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तेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता है भजन लिरिक्स (Tera Mera Sanware Aisa Naata Hai Lyrics in Hindi) - by श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज - Bhaktilok

79 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सांवरे का अटूट बंधन: श्री अनिरुद्धाचार्य जी के भजन

इस भजन में सांवरे कान्हा से गहराया प्रेम और भक्ति का संबंध बयां किया गया है।

तेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता हैदिन हो चाहे रात हो तेरा सपना आता है।।मीत बना तू मेरा और प्रीत लगाई ऐसीदुनिया बनाने वाले ये रीत चलाई कैसीना जाने तू कैसा कैसा खेल रचाता हैतेरा मेरा साँवरे ऐसा नाता हैदिन हो चाहे रात हो तेरा सपना आता है।।जिसको भी तू चाहे उसको अपना बना लेसबकुछ तेरे वश में तुम हो करने वालेकर ना सके कोई भी वो तू करके दिखाता हैतेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता हैदिन हो चाहे रात हो तेरा सपना आता है।।अब ना टूटे कान्हा ये तेरा मेरा बंधनमेरा कुछ भी नहीं है तेरा तुझको अर्पणबनवारी इस दिल को केवल तू ही भाता हैतेरा मेरा सांवरे कैसा नाता हैदिन हो चाहे रात हो तेरा सपना आता है।।तेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता हैदिन हो चाहे रात हो तेरा सपना आता है।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'तेरा मेरा सांवरे ऐसा नाता है' का मुख्य विषय प्रेम और भक्ति का गहरा संबंध है। एक प्रेमिका अपने प्रियतम, भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भावना को व्यक्त कर रही है। भजन के इस शुरुआती पंक्ति में कहा गया है कि दिन या रात में, वह हमेशा अपने सांवरे का सपना देखती है। यह जीवन की दिनचर्या में उनके प्रति निरंतर भक्ति और प्रेम की अनुभूति को दर्शाता है। अगली पंक्ति में, यह कहा गया है कि भगवान ने उसे मित्र बना लिया है और एक ऐसी प्रेम कहानी को यूं ही चलाया है, जो संसार की रीतों से परे है। यह दर्शाता है कि भक्ति का मार्ग साधारण जीवन से हमें ऊपर उठा सकता है, जहां हम भक्त और भगवान के बीच अनोखे खेल का अनुभव करते हैं।

भजन में यह भी कहा गया है कि भगवान किसी को भी अपना बना सकते हैं। यह असीम शक्ति और प्रेम का दर्शन है, जो केवल भक्त के भरोसे और विश्वास से प्रगाढ़ होता है। यह संवाद भक्ति राजा की भावना का अभिव्यक्ति है, जिसमें भक्त का हर एक अंश भगवान के समर्पण में समर्पित है। जब भजन का कहा जाता है, 'अब ना टूटे कान्हा ये तेरा मेरा बंधन', तो यह उस अटूट बंधन का संकेत है जो भक्त और भगवान के बीच बना रहता है। यह विश्वास और आत्मसमर्पण की गहराई को उजागर करता है, जिसमें भक्त केवल भगवान को समर्पित करता है।

इस भजन में भक्ति के मार्ग में आत्मसमर्पण की महत्वपूर्णता को दर्शाया गया है। 'मेरा कुछ भी नहीं है तेरा तुझको अर्पण' की भावना भक्ति में पूर्ण आत्मनिर्गमन को दिखाती है, जहां भक्त अपनी पहचान खोकर केवल भगवती प्रेम में लीन हो जाता है। भक्त का यह नाता 'सांवरे' से अधिक निजी है, जो ईश्वरीयता का एक गहरा अनुभव प्रदान करता है। यह भक्ति मार्ग की गहराई को दर्शाता है, जहां अपनी आत्मा को पूरी तरह से भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया जाता है, और यही भक्ति का असली सार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ भारतीय पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों में गहराई से स्थापित है, विशेषकर भगवान कृष्ण की लीला और भक्ति के सिद्धांतों में। कृष्ण को प्रेम का अवतार माना गया है, और इस भजन के माध्यम से भक्त उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त कर रहे हैं। भागवत पुराण, जो कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन करता है, में यह भाव स्पष्ट मिलते हैं। यहां यह दिखाया गया है कि कैसे भक्त की भावना और प्रेम में अद्वितीयता होती है, जो पारंपरिक धार्मिक रीतियों से परे जाकर भगवान के प्रति असाधारण निष्ठा को प्रस्तुत करती है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उत्तेजना और आंतरिक सुख की प्राप्ति होती है। जब भक्त इस भजन को गाता है, तो उसका मन और आत्मा परमेश्वर की ओर आकर्षित होती है, जिससे वह अपनी चिंताओं और तनावों से मुक्त हो जाता है। यह भजन ध्यान की अवस्था में भावनाओं को गहराई से अनुभव करने का माध्यम भी बनता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का गायन सुबह की आरंभ में या शाम के समय किया जाना चाहिए, जब मन शांत और ध्यान केंद्रित हो। दीप जलाना और पुष्प अर्पित करना भक्ति की भावना को बढ़ाता है। सही मुद्रा में बैठकर, शांत मन से इस भजन का पाठ करना चाहिए, जिससे ईश्वर के प्रति प्रेम की अनुभूति और गहरी हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश प्रेम और भक्ति का अटूट बंधन है, जिसमें भक्त का अपने भगवान के प्रति असीम श्रद्धा व्यक्त होती है।

भजन का सही समय क्या है?

भजन का गायन प्रातः काल या सांय के समय किया जाना चाहिए, जब मन शांति में हो, जिससे भक्ति का अनुभव गहराई से हो सके।

इस भजन के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन के पाठ से मानसिक शांति, आध्यात्मिक अनुभव और भगवान के प्रति प्रेम में वृद्धि होती है, जो जीवन में सकारात्मकता लाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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