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श्री कुबेर चालीसा (Kuber chalisa Lyrics in Hindi) - Shree Kuber Chalisa Satyendra Pathak - Bhaktilok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री कुबेर चालीसा (Kuber chalisa Lyrics in Hindi) - 


।। दोहा ।।


जैसे अटल हिमालय

और जैसे अडिग सुमेर

ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे

अविचल खडे कुबेर ।


विघ्न हरण मंगल करण

सुनो शरणागत की टेर

भक्त हेतु वितरण करो

धन माया के ढेर ।


।। चौपाई ।।


जै जै जै श्री कुबेर भंडारी

धन माया के तुम अधिकारी ।


तप तेज पुंज निर्भय भय हारी

पवन बेग सम तनु बलधारी ।


स्वर्ग द्वार की करे पहरे दारी

सेवक इन्द्र देव के आज्ञाकारी ।


यक्ष यक्षणी की है सेना भारी

सेनापती बने युद्ध में धनुधारी ।


महा योद्धा बन शस्त्र धारै

युद्ध करै शत्रु को मारै ।


सदा विजयी कभी ना हारै

भगत जनों के संकट टारै ।


प्रपितामह हैं स्वयं विधाता

पुलिस्त वंश के जन्म विख्याता ।


विश्रवा पिता इडविडा जी माता

विभिषण भगत आपके भ्राता ।


शिव चरणों में जब ध्यान लगाया

घोर तपस्या करी तन को सुखाया ।


शिव वरदान मिले देवत्य पाया

अमृत पान करी अमर हुई काया ।


धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में

देवी देवता सब फिरैं साथ में ।


पीताम्बर वस्त्र पहरे गात में

बल शक्ति पुरी यक्ष जात में ।


स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं

त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ।


शंख मृदंग नगारे बाजैं

गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ।


चौंसठ योगनी मंगल गावैं

रिद्धी सिद्धी नित भोग लगावैं ।


दास दासनी सिर छत्र फिरावैं

यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढुलावैं ।


ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं

देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ।


पुरुषों में जैसे भीम बली हैं

यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ।


भगतों में जैसे प्रल्हाद बड़े हैं

पक्षियो में जैसे गरुड बड़े हैं ।


नागों मे जैसे शेष बड़े हैं

वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ।


कांधे धनुष हाथ में भाला

गले फुलो की पहनी माला ।


स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला

दूर दूर तक होए उजाला ।


कुबेर देव को जो मन में धारे

सदा विजय हो कभी न हारे ।


बिगड़े काम बन जाए सारे

अन्न धन के रहे भरे भण्डारे ।


कुबेर गरीब को आप उभारैं

कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ।


कुबेर भगत के संकट टारैं

कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ।


शीघ्र धनी जो होना चाहे

क्युं नही यक्ष कुबेर मनाए ।


यह पाठ जो पढे पढाए

दिन दुगना व्यापार बढाए ।


भूत प्रेत को कुबेर भगावैं

अडे काम को कुबेर बनावैं ।


रोग शोक को कुबेर नशावैं

कलंक कोढ को कुबेर हटावैं ।


कुबेर चढे को और चढादे

कुबेर गिरे को पुनः उठा दे ।


कुबेर भाग्य को तुरन्त जगा दे

कुबेर भुले को राह बता दे ।


प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे

भुखे की भुख कुबेर मिटा दे ।


रोगी का रोग कुबेर घटा दे

दुखिया क दुख कुबेर छुटा दे ।


बांझ की गोद कुबेर भरा दे

कारोबार को कुबेर बढा दे ।


कारागार से कुबेर छुडा दे

चोर ठगों से कुबेर बचा दे ।


कोर्ट केस में कुबेर जितावैं

जो कुबेर को मन में ध्यावै ।


चुनाव में जीत कुबेर करावै

मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ।


पाठ करे जो नित मन लाई

उसकी कला हो सदा सवाई ।


जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई

उसका जीवन चले सुखदाई ।


जो कुबेर का पाठ करावै

उसका बेडा पार लगावै ।


उजडे घर को पुनः बसावै

शत्रु को भी मित्र बनावै ।


सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई

सब सुख भोद पदार्थ पाई ।


प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई

मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ।


।। दोहा ।।


शिव भक्तों में अग्रणी

श्री यक्षराज कुबेर

हृदय मे ज्ञान प्रकाश भर

कर दो दूर अंधेर ।


कर दो दूर अंधेर अब

जरा करो ना देर

शरण पडा हुं आपकी

दया की दृष्टि फेर ।


|| इति श्री कुबेर चालीसा ||


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री कुबेर चालीसा (Kuber chalisa Lyrics in Hindi) - Shree Kuber Chalisa Satyendra Pathak - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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