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नाम रामायण शुद्धब्रह्मपरात्पर राम् (Naam Ramayan Lyrics in Hindi) - by M.S. Subbulakshmi - Bhaktilok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

नाम रामायण शुद्धब्रह्मपरात्पर राम् (Naam Ramayan Lyrics in Hindi) - 

 

॥ बालकाण्डः ॥


शुद्धब्रह्मपरात्पर राम् ॥१॥

कालात्मकपरमेश्वर राम् ॥२॥

शेषतल्पसुखनिद्रित राम् ॥३॥

ब्रह्माद्यामरप्रार्थित राम् ॥४॥

चण्डकिरणकुलमण्डन राम् ॥५॥

श्रीमद्दशरथनन्दन राम् ॥६॥

कौसल्यासुखवर्धन राम् ॥७॥

विश्वामित्रप्रियधन राम् ॥८॥

घोरताटकाघातक राम् ॥९॥

मारीचादिनिपातक राम् ॥१०॥

कौशिकमखसंरक्षक राम् ॥११॥

श्रीमदहल्योद्धारक राम् ॥१२॥

गौतममुनिसम्पूजित राम् ॥१३॥

सुरमुनिवरगणसंस्तुत राम् ॥१४॥

नाविकधावितमृदुपद राम् ॥१५॥

मिथिलापुरजनमोहक राम् ॥१६॥

विदेहमानसरञ्जक राम् ॥१७॥

त्र्यम्बककार्मुकभञ्जक राम् ॥१८॥

सीतार्पितवरमालिक राम् ॥१९॥

कृतवैवाहिककौतुक राम् ॥२०॥

भार्गवदर्पविनाशक राम् ॥२१॥

श्रीमदयोध्यापालक राम् ॥२२॥

राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ अयोध्याकाण्डः ॥


अगणितगुणगणभूषित राम् ॥२३॥

अवनीतनयाकामित राम् ॥२४॥

राकाचन्द्रसमानन राम् ॥२५॥

पितृवाक्याश्रितकानन राम् ॥२६॥

प्रियगुहविनिवेदितपद राम् ॥२७॥

तत्क्षालितनिजमृदुपद राम् ॥२८॥

भरद्वाजमुखानन्दक राम् ॥२९॥

चित्रकूटाद्रिनिकेतन राम् ॥३०॥

दशरथसन्ततचिन्तित राम् ॥३१॥

कैकेयीतनयार्थित राम् ॥३२॥

विरचितनिजपितृकर्मक राम् ॥३३॥

भरतार्पितनिजपादुक राम् ॥३४॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ अरण्यकाण्डः ॥


दण्डकवनजनपावन राम् ॥३५॥

दुष्टविराधविनाशन राम् ॥३६॥

शरभङ्गसुतीक्ष्णार्चित राम् ॥३७॥

अगस्त्यानुग्रहवर्धित राम् ॥३८॥

गृध्राधिपसंसेवित राम् ॥३९॥

पञ्चवटीतटसुस्थित राम् ॥४०॥

शूर्पणखार्तिविधायक राम् ॥४१॥

खरदूषणमुखसूदक राम् ॥४२॥

सीताप्रियहरिणानुग राम् ॥४३॥

मारीचार्तिकृदाशुग राम् ॥४४॥

विनष्टसीतान्वेषक राम् ॥४५॥

गृध्राधिपगतिदायक राम् ॥४६॥

शबरीदत्तफलाशन राम् ॥४७॥

कबन्धबाहुच्छेदक राम् ॥४८॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ किष्किन्धाकाण्डः ॥


हनुमत्सेवितनिजपद राम् ॥४९॥

नतसुग्रीवाभीष्टद राम् ॥५०॥

गर्वितवालिसंहारक राम् ॥५१॥

वानरदूतप्रेषक राम् ॥५२॥

हितकरलक्ष्मणसंयुत राम् ॥५३॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ सुन्दरकाण्डः ॥


