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भक्ति रस काव्य व भजन

चंदा सिर पर है जिनके कानो में कुण्डल चमके लिरिक्स (Chanda Sar Par Hai Jinke Lyrics in Hindi) - Sanjay Chauhan Shiv Bhajan - Bhaktilok

76 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोलेनाथ का महिमा गान: चंदा सिर पर

इस भजन में शिवजी की दिव्यता और प्रेम का भाव प्रकट होता है, मनुष्य को भक्तिभाव से भर देता है।

चंदा सिर पर है जिनके कानो में कुण्डल चमकेसर्पो की माल गले मेंगंगा है जटा में जिनकेऐसे तो भोला शंकर हैशंकर को वंदन है ||मेरे भोले भंडारी कीनंदी पे सवारीनंदी की सवारीलागे हमको प्यारीभस्मी रमी है तन पेहाथों में डमरू जिनकेबाघम्बर छाल कमर पेत्रिशूल है हाथ में जिनकेऐसे तो भोला शंकर हैशंकर को वंदन है ||जब जब ये आँखे खोलेतो धरती अम्बर डोलेदेव तो क्या ब्रम्हांड भीजय शिव शंकर बोलेमुखड़े पर तेज है दमकेएक नेत्र ललाट पे जिनकेरुद्राक्ष भुजंग पे धारेतिहुँ लोक है चर्चे जिनकेऐसे तो भोला शंकर हैशंकर को वंदन है ||गौरा शंकर की जोड़ीकितनी सुन्दर लागेइनके दर्शन सेभाग्य हमारे जागेगुण गाता जग ये जिनकेहम भी दीवाने उनकेजो भोले भाले मन केहृदय में प्रेम जिनकेऐसे तो भोला शंकर हैशंकर को वंदन है ||चंदा सिर पर है जिनकेकानो में कुण्डल चमकेसर्पो की माल गले मेंगंगा है जटा में जिनकेऐसे तो भोला शंकर हैशंकर को वंदन है ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'चंदा सिर पर है जिनके' में भगवान शिव की दिव्यता एवं अलौकिक विशेषताओं का वर्णन किया गया है। इस भजन की पहली पंक्ति में भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा का आभास दर्शाया गया है, जो उनकी शांति और सौंदर्य का प्रतीक है। उनकी कर्णों में झूमके वाले कुण्डल और गले में सर्पों की माला चिह्नित करते हैं कि वे मृत्यु और जीवन के चक्र के परे हैं। उनकी जटा में गंगा का प्रवाह, उन्हें शुद्धता और दयालुता का स्वरूप प्रदान करता है। इस सभी विशेषताओं के अभिव्यक्ति के साथ, इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भोलेनाथ की कृपा से जीव कष्टों और दुखों से मुक्त हो सकते हैं।

इस भजन में प्रेम और भक्ति का एक अभूतपूर्व भाव प्रस्तुत किया गया है। जैसे-जैसे भजन आगे बढ़ता है, भोलेनाथ की सवारी नंदी के प्रति प्रेम और भक्ति की भावना को उभारता है। भस्मी और डमरू भक्ति का प्रतीक है जो भक्तों के भीतर एक ऊर्जा और प्रेरणा भरती है। 'जब जब ये आँखें खोले' पंक्ति में यह सत्य निहित है कि जब भक्त भगवान शिव को ध्यान करते हैं, तब अद्भुत मानसिक और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इस भजन से भक्तों को प्रेरणा मिलती है कि उनके हृदय में प्रेम और विश्वास हो, जिससे वे शांति और समर्पण प्राप्त कर सकें।

इस भजन का केंद्रीय विचार 'भोले शंकर' की अव्यवस्थितता और सरलता को दर्शाता है। भगवान शिव को 'भोला' कहा जाता है, जो दर्शाता है कि उनका दिल बहुत बड़ा और स्वच्छ है। शिव भक्ति मार्ग के प्रकाश में, भक्तों को अपने दुखों को छोड़कर, भगवान की तरफ ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस भजन में शिव और माता गौरा की जोड़ी की सुंदरता का उल्लेख किया गया है, यह दर्शाता है कि जब प्रेम, शांति और समर्पण का संबंध होता है, तो भक्ति का मार्ग स्वर्णिम हो जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव की महिमा को दर्शाने वाला यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं और शास्त्रों में एक प्रमुख स्थान रखता है। शिव पुराण, भागवत पुराण और महाभारत में भगवान शिव का वर्णन उनकी महानता और भक्ति को चित्रित करता है। शिव और पार्वती की भक्ति के संदर्भ में, यह भजन भक्ति मार्ग और साधना के प्रति एक नई प्रेरणा प्रदान करता है। शिव की लीलाएँ और उनकी ऊर्जा का भक्ति में महत्व है, जिससे साधक को शांति और आनंद की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति, स्थिरता, और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है। भक्त अगर इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाते हैं, तो उन्हें सकारात्मक ऊर्जा, भावनात्मक संतुलन, और आध्यात्मिक बल मिलता है। यह भजन भक्तों को चिंता और तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद करता है, और नकारात्मकताओं से दूर रखता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सच्चे मन से जाप सुबह-सुबह या संध्या के समय करना उपयुक्त है। भक्तों को एक शांत स्थान पर बैठकर, ध्यान लगाकर, एक दीपक जलाने और भगवान शिव को पुष्प अर्पित करने की सलाह दी जाती है। ध्यान की स्थिति में, मन को स्थिर करें और विचारों को भगवान शिव तक केंद्रित करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस प्रकार भगवान शिव की पूजा में सहायक है?

यह भजन भगवान शिव की अनुकंपा को आकर्षित करता है और भक्तों को शिव के प्रति प्रेम और भक्ति को जागृत करता है। यह भक्ति के माध्यम से साधक को मानसिक शांति और शक्ति प्रदान करता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय होता है?

इस भजन का जाप सुबह या शाम के समय करना श्रेष्ठ होता है, जब वातावरण शांत और ध्यान करने के लिए उपयुक्त होता है। इससे ध्यान केंद्रित करने में सहायता होती है।

इस भजन को गाने से हमें क्या लाभ होगा?

इस भजन के जाप से भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा, और आत्मिक संतुलन की प्राप्ति होती है। यह भजन नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में भी सहायक होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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