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लेके गौराजी को साथ भोले भाले भोलेनाथ भजन लिरिक्स (Leke Gauraji Ko Sath Bhole Bhale Bholenath Lyrics in Hindi) - by मोनिका अग्रवाल - Bhaktilok

89 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव शंकर की महिमा: प्रेम और भक्ति का भजन

इस भजन में भोलेनाथ और देवी गौरी की भक्ति की गहराई से भरी कथा प्रस्तुत की गई है।

लेके गौरा जी को साथ भोले भाले भोलेनाथ काशी नगरी से आया है शिव शंकर || नंदी पे सवार होके डमरू बजाते चले आ रहे है भोले हरी गुण गाते दाले नरमुंडो की माला ओढ़े तन पे मृग शाला काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| हाथ में त्रिशूल लिए भसम रमाये झोली गले में डाले गोकुल में आये पहुंचे नंदबाबा दे द्वार अलख जगाये बारम्बार काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| कहा है यशोदा तेरा कृष्णा कन्हिया दरश करादे रानी लू मैं बलैयास सुनकर नारायण अवतार आया हूँ में तेरे द्वार काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| देखके यशोदा बोली जाओ बाबा जाओ द्वार हमारे तुम ना डमरू बजाओ डर जावेगा मेरा लाल देख सर्प माला काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| हस के वो जोगी बोला सुनो महारानी दरश करादे मुझे होगी मेहरबानी दरश करादे इक बार कैसा है सुकुमार काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| सोया है कन्हिया मेरा मैं ना जगाऊं तेरी बातों में बाबा हरगिज़ ना आउं मेरा नन्हा सा गोपाल तू कोई जादू देगा डाल काशी नगरी से आया है शिव शंकर....|| इतने में आये मोहन मुरली बजाते ब्रह्मा इन्द्राणी जिसका पार ना पाते यहाँ गोकुल में ग्वाल घर घर नाच रहे गोपाल काशी नगरी से आया है शिव शंकर....||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में शिव जी के प्रेम और विस्तार का वर्णन है। विशेषकर, भगवान शिव के धरंभूमि 'काशी' की महिमा का उल्लेख किया गया है, जहाँ से शिव शंकर ने अपनी उपस्थिति से गोकुल की ओर प्रस्थान किया। यशोदा माता की चिंता और मातृत्व की भावना की भी झलक मिलती है, जब वे भगवान शिव से अपने पुत्र कृष्ण के दर्शन की प्रार्थना करती हैं। 'नंदी पे सवार होके डमरू बजाते' इस विशेष भाव से यह स्पष्ट होता है कि शिव जी का आगमन ही दैवीय ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रतीक है। पूरे गीत में शिव जी का नंद बाबा के द्वार पहुँचकर जगत को चारों ओर पुण्य फैलाने का संदेश है।

भावार्थ के अनुसार, यह भजन भक्तों को भक्ति और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। शिव शंकर के प्रति अद्वितीय प्रेम का वर्णन केवल एक धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। जब यशोदा हर संवाद में इस भक्ति को प्रस्तुत करती हैं, तब भक्तों को यह संदेश मिलता है कि सच्ची भक्ति हमेशा फलदायी होती है। 'सरप माला' जैसी अनेक प्रतीकात्मक छवियाँ इस भजन में शिव के अद्वितीय स्वरूप और इनके धारण करने की क्षमता को दर्शाती हैं। यह संकेत भी दिया गया है कि भक्ति में प्रेम और surrender का सीधा संबंध होता है।

इस भजन में भक्तिसाधना का एक अद्भुत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। प्रभु के प्रति समर्पण का मार्ग केवल भक्ति में नहीं, बल्कि भक्त के हृदय में भक्ति की गहराई है। शिव की भक्ति हमें सिखाती है कि संपूर्ण ब्रह्मांड में प्रेम का तत्व निहित है। 'काशी नगरी से आया है शिव शंकर' के माध्यम से हमें याद दिलाती है कि भगवान स्वयं हमारे बीच हैं, हमें केवल उन्हें पहचानने की जरूरत है। इस दृष्टांत से यह मंच तैयार होता है जहाँ भक्त अपने सम्पूर्ण अस्तित्व में शिव स्वरूप का अनुभव करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व न केवल इसके भावार्थ में है बल्कि यह काशी नगरी की धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर को उजागर करता है। काशी, जिसे शिव की नगरी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रमुख स्थान रखती है। अनेक पुराणों और ग्रंथों में काशी का उल्लेख मिलता है, जैसे कि 'काशीखंड' में, जहाँ शिव जी की उपासना का विशेष महत्व है। इस भजन के माध्यम से भक्तों को शिव की महिमा और उनकी कृपा को भक्ति के माध्यम से अनुभव करने का अवसर मिलता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, स्थिरता, और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, यह भक्ति भाव को जागृत करने और साकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक है। भक्तों का मन एकाग्रता और सकारात्मकता की ओर बढ़ता है, जिससे जीवन में खुशियाँ और सफलता का आगमन होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रात: काल या संध्या के समय किया जाना चाहिए। एक साफ, शांत जगह पर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें। एक दीपक जलाएं और तुलसी या अन्य फूलों का अर्पण करें। मन पूरी तरह से एकाग्र रखें और प्रेम भाव से भजन का जाप करें। यह विधि भक्ति और श्रद्धा को बढ़ाती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

लेके गौराजी को साथ भोले भाले भोलेनाथ का अर्थ क्या है?

यह भजन भगवान शिव की महिमा और उनकी दिव्यता को व्यक्त करता है, जो देवी गौरी के संग काशी से गोकुल की ओर यात्रा कर रहे हैं।

इस भजन का जप किस समय करना चाहिए?

इस भजन का जाप प्रात:काल या संध्या के समय किया जाना चाहिए, ताकि मन की शांति और ध्यान को सुविधाजनक बना सके।

भजन के सुनने से कौन सी लाभ प्राप्त होते हैं?

इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा, और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह भक्तों को सच्ची भक्ति की राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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