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Krishna Bhajan

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी लिरिक्स (Shree Krishna Govind Hare Murari Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok

72 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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कृष्ण भक्ति का अनमोल गीत: श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी भजन हृदय को भक्ति और प्रेम से भरने वाला है। इस भजन का गान करें और कृष्ण की कृपा प्राप्त करें।

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी मुरलीधर राधा रानी से बढकर कोई न यार है, जो गोकुल में जन्म ले कर, प्यारा राधा का संसार है। श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी जो शरण में तेरी आते हैं, सबको तू बनाता है खुशहाल, राधा, श्याम संग खेलता, सदा रहता मस्त हर साल। श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी जिन्हें छोड़ते हैं, मोहन तू अपने कोई औलाद न जान कर। सबने तुझी से अपने जीवन में आशा जोड़ा है। श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी तेरे ध्यान से ही सुख आए, सबका तू हो धर्म सच्चा, जो तेरा ध्यान करता, उसका जीवन बने सच्चा। श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ बलराम जी, कृपा करो, हे मुरारी

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य थीम श्री कृष्णा की रूप, गुण, और उनकी दिव्य लीला का आह्वान है। यहां 'श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी' के द्वारा भगवान श्री कृष्ण को विभिन्न नामों से सम्बोधित किया गया है, जिससे भक्तों की श्रद्धा गहराई में जाती है। इस बक्ति गीत में 'हे नाथ बलराम जी, कृपा करो' की पुकार से यह ज्ञात होता है कि केवल भगवान कृष्ण ही जीवन के सभी कष्टों को दूर कर सकते हैं। ये भक्ति शब्द भक्तों को याद दिलाते हैं कि भगवान कृष्ण अपनी लीलाओं के माध्यम से हम सबके दुखों का निवारण करते हैं। उदाहरण के लिए, 'जो गोकुल में जन्म ले कर प्यारा राधा का संसार है' इस वाक्य में राधा-कृष्ण की प्रेम कहानी का उल्लेख है, जो भक्ति योग में एक आदर्श उदाहरण है।

भजन 'श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी' भावार्थ के स्तर पर भक्त की व्यक्तिगत भक्ति और प्रेम को प्रकट करता है। यह भावनाएं एक अनमोल रिश्ता प्रकट करती हैं, जिसमें भक्त श्री कृष्ण को न केवल एक deity के रूप में देखता है, बल्कि एक सखा और प्रेमी के रूप में भी। 'तेरे ध्यान से ही सुख आए' जैसे मंत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जीवन में सच्चा सुख केवल ध्यान और भक्ति से ही प्राप्त होता है। यह भजन भक्तों को यह एहसास दिलाता है कि जीवन में उनके समस्त सुख और शांति भगवान श्री कृष्ण पर निर्भर करती है।

इस भजन का एक महत्वपूर्ण पहलू भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) का अनुसरण है, जिसमें भगवान की भक्ति एवं प्रेम को सर्वोपरि माना गया है। 'जो तेरा ध्यान करता, उसका जीवन बने सच्चा' के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाता है कि भक्ति ही सभ्यता का सर्वोच्च आदर्श है। मर्यादा पुरूषोत्तम रामाभक्ति से लेकर भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम में यह भजन अद्वितीय है। यह भक्ति मौलिकता, सच्चाई और प्रेम की ओर ले जाती है, जो कि भारतीय दर्शन का मुख्य आधार है। यहां कृष्ण साक्षात प्रेम के प्रतीक हैं, और इस भावना में डूबकर भक्त स्वयं को शुद्ध और दिव्य अनुभव करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी भजन का स्तर धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। 'गोविंद' शब्द का प्रयोग पूरे सृष्टि के पालनहार के संदर्भ में किया गया है, जो कि भागवत पुराण, रामायण और महाभारत में अलग-अलग रूप से वर्णित हैं। ये ग्रंथ स्पष्ट करते हैं कि भगवान श्री कृष्ण का भजन करना भक्त को कई प्रकार के रोग और मानसिक कष्टों से उबारता है। यह भजन भक्तों को संगीनी और सुख की भावना से भर देता है, साथ ही जीवन में धैर्य और शांति की स्थापना करता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष एवं जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। नियमित रूप से गाने से साधक की आध्यात्मिक उन्नति होती है एवं कर्मों में सहजता आती है। यह भक्ति मानसिक दबाव को दूर करती है और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी भजन का सही समय प्रातःकाल या संध्याकाल है। पूजा स्थल को स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित रखें। दीप जलाकर एवं कृष्ण जी को फूल अर्पित करें। सही मुद्रा में बैठकर, पूर्ण ध्यान से इस भजन का जाप करें। मन में प्रेम एवं श्रद्धा रखकर भक्ति भाव से इस कृत्य का पालन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का कोई विशेष महत्व है?

हाँ, यह भजन भक्ति एवं प्रेम के भाव को प्रकट करने के साथ-साथ श्री कृष्ण के प्रति हमारी असीम श्रद्धा को दर्शाता है।

इस भजन को कब और कैसे गाना चाहिए?

इस भजन को प्रातः और संध्या के समय, ध्यानपूर्वक एवं श्रद्धा से गाना चाहिए। यह समय भक्ति के लिए सबसे शुभ होता है।

इस भजन के सुनने से क्या लाभ होते हैं?

इस भजन के प्रतिदिन जपने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति एवं जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। वर्षों से भक्तों ने इसके जप को सुखदायक पाया है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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