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श्री महालक्ष्मी स्तोत्रम् लिरिक्स (Mahalakshmi Stotram Lyrics in Hindi) - Vishnupuran Shubhangi Joshi - Bhaktilok

201 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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श्री महालक्ष्मी स्तोत्रम् लिरिक्स (Mahalakshmi Stotram  Lyrics in Hindi) - 


श्रीगणेशाय नमः 

श्रीपराशर उवाच 


सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः

देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः


इन्द्र उवाच

नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम्

श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्२


पद्मालयां पद्मकरां पद्मपत्रनिभेक्षणाम्

वन्दे पद्ममुखीं देवीं पद्मनाभप्रियाम्यहम्३


त्वं सिद्धिस्त्वं स्वधा स्वाहा सुधा त्वं लोकपावनी

सन्ध्या रात्रिः प्रभा भूतिर्मेधा श्रद्धा सरस्वती४


यज्ञविद्या महाविद्या गुह्यविद्या च शोभने

आत्मविद्या च देवि त्वं विमुक्तिफलदायिनी५


आन्वीक्षिकी त्रयीवार्ता दण्डनीतिस्त्वमेव च

सौम्यासौम्यैर्जगद्रूपैस्त्वयैतद्देवि पूरितम्६


का त्वन्या त्वमृते देवि सर्वयज्ञमयं वपुः

अध्यास्ते देवदेवस्य योगचिन्त्यं गदाभृतः७


त्वया देवि परित्यक्तं सकलं भुवनत्रयम्

विनष्टप्रायमभवत्त्वयेदानीं समेधितम्८


दाराः पुत्रास्तथाऽऽगारं सुहृद्धान्यधनादिकम्

भवत्येतन्महाभागे नित्यं त्वद्वीक्षणान्नृणाम्९


शरीरारोग्यमैश्वर्यमरिपक्षक्षयः सुखम्

देवि त्वद्दृष्टिदृष्टानां पुरुषाणां न दुर्लभम्१०


त्वमम्बा सर्वभूतानां देवदेवो हरिः पिता

त्वयैतद्विष्णुना चाम्ब जगद्व्याप्तं चराचरम्११


मनःकोशस्तथा गोष्ठं मा गृहं मा परिच्छदम्

मा शरीरं कलत्रं च त्यजेथाः सर्वपावनि१२


मा पुत्रान्मा सुहृद्वर्गान्मा पशून्मा विभूषणम्

त्यजेथा मम देवस्य विष्णोर्वक्षःस्थलाश्रये१३


सत्त्वेन सत्यशौचाभ्यां तथा शीलादिभिर्गुणैः

त्यज्यन्ते ते नराः सद्यः सन्त्यक्ता ये त्वयाऽमले१४


त्वयाऽवलोकिताः सद्यः शीलाद्यैरखिलैर्गुणैः

कुलैश्वर्यैश्च पूज्यन्ते पुरुषा निर्गुणा अपि१५


सश्लाघ्यः सगुणी धन्यः स कुलीनः स बुद्धिमान्

स शूरः सचविक्रान्तो यस्त्वया देवि वीक्षितः१६


सद्योवैगुण्यमायान्ति शीलाद्याः सकला गुणाः

पराङ्गमुखी जगद्धात्री यस्य त्वं विष्णुवल्लभे१७


न ते वर्णयितुं शक्तागुणाञ्जिह्वाऽपि वेधसः

प्रसीद देवि पद्माक्षि माऽस्मांस्त्याक्षीः कदाचन१८


श्रीपराशर उवाच

एवं श्रीः संस्तुता सम्यक् प्राह हृष्टा शतक्रतुम्

शृण्वतां सर्वदेवानां सर्वभूतस्थिता द्विज१९


श्रीरुवाच

परितुष्टास्मि देवेश स्तोत्रेणानेन ते हरेः

वरं वृणीष्व यस्त्विष्टो वरदाऽहं तवागता२०


इन्द्र उवाच

वरदा यदिमेदेवि वरार्हो यदिवाऽप्यहम्

त्रैलोक्यं न त्वया त्याज्यमेष मेऽस्तु वरः परः२१


स्तोत्रेण यस्तवैतेन त्वां स्तोष्यत्यब्धिसम्भवे

स त्वया न परित्याज्यो द्वितीयोऽस्तुवरो मम२२


श्रीरुवाच

त्रैलोक्यं त्रिदशश्रेष्ठ न सन्त्यक्ष्यामि वासव

दत्तो वरो मयाऽयं ते स्तोत्राराधनतुष्ट्या२३


यश्च सायं तथा प्रातः स्तोत्रेणानेन मानवः

स्तोष्यते चेन्न तस्याहं भविष्यामि पराङ्गमुखी२४


श्रीपाराशर उवाच

एवं वरं ददौ देवी देवराजाय वै पुरा

मैत्रेय श्रीर्महाभागा स्तोत्राराधनतोषिता२५


भृगोः ख्यात्यां समुत्पन्ना श्रीः पूर्वमुदधेः पुनः

देवदानवयत्नेन प्रसूताऽमृतमन्थने२६


एवं यदा जगत्स्वामी देवराजो जनार्दनः

अवतारः करोत्येषा तदा श्रीस्तत्सहायिनी२७


पुनश्चपद्मा सम्भूता यदाऽदित्योऽभवद्धरिः

यदा च भार्गवो रामस्तदाभूद्धरणीत्वियम्२८


राघवत्वेऽभवत्सीता रुक्मिणी कृष्णजन्मनि

अन्येषु चावतारेषु विष्णोरेखाऽनपायिनी२९


देवत्वे देवदेहेयं मानुषत्वे च मानुषी

विष्णोर्देहानुरुपां वै करोत्येषाऽऽत्मनस्तनुम्३०


यश्चैतशृणुयाज्जन्म लक्ष्म्या यश्च पठेन्नरः

श्रियो न विच्युतिस्तस्य गृहे यावत्कुलत्रयम्३१


पठ्यते येषु चैवर्षे गृहेषु श्रीस्तवं मुने

अलक्ष्मीः कलहाधारा न तेष्वास्ते कदाचन३२


एतत्ते कथितं ब्रह्मन्यन्मां त्वं परिपृच्छसि

क्षीराब्धौ श्रीर्यथा जाता पूर्वं भृगुसुता सती३३


इति सकलविभूत्यवाप्तिहेतुः स्तुतिरियमिन्द्रमुखोद्गता हि लक्ष्म्याः

अनुदिनमिह पठ्यते नृभिर्यैर्वसति न तेषु कदाचिदप्यलक्ष्मीः३४


इति श्रीविष्णुपुराणे महालक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम्


🙏 भजन का विस्तृत अर्थ और भावार्थ (Lyrics Meaning)

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री महालक्ष्मी स्तोत्रम् लिरिक्स (Mahalakshmi Stotram Lyrics in Hindi) - Vishnupuran Shubhangi Joshi - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ (Significance)

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि (Chanting Rules)

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 12 Aug 2026

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