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श्री मंगल चंडिका स्तोत्रम् लिरिक्स (Mangal Chandika Stotram Lyrics in Sanskrit) - “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मङ्गलचण्डिके Mangal Stotram - Bhaktilok

106 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री मंगल चंडिका: संकट निवारण और सुख की प्राप्ति

इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्त को सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति और मंगलमय जीवन की प्राप्ति होती है।

श्री मंगल चंडिका स्तोत्रम् लिरिक्स (Mangal Chandika Stotram Lyrics in Sanskrit) -  ।। श्री मंगलचंडिकास्तोत्रम् ।। || ध्यान ||“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मङ्गलचण्डिके  ऐं क्रूं फट् स्वाहेत्येवं चाप्येकविन्शाक्षरो मनुः    पूज्यः कल्पतरुश्चैव भक्तानां सर्वकामदः  दशलक्षजपेनैव मन्त्रसिद्धिर्भवेन्नृणाम्   मन्त्रसिद्धिर्भवेद् यस्य स विष्णुः सर्वकामदः  ध्यानं च श्रूयतां ब्रह्मन् वेदोक्तं सर्व सम्मतम्    देवीं षोडशवर्षीयां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम्   सर्वरूपगुणाढ्यां च कोमलाङ्गीं मनोहराम्    श्वेतचम्पकवर्णाभां चन्द्रकोटिसमप्रभाम्  वन्हिशुद्धांशुकाधानां रत्नभूषणभूषिताम्    बिभ्रतीं कबरीभारं मल्लिकामाल्यभूषितम्  बिम्बोष्टिं सुदतीं शुद्धां शरत्पद्मनिभाननाम्    ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां सुनीलोल्पललोचनाम्   जगद्धात्रीं च दात्रीं च सर्वेभ्यः सर्वसंपदाम्     संसारसागरे घोरे पोतरुपां वरां भजे   देव्याश्च ध्यानमित्येवं स्तवनं श्रूयतां मुने  प्रयतः संकटग्रस्तो येन तुष्टाव शंकरः   || शंकर उवाच ||  रक्ष रक्ष जगन्मातर्देवि मङ्गलचण्डिके  हारिके विपदां राशेर्हर्षमङ्गलकारिके   हर्षमङ्गलदक्षे च हर्षमङ्गलचण्डिके   शुभे मङ्गलदक्षे च शुभमङ्गलचण्डिके  मङ्गले मङ्गलार्हे च सर्व मङ्गलमङ्गले   सतां मन्गलदे देवि सर्वेषां मन्गलालये   पूज्या मङ्गलवारे च मङ्गलाभीष्टदैवते   पूज्ये मङ्गलभूपस्य मनुवंशस्य संततम्   मङ्गलाधिष्टातृदेवि मङ्गलानां च मङ्गले   संसार मङ्गलाधारे मोक्षमङ्गलदायिनि   सारे च मङ्गलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्   प्रतिमङ्गलवारे च पूज्ये च मङ्गलप्रदे   स्तोत्रेणानेन शम्भुश्च स्तुत्वा मङ्गलचण्डिकाम्  प्रतिमङ्गलवारे च पूजां कृत्वा गतः शिवः   देव्याश्च मङ्गलस्तोत्रं यः श्रुणोति समाहितः   तन्मङ्गलं भवेच्छश्वन्न भवेत् तदमङ्गलम्   इति श्री ब्रह्मवैवर्ते श्री मंगल चंडिका स्तोत्रम् संपूर्णम्

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री मंगल चंडिका स्तोत्रम् एक दिव्य प्रार्थना है जो देवी मङ्गलचण्डिका को समर्पित है। इस स्तोत्र में भक्तों ने देवी के शुद्ध स्वरूप को मान्यता दी है और उन्हें सभी प्रकार के शुभों की दात्री माना जाता है। 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवी मङ्गलचण्डिके' इस प्रमुख मंत्र के माध्यम से भक्त देवी की नौ शक्तियों को याद करते हैं जो सब कुछ देने वाली हैं। स्तोत्र में यह बताया गया है कि देवी की आराधना मंत्र जप से विशेष फलदायी होती है, जहाँ दस लाख जप से भक्त को सिद्धि प्राप्त होती है। देवी का रूप और गुणों का उल्लेख करते समय उन्हें 'श्वेतचम्पकवर्णाभां' और 'चन्द्रकोटिसमप्रभाम्' कहा गया है, जो उनकी दिव्यता और आकर्षकता को दर्शाते हैं।

