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भक्ति रस काव्य व भजन

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा लिरिक्स (Mere parmpita parmatma kar sab dukha da khaatma Lyeics in Hindi) - by Dev Chanchal - Bhaktilok

113 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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परमात्मा की कृपा: दुखों का नाश

सच्चे मन से की गई अरदास सम्पूर्ण दुखों का निवारण करती है। इस भजन का जाप करें और सच्ची शांति प्राप्त करें।

मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा हर पासे सुख दी आस करा हथ जोड़ के मैं अरदास करामेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मारोक के दुख दी अंधी नु ऐह दुनिया मुकदी जांदी नु हूँ बक्श दे किते गुनाहा हु नाले पा दे सिधिया राहां नु मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मासारी दुनिया तेनु पुकार रही तेरे रहम दा कर इन्तजार रही तेरी मेहर जे हो जाए इन वारि हो जायेगी दूर एह महामारी मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्माहर पासे हाहा कार होई एह दुनिया हूँ लाचार होई सुन ले विनती हूँ ब्चेया दी एह गल हूँ वसो बार हुई मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मूल विषय परम पिता परमात्मा से दुखों का अंत करने की प्रार्थना है। पहले दो पंक्तियों में भक्त ने परमात्मा से सुख की इच्छा की है, जो जीवन की सबसे बड़ी साधना है। 'हथ जोड़ के मैं अरदास करामेरे परमपिता परमात्मा' का अर्थ है कि भक्त विनम्रता से प्रार्थना कर रहा है, यह दर्शाता है कि सच्ची प्रार्थना आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर सकती है। इसमें 'रोक के दुख दी अंधी नु' का संकेत है कि संसार में अंधकार और दुख का जो रूप है, उसे हटाने की प्रार्थना की जा रही है। यह प्रार्थना न केवल व्यक्तिगत दुखों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए है। इसलिए यह भक्ति दुनिया के समस्त दुखों को समाप्त करने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास का परिचायक है।

भावार्थ में, यह भजन भक्त की व्यथा और संसार के दुखों पर प्रकट हो रहा है। 'सारी दुनिया तेनु पुकार रही' इस पंक्ति में, भक्त सृष्टि के समस्त जीवों की निःसंदेह पुकार प्रस्तुत करता है कि अंतिम शरणागति परमात्मा में ही उपलब्ध है। भक्त की विनती है कि 'तेरे रहम दा कर इन्तजार रही'। यह भाव व्यक्त करता है कि जब तक जीवात्मा ईश्वर की कृपा पर निर्भर है, तब तक सभी कठिनाइयाँ दूर हो सकती हैं। महामारी और जीवों की पीड़ा का उल्लेख एक सामूहिक भावना को अभिव्यक्त करता है, जिससे सभी मानवता का भागीदारी का आभास होता है।

इस भजन का आध्यात्मिक अर्थ गहन है। 'मेरे परमपिता परमात्मा कर सब दुखा दा खात्मा' की पंक्ति में भक्ति मार्ग की महत्वपूर्ण पहचान है। यह दर्शाता है कि भक्त का परमात्मा के प्रति समर्पण कितना गहरा है। भक्ति मार्ग में, साहस और विश्वास के माध्यम से भक्त हर तरह के दुख से पार हो सकता है। इस कवित्त में भक्ति की शक्ति दिखती है, जहाँ भक्त केवल व्यक्तिगत ठोस दृष्टि नहीं रखना चाहता, बल्कि संपूर्ण मानवता के दुःख का समवेदनात्मक अनुभव करता है। अंततः यह भजन प्रेम और करुणा का प्रतीक है, जो सुनने वालों को ईश्वर की और आकर्षित करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन कई धार्मिक ग्रंथों का आधार मानता है, जिसमें 'भागवत' और 'गिता' जैसे ग्रंथों में भक्तिभाव का महत्व समझाया गया है। वेदों में प्रार्थना का महत्त्व विशेष रूप से उपासना के समय व्याख्यायित किया गया है। जब भक्त एकत्र होकर सामूहिक रूप से प्रार्थना करता है, तो यह न केवल आत्मा को शुद्ध करता है, बल्कि समस्त संसार की भलाई के लिए भी सहायक होता है। इस प्रकार, यह भजन न केवल व्यक्तिगत दुखों का हल प्रस्तुत करता है, बल्कि विश्व स्तर पर करुणा और प्रेम का संदेश फैलाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप मानसिक शांति प्रदान करता है, जिससे मन की चिंता और विषाद कम हो जाते हैं। प्रार्थना करने से आत्मबल में वृद्धि होती है, और पता चलता है कि कठिनाइयों में भी धैर्य बनाये रखना संभव है। उसके साथ ही, आध्यात्मिक लाभों के साथ, यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना सबसे उचित है। पूजा के दौरान एक दीया जलाना, फूल चढ़ाना, और अगरबत्ती लगाना बेहतर रहता है। भजन का जप करते समय, ध्यान लगाकर शांत मन से ईश्वर के प्रेम का अनुभव करना चाहिए। एकांत स्थान में बैठकर, ध्यान केन्द्रित कर इस भजन का पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का अर्थ केवल व्यक्तिगत दुखों तक सीमित है?

नहीं, इस भजन का अर्थ सामूहिक दुखों की समाप्ति है। यह सभी की पीड़ा को दूर करने की प्रार्थना है, जिसमें सृष्टि की जिजीविषा देखी जाती है।

इस भजन का जप कब करें?

इस भजन का जप सुबह या शाम को करना उत्तम है। यह समय मानसिक शांति के लिए सटीक रहता है, जब मन उत्तेजित न हो।

भजन का जाप करने के दौरान कौन-सी सामग्री का उपयोग करना चाहिए?

भजन के दौरान सिद्ध पेड़ के पत्ते, साफ जल, फूल और अगरबत्ती का उपयोग करना चाहिए। यह संकल्प और आस्था को बढ़ाने में मदद करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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