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श्री भैरव चालीसा लिरिक्स (Shree Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi) - Pram Prakesh Dubey Bhairav Chalisa - Bhaktilok

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री भैरव चालीसा लिरिक्स (Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi) -  


॥ दोहा ॥


श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ ।

चालीसा वन्दन करों श्री शिव भैरवनाथ ॥

श्री भैरव संकट हरण मंगल करण कृपाल ।

श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥


|| चौपाई ||


जय जय श्री काली के लाला ।

जयति जयति काशी-कुतवाला ॥


जयति बटुक भैरव जय हारी ।

जयति काल भैरव बलकारी ॥


जयति सर्व भैरव विख्याता ।

जयति नाथ भैरव सुखदाता ॥


भैरव रुप कियो शिव धारण ।

भव के भार उतारण कारण ॥


भैरव रव सुन है भय दूरी ।

सब विधि होय कामना पूरी ॥


शेष महेश आदि गुण गायो ।

काशी-कोतवाल कहलायो ॥


जटाजूट सिर चन्द्र विराजत ।

बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥


कटि करधनी घुंघरु बाजत ।

दर्शन करत सकल भय भाजत ॥


जीवन दान दास को दीन्हो ।

कीन्हो कृपा नाथ तब चीन्हो ॥


वसि रसना बनि सारद-काली ।

दीन्यो वर राख्यो मम लाली ॥


धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।

जय मनरंजन खल दल भंजन ॥


कर त्रिशूल डमरु शुचि कोड़ा ।

कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा ॥


जो भैरव निर्भय गुण गावत ।

अष्टसिद्घि नवनिधि फल पावत ॥


रुप विशाल कठिन दुख मोचन ।

क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥


अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।

बं बं बं शिव बं बं बोतल ॥


रुद्रकाय काली के लाला ।

महा कालहू के हो काला ॥


बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।

श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥


करत तीनहू रुप प्रकाशा ।

भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥


त्न जड़ित कंचन सिंहासन ।

व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥


तुमहि जाई काशिहिं जन ध्यावहिं ।

विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥


जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।

जय उन्नत हर उमानन्द जय ॥


भीम त्रिलोकन स्वान साथ जय ।

बैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥


महाभीम भीषण शरीर जय ।

रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय ॥


अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।

श्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय ॥


निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय ।

गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥


त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय ।

क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥


श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।

कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥


रुद्र बटुक क्रोधेश काल धर ।

चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥


करि मद पान शम्भु गुणगावत ।

चौंसठ योगिन संग नचावत ।


करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।

काशी कोतवाल अड़बंगा ॥


देयं काल भैरव जब सोटा ।

नसै पाप मोटा से मोटा ॥


जाकर निर्मल होय शरीरा।

मिटै सकल संकट भव पीरा ॥


श्री भैरव भूतों के राजा ।

बाधा हरत करत शुभ काजा ॥


ऐलादी के दुःख निवारयो ।

सदा कृपा करि काज सम्हारयो ॥


सुन्दरदास सहित अनुरागा ।

श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥


श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।

सकल कामना पूरण देख्यो ॥


॥ दोहा ॥


जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।

कृपा दास पर कीजिये शंकर के अवतार ॥

जो यह चालीसा पढ़े प्रेम सहित सत बार ।

उस घर सर्वानन्द हों वैभव बड़े अपार ॥

जय श्री भैरवाय नमः !!


।। इति श्री भैरव चालीसा समाप्त ।।


प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री भैरव चालीसा लिरिक्स (Shree Bhairav Chalisa Lyrics in Hindi) - Pram Prakesh Dubey Bhairav Chalisa - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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