स्तोत्र के भावार्थ में यह प्रकट होता है कि मङ्गल चंडिका देवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि समस्त संसार की धात्री हैं, जो भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का अनुभव कराने में सक्षम हैं। यह वाक्य 'संसारसागरे घोरे पोतरुपां वरां भजे' यह इंगित करता है कि देवी किसी भी कठिनाई में आश्रय देती हैं। देवी की विशेषता हैं कि वे भक्तों के सभी संकटों को दूर कर देती हैं और शांति और सुख प्रदान करती हैं। उनके प्रति भक्ति और समर्पण रखने से भक्त को जीवन में मंगलमय फल प्राप्त होते हैं। 'सर्वसंपदाम' का अर्थ है कि देवी बिना किसी भेदभाव के सम्पूर्ण दुनिया की सृष्टि में समाहित हैं।

इस स्तोत्र में भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का विशेष उल्लेख किया गया है, जो भक्तों को उनके दुःख और संकटों से निकालने में सहायक है। भक्त अपनी समर्पण की भावनाओं के माध्यम से देवी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। 'मन्त्रसिद्धिर्भवेद्' का आशय है कि जो व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे मंत्र सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं। यह मंत्र सिद्धि उसके जीवन को सफल बनाती हैं। इस प्रकार, यह स्तोत्र केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिकता की प्रेरणा देने वाला एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री मंगल चंडिका स्तोत्र का उल्लेख कई पुराणों और ग्रंथों में मिलता है, जिसमें इसकी महत्वता और प्रभाव का स्पष्ट जिक्र है। 'ब्रह्मवैवर्त पुराण' में देवी मङ्गलचण्डिका की महिमा का वर्णन किया गया है, जहाँ उन्हें संकटों से बचाने वाली, आशरीष्‍ठ देवी बताया गया है। देवी का यह स्तोत्र भक्तों में साहस और विश्वास को जगाता है। यह भक्तों को संपूर्ण जीवन के सभी अडचनों को पार करने के लिए प्रेरित करता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि भक्ति के मार्ग में अडिग रहने की प्रेरणा भी देता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। श्री मंगल चंडिका स्तोत्र का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्म-संतोष और सफल जीवन की ओर अग्रसर करता है। यह भक्तों को सभी प्रकार की मानसिक और शारीरिक परेशानियों से दूर रखता है। इसके जाप से मन में भक्ति भाव जागृत होता है, और भक्त अपने कष्टों में भी निर्भीक रहते हैं। स्तोत्र का पाठ स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्रदान करता है और जीवन में मंगलकारी परिणाम लाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री मंगल चंडिका स्तोत्र का जाप सुबह-सवेरे विशेष रूप से लाभदायक होता है। इस समय वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है। पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान पर आसन बिछाएं, और देवी को लाल फूल, मिष्ठान और धूप अर्पित करें। ध्यान और मन की एकाग्रता से स्तोत्र का जाप करें। इसका जाप करते समय देवी की कृपा और आशीर्वाद की कामना करें, जिससे जीवन में समस्त सुख की प्राप्‍ति हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ कैसे करें?

यह स्तोत्र सुबह या शाम के समय एकांत में, देवी को समर्पित जगह पर पूर्ण श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

क्या इस स्तोत्र के पाठ से कोई विशेष लाभ मिलता है?

हाँ, इस स्तोत्र का नियमित पाठ मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति और सुख-समृद्धि में सहायक होता है।

इस स्तोत्र का संबंध किस पुराण से है?

यह स्तोत्र ब्रह्मवैवर्त पुराण में देवी मङ्गलचण्डिका की महिमा का उल्लेख करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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