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Punjabi Devi Bhajan

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले भजन लिरिक्स (Nar chet gumani maaya na sath chale Lyrics in Hindi) - Kabir Bhajan Prakash Gandhi - Bhaktilok

68 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कबीर का संदेश: माया से परे सामान्य जीवन

बोध एवं चेतना का यह भजन आत्मा को जागृत कर माया के प्रभाव से मुक्त करने का प्रेरणादायक साधन है।

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले माया ना साथ चले नर चेत गुमानी माया ना साथ चले दस से सोला गए खेल में बीस गए तेरे मन के मैल में चालीस गए तेरे नारी के फेर में पचपन हाथ मले नर चेत गुमानी माया ना साथ चले अब तो जाग पड़ा क्यों सोवे सोने से तेरा काम ना होवे हर मन की तू कब तक ढोवै टाले ना ही टले नर चेत गुमानी माया ना साथ चले भजन करे तो हर सुख पावे धन दौलत तेरे काम ना आवे काया भी तेरे साथ ना जावे अग्नि बीच जले नर चेत गुमानी माया ना साथ चले सुमिरन ध्यान लगा ले प्राणी होवें ना तेरी कुछ भी हानि कहत कबीर सुनो अज्ञानी कर ले कर्म तू भले नर चेत गुमानी माया ना साथ चले ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश मानवता को यह समझाना है कि हमारे संसार की माया, अहंकार और भौतिक सुख, अस्थायी हैं। विशेष रूप से, 'नर चेत गुमानी माया ना साथ चले' का अर्थ है कि हमारा अहंकार और इच्छाएँ जब तक माया में लिपटी रहेंगी, तब तक वे हमारा साथ नहीं छोड़ेंगी। इसके आगे, 'दस से सोला गए खेल में' जैसे पंक्तियाँ जीवन के छिपे खेल और संघर्षों का परिचय कराती हैं। कबीर का स्पष्ट संदेश है कि सांसारिक सुख और सांसारिकता में लिप्त रहकर आत्मा का सच्चा सुख हासिल नहीं किया जा सकता। मन के मैल और नारी के फेर में फंसकर, मनुष्य अपने मूलत्व को भूल जाता है।

भावार्थ की बात करें तो यह भजन केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा भी है। कबीर ने इस भजन में प्रगति के अर्थ को भी बताया है। 'अब तो जाग पड़ा क्यों सोवे' पंक्ति हमें यह बोध देती है कि आत्मा की जागरूकता आवश्यक है। सोने से केवल देह का आराम होता है, लेकिन आत्मा को जागृत करने का कार्य केवल तत्क्षण ध्यान से ही हो सकता है। 'भजन करे तो हर सुख पावे' हमें भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है, जहाँ हम ध्यान और प्रार्थना द्वारा अपने कष्टों को कम कर सकते हैं। यह भजन हमें अपने भीतर झांकने और वास्तविकता का सामना करने के लिए मजबूर करता है।

इस भजन के थियोलॉजिकल दृष्टिकोण से, यह ध्यान और सुमिरन की महत्ता को पहचानता है। माया केवल भौतिकता नहीं, बल्कि वह भावनात्मक और मानसिक अशांति भी है। कबीर ने भक्ति मार्ग के माध्यम से आत्मा के शुद्धिकरण का मार्ग बताया है। 'कहत कबीर सुनो अज्ञानी' का अर्थ है कि व्यक्ति को अपनी अज्ञानता को दूर करके संवेदनशीलता और ज्ञान के मार्ग पर चलना चाहिए। यह भजन हमें बताता है कि भक्ति केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक आवश्यक प्रक्रिया है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

कबीर दास का यह भजन हमारे जीवन में माया के स्थान को समझाता है। यह भजन हमें उपदेश देता है कि धन-दौलत और भौतिक सुख के प्रति अपनी आसक्ति को छोड़ दें क्योंकि ये सब अस्थायी हैं। जो निरंतर ज्ञान की ओर बढ़ते हैं, वे आत्मा के संपूर्णत्व को प्राप्त करते हैं। हमारे शास्त्रों में, सर्वश्रेष्ठ संतों का उद्देश्य आत्मा को जागरूक करना और मानवता को माया के भ्रम से मुक्त करना रहा है, जैसा कि उपनिषदों में भी उल्लेख किया गया है। बाज़ार के माध्यम से सम्पत्ति को जोड़ा गया है, लेकिन आत्मा की शांति तभी संभव है जब हम भक्ति मार्ग का अनुसरण करें।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक तनाव और अशांति को कम किया जा सकता है। यह आत्मिक शांति, संतोष और धार्मिकता का अनुभव प्रदान करता है। व्यक्ति को सच्ची भक्ति की राह पर चलने के लिए प्रेरित करके कर्मफल से मुक्त करता है। नियमित जाप से ध्यान की स्थिति में स्थिरता आती है, साथ ही स्वास्थ्य में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय सूर्योदय से पहले करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तों को एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। दीया जलाना और फूलों का अर्पण करना उत्तम रहता है। ध्यान लगाते समय मन को पूरी तरह एकाग्र करके भजन का पाठ करते समय भक्ति और प्रेम का अनुभव करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का संदेश है कि माया केवल अस्थायी है और अहंकार से बचना चाहिए। आत्मा की सच्चाई को पहचानना आवश्यक है।

कबीर के इस भजन की महत्ता क्या है?

कबीर का यह भजन आत्मा की जागरूकता और माया से मुक्ति की राह दिखाता है, जिससे भक्त स्थायी संतोष और शांति प्राप्त कर सकते हैं।

इस भजन का पाठ करने का सही समय कब है?

इस भजन का जाप सुबह के समय करना सर्वोत्तम है, जब मन शांत और ताज़ा होता है, जिससे ध्यान की गहराई बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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