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श्री शिवरक्षा स्तोत्रम् लिरिक्स (Shri Shiv Raksha Stotram Lyrics in Hindi) - Shiva Raksha Stotram - Bhaktilok

92 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री शिवरक्षा स्तोत्र: सम्पूर्ण रक्षण साधना

श्री शिवरक्षा स्तोत्र का पाठ भक्तों को सच्ची शांति, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करता है।

श्री शिवरक्षा स्तोत्रम् लिरिक्स (Shri Shiv Raksha Stotram Lyrics in Hindi) -    । ॐ नमः शिवाय ।अस्य श्रीशिवरक्षा-स्तोत्र-मन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः,श्रीसदाशिवो देवता, अनुष्टुप् छन्दः,श्रीसदाशिव-प्रीत्यर्थे शिवरक्षा-स्तोत्र-जपे विनियोगः ॥चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम् ।अपारं परमोदारं चतुर्वर्गस्य साधनम् ॥ (१)गौरी-विनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम् ।शिवं ध्यात्वा दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः ॥ (२)गङ्गाधरः शिरः पातु भालमर्द्धेन्दु-शेखरः ।नयने मदन-ध्वंसी कर्णौ सर्प-विभूषणः ॥ (३)घ्राणं पातु पुराराति-र्मुखं पातु जगत्पतिः ।जिह्‍वां वागीश्‍वरः पातु कन्धरां शिति-कन्धरः ॥ (४)श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्‍व-धुरन्धरः ।भुजौ भूभार-संहर्त्ता करौ पातु पिनाकधृक् ॥ (५)हृदयं शङ्करः पातु जठरं गिरिजापतिः ।नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्रजिनाम्बरः ॥ (६)सक्थिनी पातु दीनार्त्त-शरणागत-वत्सलः ।ऊरू महेश्‍वरः पातु जानुनी जगदीश्‍वरः ॥ (७)जङ्घे पातु जगत्कर्त्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः ।चरणौ करुणासिन्धुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः ॥ (८)एतां शिव-बलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत् ।स भुक्त्वा सकलान् कामान् शिव-सायुज्यमाप्नुयात् ॥ (९)ग्रह-भूत-पिशाचाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये ।दूरादाशु पलायन्ते शिव-नामाभिरक्षणात् ॥ (१०)अभयङ्कर-नामेदं कवचं पार्वतीपतेः ।भक्त्या बिभर्त्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत् त्रयम् ॥ (११)इमां नारायणः स्‍वप्ने शिवरक्षां यथादिशत् ।प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यस्तथालिखत् ॥ (१२)(इति श्रीयाज्ञवल्क्य-प्रोक्तं शिवरक्षा-स्तोत्रं सम्पूर्णम् ।)

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री शिवरक्षा स्तोत्र का मुख्य उद्देश्य भक्तों को महादेव शिव की कृपा से सुरक्षा का आशीर्वाद देना है। इस स्तोत्र में शिव के विभिन्न रूपों का वर्णन करते हुए उनकी महानता और शक्तियों का गुणगान किया गया है। विशेष रूप से, 'गौरी-विनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम्' इस पंक्ति में शिव की अपार शक्ति और करुणा का संकेत मिलता है, जो भक्तों की रक्षा करती है। एक तात्त्विक दृष्टिकोण से, यह स्तोत्र व्यक्ति को उनके चारों पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—को साधने में सहायता करता है। यह स्तोत्र जपने वाले व्यक्ति के जीवन में सभी सकारात्मक शुभों का संचार करता है, जिससे उसे संसार में सुख और शांति प्राप्त होती है।

भावार्थ के स्तर पर, शिवरक्षा स्तोत्र का संपोषण करते वक्त भक्त को शिव के प्रति अपार भक्ति का अनुभव होता है। 'एतां शिव-बलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्' इस पंक्ति द्वारा यह सिखाया जाता है कि अर्थ, सिद्धि और समृद्धि के लिए शिव के प्रति श्रद्धा और उनकी आराधना अति आवश्यक है। जब भक्त इस स्तोत्र का पाठ करता है, तो वे अपने हृदय में शिव की शक्ति को अनुभव कर सकते हैं, जिससे उन्हें आत्म-विश्वास और सुरक्षा का संवर्धन होता है। यह स्तोत्र न केवल एक साधना है, बल्कि यह एक मानसिक और आध्यात्मिक स्थिति को भी परिभाषित करता है जिसमें भक्त आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर सकता है।

प्रकृति की अद्भुत लीलाओं से युक्त शिव की उपासना का एक मुख्य मार्ग भक्तिपूर्वक संतोष और समर्पण है। 'सर्वाङ्गानि सदाशिवः' इस भावार्थ से यह स्पष्ट होता है कि शिव का स्वरूप केवल एक भौतिक रूप में नहीं, बल्कि सभी प्राणियों के अंदर विद्यमान है। इस भक्ति मार्ग में, भक्त केवल भक्ति नहीं करते, बल्कि वे शिव की महिमा में डूब जाते हैं और पूरे जीवन में इस कथा का अनुभव करते हैं। यह भक्ति की अभिव्यक्ति न केवल अत्यधिक प्रसिद्धि का माध्यम है, बल्कि आत्मा के लिए सत्य की खोज का महत्वपूर्ण चरण भी है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

शिवरक्षा स्तोत्र का महत्व हिन्दू धर्म में बहुत गहरा है। यह विशेषतः याज्ञवल्क्य ऋषि द्वारा रचित है तथा कई पुराणों में इसका उल्लेख मिलता है। शिव को 'महादेव' के नाम से भी जाना जाता है, जो सभी प्रकार की बाधाओं और संकटों से रक्षा करने वाले हैं। धार्मिक ग्रंथों एवं पुराणों में शिव की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन से सभी नकारात्मकता दूर होती है। इस स्तोत्र के पाठ से भूत-प्रेत और अन्य आसुरी शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है, जिससे भक्त का मन शांत और स्थिर रहता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। श्री शिवरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक स्थिरता, आंतरिक शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है। नियमित रूप से इसका पाठ करने वाले भक्त अपने जीवन में सुख, समृद्धि और प्रकार्य की प्राप्ति करते हैं। यह स्तोत्र भक्त के चारों पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की साधना में सहायक होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ प्रातःकाल या संध्या वेला में करना विशेष लाभदायक होता है। पाठ के समय एक दीप जलाया जाना चाहिए और शांत मन से ध्यान लगाना चाहिए। भक्त को सरल मुद्रा में, एकाग्र होकर इस स्तोत्र का उच्चारण करना चाहिए। मन में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री शिवरक्षा स्तोत्र का पाठ किसके लिए किया जाता है?

इस स्तोत्र का पाठ भक्तों द्वारा सुरक्षा और कल्याण हेतु किया जाता है, जिससे सभी बाधाएं दूर हो सकें।

इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

इसका पाठ प्रतिदिन प्रातःकाल या संध्या समय में करना उत्तम होता है, जिससे सकारात्मकता और मानसिक शांति प्राप्त हो।

क्या शिवरक्षा स्तोत्र से कोई विशेष लाभ होता है?

हां, शिवरक्षा स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा, भक्तों की इच्छाओं की पूर्ति एवं करुणा का अनुभव होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 17 Aug 2026

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