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डम डम डमरू बाजे मेरे भोले के दरबार में लिरिक्स (Dam Dam Damaru Baje Mere Bhole Ke Darbar Me Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan - Bhaktilok

99 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भोलेनाथ की कृपा: भक्तों का आश्रय

इस भजन की संगीनी से शिव की भक्ति और आशीर्वाद की आह्वान करें, जो आत्मा को शांति और साहस प्रदान करता है।

डम डम डमरू बाजे मेरे भोले के दरबार मेंकण कण में बसते हैभोले बाबा संसार मेंजिसे मोह ना मायाजाल काओ भक्त है महाकाल का..वो शम्भू है वो शंकर हैउनसे ही तो धरती अम्बर हैवो भक्तो का रखवाला हैवो है तो ये जग में उजाला हैजिसे डर नहीं भुजाल काओ भक्त है महाकाल काजिसे मोह ना मायाजाल काओ भक्त है महाकाल का..हो मेरे दिल में हमेशातेरा वास रहेमेरे सर पे हमेशातेरे हाथ रहेहो मेरी मंजिल हो चाहेकितनी मुश्किलमहाकाल हमेशामेरे साथ रहेहो बात मेरी छोटीपर मन है मेरा शिवालाबाण मुझे क्या मारेमहाकाल है रखवालाजो करता तिलक भस्म काओ भक्त है महाकाल काजिसे मोह ना मायाजाल काओ भक्त है महाकाल का..डम डम डमरू बाजेमेरे भोले के दरबार मेंकण कण में बसते हैभोले बाबा संसार मेंजिसे मोह ना मायाजाल काओ भक्त है महाकाल का..||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन 'डम डम डमरू बाजे' में शिव की महिमा का वर्णन है। 'डम डम डमरू' का अर्थ है शिवजी की ढोलक, जो उनकी उपासना का प्रतीक है। इस भजन में यह कहा गया है कि भगवान शिव, जिन्हें 'भोले' कहा गया है, संसार के प्रत्येक कण में विद्यमान हैं। इन्हें माया और मोह से परे समझा गया है। इस भजन की पंक्ति 'जिसे मोह ना मायाजाल का' इस बात का प्रकट और स्पष्ट संकेत है कि शिव की भक्ति में अध्यात्मिक जागरूकता और भौतिक संसार की मोह-माया से मुक्ति का भाव है। 'महाकाल' के संदर्भ में भक्त को उनके द्वारा दी गई सुरक्षा और मार्गदर्शन का एहसास होता है।

भजन में भावार्थ स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है कि भक्त का विश्वास और समर्पण भगवान शिव के प्रति अडिग है। 'हो मेरे दिल में हमेशा तेरा वास रहे' इस पंक्ति में भक्ति का गहरा सन्देश छिपा हुआ है। भक्त यह प्रार्थना करता है कि शिव का आश्रय उसका हर कठिनाई में साथ रहे। इसमें एक गहरी भावना है कि जब भी भक्त कठिनायों का सामना करता है, तब शिव ही उसका मार्गदर्शन और संबल बनते हैं। 'महाकाल' का उल्लेख भक्त को और अधिक साहस प्रदान करता है, जिससे वह जीवन की चुनौतीओं से लड़ने का हौसला पाता है। यह भजन न केवल श्रद्धा को बढ़ाता है, बल्कि भक्त को उनके हृदय में शिव के वास की अनुभूति भी कराता है।

इस भक्ति में इस बात की विशेषता है कि भगवान शिव को सर्वत्र देखने की अपेक्षा व्यक्त की गई है। शिव की उपासना में 'भक्ति मार्ग' का उल्लेख होता है, जो भक्त को एक आदर्श के रूप में प्रेरित करता है। भक्ति मार्ग वही है, जो भक्त को आत्मिक शुद्धता की ओर ले जाता है। भजन के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि शिव का ध्यान करने से न केवल मन की शांति मिलती है बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और उजाले का संचार भी होता है। इस हेतु शिव की उपासना का मार्ग केवल भक्ति नहीं, बल्कि आस-पास की दुनिया की सराहना और चेतना के लिए भी है। शिव की कृपा से व्यक्ति अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का संदर्भ पुराणों में मिलता है, जहां भगवान शिव को 'महाकाल' कहा गया है और जगत के रक्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है। शिव की भक्ति का महत्व 'शिव पुराण' और अन्य शास्त्रों में कई स्थानों पर बताया गया है। शिव अनेक भक्तों को अपने करों में लेते हुए उन्हें मुक्ति की ओर ले जाते हैं। इसी प्रकार 'रामायण' और 'महाभारत' में भी शिव की उपासना का उल्लेख है, जो भक्तों को उनके व्यक्तित्व के उच्चतम स्वरूप से मिलवाता है। इस भजन में भगवान शिव के प्रति असीम भक्ति एवं प्रेम प्रकट होता है, जो मानवता के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। 'डम डम डमरू बाजे' का जप करने से व्यक्ति में शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। यह भजन मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है और शारीरिक शक्ति भी बढ़ाता है। इसके अलावा, यह आत्म-विश्वास को बढ़ाता है एवं भक्त को जीवन में थकावट और डिप्रेशन से उबारने में सहायक होता है। नियमित भक्ति से भक्त का संबंध शिव से और मजबूत होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सबसे अच्छा प्रातः काल या संध्या समय में किया जाता है। भक्ति के दौरान एक दीप जलाना और भोग का एक छोटा सा अर्पण करना शुभ रहता है। ध्यान करते समय सही आसन में बैठकर मन को स्थिर करना चाहिए। भक्त को ध्यान में केवल शिव की दया और भक्ति को महसूस करना चाहिए। इससे भजन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

डम डम डमरू बाजे भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश भगवान शिव की महिमा और उनकी भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि शिव सृष्टि के हर कण में हैं और भक्तों का मार्गदर्शन करते हैं।

इस भजन का पाठ कहाँ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ घर में विशेष रूप से पूजा स्थान पर निश्चिन्तता और प्रेम के साथ करना चाहिए। इससे भक्ति बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है।

इस भजन को गाने से क्या लाभ होता है?

इस भजन को गाने से मन में सकारात्मकता आती है, जीवन में कठिनाइयों का सामना करने का हौसला बढ़ता है, और भक्त का शिव के प्रति विश्वास मजबूत होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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