है। यह अनुशासित जीवन के लिए लाभकारी है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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