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भक्ति रस काव्य व भजन

हर रोती हुई आँख को हंसा लिरिक्स (HAR ROTI HUI AANKH KO HANSA LYRICS IN HINDI) - Bageshwar Balaji Bhajan - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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संकटमोचन: हर रोती आँख को हंसाने वाला भजन

इस भजन के माध्यम से हम सभी दुखियों की आँखों में खुशी भरने की प्रार्थना करते हैं।

हर रोती हुई आँख को हंसा तेरी मेहरबानी होवेगी हर हारे हुए प्रेमी को जीता तेरी मेहरबानी होवेगी बार बार दर कोई आके जब रोता है दूसरा भी प्रेमी विश्वास को खोता है ना किसी का यूँ भरोसा तू डिगा तेरी मेहरबानी होवेगी भोगना पड़े जो हमें कर्मो का फल है तेरा दरबार किस समस्या का हल है क्षमा करके तू रस्ता दिखा तेरी मेहरबानी होवेगी रोग वाले रोगी ही मिलते हकीम से हो लाचार सब आते हैं यकीन से मेरे रोग वाली दवा तो बता तेरी मेहरबानी होवेगी मुझ जैसे पापी पे भी करते रहम हो तोड़ दे तू प्रेमियों का कोई भी वहम हो ज़रा रोमी को भी जलवा दिखा तेरी मेहरबानी होवेगी हर रोती हुई आँख को हंसा ...........

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य संदेश है दुखियों और पीड़ितों के प्रति प्रेम और सहानुभूति व्यक्त करना। प्रारंभिक रचनाएँ यह दर्शाती हैं कि 'हर रोती हुई आँख को हंसा तेरी मेहरबानी होवेगी', जिसमें भाव है कि जब हम अपने दुखों को भगवान के चरणों में रख देते हैं, तो उनकी कृपा से हमारी पीड़ा दूर हो जाती है। यहाँ यह भी कहा गया है कि 'हर हारे हुए प्रेमी को जीता तेर मेहरबानी होवेगी', जिसका अर्थ है कि भगवान प्रेम में डूबे भक्तों को अपनी अनुकंपा से संजीवनी देते हैं। भजन में विविध प्रकार की समस्याओं का सामना करने वाले भक्तों को आश्वस्त किया गया है कि संकट में भी भगवान का आश्रय मिलेगा।

इस भजन की भावार्थ में भक्ति और श्र surrender का गहरा अर्थ मिलता है। 'बार बार दर कोई आके जब रोता है', यह दर्शाता है कि मानव जीवन में निरंतर संघर्ष एवं दुखों का सामना करना पड़ता है। लेकिन विश्वास न खोने और भगवान की कृपा पर निर्भर रहने का संदेश अनुपम है। 'तेरा दरबार किस समस्या का हल है', यह संकेत करता है कि हम सभी समस्याओं के समाधान के लिए ईश्वर की शरण में जा सकते हैं। इस प्रकार भक्त भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि वह कृपा करें और उनकी कष्टों को दूर करें।

इस भजन में भक्ति मार्ग का आनंद लेने की प्रक्रिया प्रस्तुत की गई है। यह एक अद्भुत भक्ति प्रार्थना है, जिससे भक्त अपने आंतरिक कांप को दूर करने और भगवान की ऊर्जा में अपने दुखों को भक्तिरूप में सहने के लिए प्रेरित होते हैं। भक्ति के इस मार्ग में भक्त की शुद्धता, विश्वास और प्रेम की महत्वता है। इस प्रकार, भजन का एक प्रमुख धारा है - सभी संबंधों को ईश्वर के प्रति समर्पित करके शांति की प्राप्ति करना।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का विशेष महत्व पौराणिक कथाओं में निहित है, जहाँ भगवान की कृपा से भक्तों ने विविध दुखों का सामना किया और सफल हुए। रामायण और महाभारत में भी यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संकट की घड़ी में भगवान का स्मरण करना आवश्यक है। प्रत्यक्षतः यह भजन ईश्वर की असीम कृपा पर विश्वास को मजबूत करने का कार्य करता है। जब भी भक्त कोई कष्ट भोगता है, तो यह भजन उन्हें आश्वस्त करता है कि हर किसी की आँखों में हंसी लाने वाला भगवान सदैव उनके साथ है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, संकोच दूर करना और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह भक्तों में सुख और आंतरिक संतोष का अनुभव कराता है। नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करने से नकारात्मकता समाप्त होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के जाप का उत्तम समय प्रातः या संध्या में है। पूजा करते समय एक दीया जलाना चाहिए और भगवान को फूल या फल अर्पित करना चाहिए। सच्चे मन से ध्यान लगाते हुए एक सरल व तत्काल आत्मश्रद्धा के साथ इस भजन का जाप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को क्यों गाया जाता है?

यह भजन दुखियों को सुख एवं मानसिक शांति प्रदान करने के लिए गाया जाता है। इसमें भक्ति को प्रकट करने का माध्यम है।

कौनसी समस्या का समाधान इस भजन में मांगते हैं?

इस भजन में भक्त सभी प्रकार के दुखों, परेशानियों और समस्याओं का समाधान भगवान से मांगते हैं। यह हमें कठिनाइयों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

इस भजन के पाठ से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन का पाठ मानसिक तनाव को कम करने, भक्ति को वृद्धि करने, और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक होता है। यह भक्तों को मानसिक और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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