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श्री शीतलाष्टकम् लिरिक्स (Shitala Ashtakam Lyrics in Hindi) - Shitalashtakam - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री शीतलाष्टकम् लिरिक्स (Shitala Ashtakam Lyrics in Hindi) -  


|| ईश्वर उवाच ||


वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बरां ।

मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालङ्कृतमस्तकाम् ॥ १ ॥


वन्देऽहं शीतलां देवीं सर्वरोगभयापहां ।

यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटकभयं महत् ॥ २ ॥



शीतले शीतले चेति यो ब्रूयाद्दाहपीडितः ।

विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति ॥ ३ ॥


यस्त्वामुदकमध्ये तु ध्यात्वा सम्पूजयेन्नरः ।

विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते ॥ ४ ॥


शीतले ज्वरदग्धस्य पूतिगन्धयुतस्य च ।

प्रनष्टचक्षुषः पुंसः त्वामाहुर्जीवनौषधम् ॥ ५ ॥


शीतले तनुजान्रोगान् नृणां हरसि दुस्त्यजान् ।

विस्फोटकविदीर्णानां त्वमेकाऽमृतवर्षिणी ॥ ६ ॥


गलगण्डग्रहा रोगा ये चान्ये दारुणा नृणां ।

त्वदनुध्यानमात्रेण शीतले यान्ति सङ्क्षयम् ॥ ७ ॥


न मन्त्रो नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते ।

त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम् ॥ ८ ॥


मृणालतन्तुसदृशीं नाभिहृन्मध्यसंस्थितां ।

यस्त्वां सञ्चिन्तयेद्देवि तस्य मृत्युर्न जायते ॥ ९ ॥


अष्टकं शीतलादेव्या यो नरः प्रपठेत्सदा ।

विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते ॥ १० ॥


श्रोतव्यं पठितव्यं च श्रद्धाभक्तिसमन्वितैः ।

उपसर्गविनाशाय परं स्वस्त्ययनं महत् ॥ ११ ॥


शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता ।

शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः ॥ १२ ॥


रासभो गर्दभश्चैव खरो वैशाखनन्दनः ।

शीतलावाहनश्चैव दूर्वाकन्दनिकृन्तनः ॥ १३ ॥


एतानि खरनामानि शीतलाग्रे तु यः पठेत् ।

तस्य गेहे शिशूनां च शीतला रुङ्न जायते ॥ १४ ॥


शीतलाष्टकमेवेदं न देयं यस्यकस्यचित् ।

दातव्यं च सदा तस्मै श्रद्धाभक्तियुताय वै ॥ १५ ॥


|| इति श्रीस्कान्दपुराणे शीतलाष्टकम् ॥


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "श्री शीतलाष्टकम् लिरिक्स (Shitala Ashtakam Lyrics in Hindi) - Shitalashtakam - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 13 Aug 2026

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