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भक्ति रस काव्य व भजन

मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा भजन लिरिक्स (Mere Nath Kedara Tere Naam Ka Sahara Lyrics in Hindi) - Chotu Singh Rawna Shiv Bhajan - Bhaktilok

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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महादेव के केदार: नाम का अभिषेक

भगवान शिव के प्रति भक्ति और समर्पण का यह भजन जीवन में शांति और समर्पण को स्थापित करने का एक साधन है।

 मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा भजन लिरिक्स (Mere Nath Kedara Tere Naam Ka Sahara Lyrics in Hindi) - मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारातेरे नाम की है जोली तेरे नाम का गुजारारुठा अच्छा नहीं लागे मेरा केदारानिकला हूं आज मेरा भोला मनानेतेरे पहाड़ों पे मैं धोरा धरती से आयातुझको मनाने भोलेनाथमेरें नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा।।बहती गंगा से लाया भर के कमंडलतुझको नहलाने भोलेनाथगंगा की धार से पूछा किधर केदारारहता कहां है मेरा नाथनीलकंठ के दर्शन करके केदारापहुंचा हूं सुन ले भोले नाथऊंचे पहाड़ों वाले पैरों में पड़ गए छालेआया मनाने तुझको नाथमेरें नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा।।दिन भर मैं भोले तेरी भांग रगडुंगाडमरु बजाऊं तेरे साथमेरी ये दुनिया सारी दुनिया को दे देमुझको मिले बस तेरा साथस्वर्ग से प्यारा लागे मुझको केदाराचरणों में रख ले भोले नाथसिर पर चंदा चमकारा उस पर गंगा की धारातुझसा ना कोई प्यारा नाथमेरें नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा।।मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारातेरे नाम की है जोली तेरे नाम का गुजारारुठा अच्छा नहीं लागे मेरा केदारानिकला हूं आज मेरा भोला मनानेतेरे पहाड़ों पे मैं धोरा धरती से आयातुझको मनाने भोलेनाथ मेरें नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान शिव, विशेषकर केदारनाथ के आगे सम्पूर्ण समर्पण करता है। 'मेरे नाथ केदारा तेरे नाम का सहारा' की पंक्ति में श्रद्धालु यह दर्शाता है कि शिव का नाम ही उसकी संपूर्ण आशा और विश्वास है। जब वह अपने मन की अंतर्द्वंद्विताओं को स्वीकृति देता है और ध्यान केंद्रित करता है कि भगवानी उनका मार्गदर्शन करें, तो वे अपने में दिव्यता का अनुभव करते हैं। गंगा जल लेकर ‘तुझको नहलाने भोलेनाथ’ पंक्ति में श्रद्धालु यह भावना व्यक्त करता है कि गंगा का जल स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक है, जिसमें उनकी तरलता की शक्ति और शिव के प्रति उनकी भक्ति को अभिव्यक्त किया गया है। वह भगवान शिव को अपने दु:खों को दूर करने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए बुला रहा है।

इस भजन में आराधना का अत्यंत गहरा भाव है। 'ऊंचे पहाड़ों वाले पैरों में पड़ गए छाले' की पंक्ति में भक्ति मार्ग पर चलने के लिए की गई कठिनाइयों और त्याग का स्मरण है। यह दर्शाता है कि भक्त अपनी भक्ति के मार्ग में कितनी भी कठिनाईयों का सामना करने को तैयार है। वह जीवन के कठिन समय में भी अपने भगवान के प्रति प्रेम और आस्था को बनाए रखता है। 'स्वर्ग से प्यारा लागे मुझको केदारा' का उच्चारण करते हुए भक्त यह समझाता है कि उनके लिए भगवान की भक्ति स्वर्ग के सुख से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस भजन में मन की सरलता, निस्वार्थ प्रेम और भगवान के प्रति नियमित भक्ति का संदेश है।

इस भजन में भक्ति मार्ग का अनुसरण करने के लिए आवश्यक तत्परता और समर्पण का महत्वपूर्ण संदेश निहित है। भक्ति साधना के अंतर्गत भगवान शिव का नाम सर्वोच्च है, जिसे भक्त निरंतर स्मरण करता है। कारण, भक्ति की यही शक्ति है, जो मनुष्य को मोह-माया से मुक्त कर उसकी आत्मा को शुद्ध करती है। भगवान शिव, जो संसार के संहारक होते हुए भी भक्तों के प्रति दयालु हैं, उन्हें उनके प्रिय स्वरूप में समर्पित करते हैं। इस प्रकार, भक्‍तों के लिए उनका संसार के समस्त संकटों से मुक्ति पाने का एक मार्ग प्रशस्त होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन केदारनाथ की महिमा और भगवान शिव के प्रति भक्तों के अनन्य प्रेम को दर्शाता है, जो कि पुराणों में वर्णित है। केदारनाथ की कथा पुराणों में एक देवी की तपस्या में व्यस्त रहने से जुड़ी है, और भगवान शिव आकर भक्तों की पुकार सुनते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से शिव की आराधना करते हैं, उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है। महाभारत और पुराणों में केदारनाथ का महत्व भव्यता और पुण्यता के लिए अलग से वर्णित किया गया है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्त में गहरी आस्था और मानसिक मजबूती का विकास होता है। यह भक्ति अवस्था में शांति, सुख और करुणा को प्रेषित करता है। मानसिक स्थिरता के साथ-साथ आध्यात्मिक अवबोधन भी संभव होता है, जो कि जीवन में सकारात्मकता लाता है। यह शिव के प्रति श्रद्धा को बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह-सुबह या शाम को किया जा सकता है, जब मन शांत हो। पूजा के दौरान एक दीया जलाना चाहिए और भगवान के चरणों में एक छोटा-सा नैवेद्य भोग अर्पित करना चाहिए। श्रद्धालु को बैठते समय ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और मन में भगवान की छवि का ध्यान रखना चाहिए, जिससे वह ध्यान में स्थिरता ला सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है भगवान शिव की भक्ति और श्रध्दा। यह दर्शाता है कि कैसे भक्त शिव के नाम के माध्यम से हर संकट से उबर सकते हैं।

क्या केदारनाथ की विशेषता इस भजन में वर्णित है?

जी हां, केदारनाथ को भगवान शिव का एक दिव्य स्थल माना जाता है, और इस भजन में भक्तों द्वारा इस स्थान की महिमा का गुणगान है।

भजन का पाठ करने का सबसे उचित समय कौन सा है?

यह भजन सुबह या शाम, पूजा के समय में करना सबसे उचित है। इससे मानसिक शांति और ध्यान की स्थिति में वृद्धि होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 30 Aug 2026

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