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Radha Kriya Kataksh Stotram

श्री गणेश संकटनाशन स्तोत्र (Shri Ganesh Sankatnashan Stotram Lyrics in Sanskrit) - Sankat Nashan Stotra Vidhi Sharma - Bhaktilok

106 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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संकट नाशक गणेश स्तोत्र: विघ्नों का नाशक

गणेश जी की उपासना से संकटों से मुक्ति एवं सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् । भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ॥१ प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् । तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥२ ॥लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च । सप्तमं विघ्नराजम् च धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥३ नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् । एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥४ द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः । न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभुः ॥५ विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥६ जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत्। संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥७ अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत। तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥८ ॐ गं गणपतये नमः ॥ श्री सिद्धिविनायक नमो नमः ॥ अष्टविनायक नमो नमः ॥ गणपति बाप्पा मोरया ॥ मंगल मूर्ति मोरया ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस स्तोत्र का मुख्य विषय भगवान श्री गणेश की आराधना करना है। पहले श्लोक में भक्त भगवान को प्रणाम करते हैं, उन्हें गौरीपुत्र और विनायक कहकर संबोधित किया गया है। भक्त भगवान श्री गणेश का स्मरण करते हुए जीवन के लक्ष्यों जैसे आयु, कामना और साधनों की सिद्धि की प्रार्थना करते हैं। श्लोक 2 से 4 में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया गया है, जैसे वक्रतुण्ड (जिसकी मुद्रा एक बट की तरह है), एकदंत (जो एक दांत वाले हैं), तथा अन्य विभिन्न नामों से उनका स्मरण किया गया है। यह विभिन्न नाम भक्त के लिए सुख, समृद्धि और संकटों से छुटकारा दिलाने वाले हैं।

स्तोत्र के माध्यम से भक्त यह प्रकट करते हैं कि गणेश जी के इन नामों का जप करना केवल आध्यात्मिक प्रगति ही नहीं, अपितु भक्त को संकटों और विघ्नों से भी मुक्त करता है। श्लोक 5 में कहा गया है कि जो व्यक्ति इन 12 नामों का जप करता है, उसे किसी भी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता। यह भक्ति का अद्भुत उपकरण है, जो भक्तों को मानसिक और भौतिक दृष्टि से भी बलवान बनाता है। श्लोक 6 में बताया गया है कि विद्यार्थी, धन की कामना करने वाला, पुत्र की कामना करने वाला और मोक्ष की इच्छा करने वाला सभी इस स्तोत्र का जाप करके अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं।

इस स्तोत्र का तात्पर्य यह है कि भक्ति मार्ग पर चलकर, भगवान गणेश की कृपा से सभी बाधाएँ दूर हो सकती हैं। यह दर्शाता है कि भक्ति में सच्ची निष्ठा और समर्पण से सभी कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है, अर्थात वे सभी विघ्नों को दूर करते हैं। इस स्तोत्र को पढ़ने का अर्थ है कि हम अपनी संकल्पना में श्रद्धा एवं विश्वास लाते हैं, जिससे हम अपने जीवन के लक्ष्य को बिना किसी विघ्न के पूर्ण कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश जी की पूजा का विशेष स्थान है, जो हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुराणों में गणेश जी की महिमा एवं उनके अनुग्रह की अनकही कहानियाँ मिलती हैं। यह स्तोत्र विशेषकर गणेश चतुर्थी पर पाठित किया जाता है और भक्तों को उनके पाठ से संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। यजुर्वेद, ऋग्वेद एवं उपanishads में भी गणेश की महिमा का वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र की व्याकरण से सिद्धि एवं समृद्धि का अद्भुत संबंध स्थापित होता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। गणेश संकटनाशन स्तोत्र का जाप करने से भक्त मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्रगति का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह संकटों के निवारण में मदद करता है और इच्छाओं की पूर्ति के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। श्रद्धा से अभिभूत होकर, इस स्तोत्र के जाप से व्यक्ति को आत्मिक अनुभव भी मिलते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

गणेश संकटनाशन स्तोत्र का श्रद्धा पूर्वक जप प्रातः काल या संध्याकाल में करना चाहिए। शुरुआत में एक दीया या धूप जलाने से वातावरण को शुद्ध किया जा सकता है। जप के समय ध्यान लगाते हुए शांतचित्त होकर बैठना चाहिए। मन में गणेश जी के प्रति प्रेम और समर्पण हो, यही उचित मानसिकता होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या गणेश संकटनाशन स्तोत्र का जाप कोई विशेष मुहूर्त पर करना चाहिए?

हाँ, गणेश संकटनाशन स्तोत्र का जाप प्रातः सूर्योदय से पूर्व या संध्या के समय करना शुभ होता है। यह समय भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और भक्ति का सर्वोत्तम समय माना जाता है।

इस स्तोत्र का लाभ कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

गणेश संकटनाशन स्तोत्र का लगातार जप करने से विघ्नों और संकटों से मुक्ति हासिल होती है। इससे व्यक्ति की इच्छाएँ पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

क्या इस स्तोत्र का जप करके कोई विशेष सिद्धि प्राप्त की जा सकती है?

जी हाँ, इस स्तोत्र का नियमित जप करने से भक्त विभिन्न प्रकार की सिद्धियों, जैसे ज्ञान, धन, और संतान प्राप्ति की इच्छाओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। भक्त का श्रद्धा और समर्पण सफलता में सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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