कपिवरसन्ततसंस्मृत राम् ॥५४॥

तद्‍गतिविघ्नध्वंसक राम् ॥५५॥

सीताप्राणाधारक राम् ॥५६॥

दुष्टदशाननदूषित राम् ॥५७॥

शिष्टहनूमद्‍भूषित राम् ॥५८॥

सीतावेदितकाकावन राम् ॥५९॥

कृतचूडामणिदर्शन राम् ॥६०॥

कपिवरवचनाश्वासित राम् ॥६१॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ युद्धकाण्डः ॥


रावणनिधनप्रस्थित राम् ॥६२॥

वानरसैन्यसमावृत राम् ॥६३॥

शोषितसरिदीशार्थित राम् ॥६४॥

विभीषणाभयदायक राम् ॥६५॥

पर्वतसेतुनिबन्धक राम् ॥६६॥

कुम्भकर्णशिरच्छेदक राम् ॥६७॥

राक्षससङ्घविमर्दक राम् ॥६८॥

अहिमहिरावणचारण राम् ॥६९॥

संहृतदशमुखरावण राम् ॥७०॥

विधिभवमुखसुरसंस्तुत राम् ॥७१॥

खस्थितदशरथवीक्षित राम् ॥७२॥

सीतादर्शनमोदित राम् ॥७३॥

अभिषिक्तविभीषणनत राम् ॥७४॥

पुष्पकयानारोहण राम् ॥७५॥

भरद्वाजादिनिषेवण राम् ॥७६॥

भरतप्राणप्रियकर राम् ॥७७॥

साकेतपुरीभूषण राम् ॥७८॥

सकलस्वीयसमानत राम् ॥७९॥

रत्नलसत्पीठास्थित राम् ॥८०॥

पट्टाभिषेकालङ्कृत राम् ॥८१॥

पार्थिवकुलसम्मानित राम् ॥८२॥

विभीषणार्पितरङ्गक राम् ॥८३॥

कीशकुलानुग्रहकर राम् ॥८४॥

सकलजीवसंरक्षक राम् ॥८५॥

समस्तलोकाधारक राम् ॥८६॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ उत्तरकाण्डः ॥


आगतमुनिगणसंस्तुत राम् ॥८७॥

विश्रुतदशकण्ठोद्भव राम् ॥८८॥

सीतालिङ्गननिर्वृत राम् ॥८९॥

नीतिसुरक्षितजनपद राम् ॥९०॥

विपिनत्याजितजनकज राम् ॥९१॥

कारितलवणासुरवध राम् ॥९२॥

स्वर्गतशम्बुकसंस्तुत राम् ॥९३॥

स्वतनयकुशलवनन्दित राम् ॥९४॥

अश्वमेधक्रतुदीक्षित राम् ॥९५॥

कालावेदितसुरपद राम् ॥९६॥

आयोध्यकजनमुक्तिद राम् ॥९७॥

विधिमुखविबुधानन्दक राम् ॥९८॥

तेजोमयनिजरूपक राम् ॥९९॥

संसृतिबन्धविमोचक राम् ॥१००॥

धर्मस्थापनतत्पर राम् ॥१०१॥

भक्तिपरायणमुक्तिद राम् ॥१०२॥

सर्वचराचरपालक राम् ॥१०३॥

सर्वभवामयवारक राम् ॥१०४॥

वैकुण्ठालयसंस्थित राम् ॥१०५॥

नित्यानन्दपदस्थित राम् ॥१०६॥


राम् राम् जय राजा राम् ॥१०७॥

राम् राम् जय सीता राम् ॥१०८॥


राम् राम् जय राजा राम्।

राम् राम् जय सीता राम् ॥


॥ इति नाम रामायण सम्पूर्णम् ॥

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "नाम रामायण शुद्धब्रह्मपरात्पर राम् (Naam Ramayan Lyrics in Hindi) - by M.S. Subbulakshmi - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Aug 2026

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