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मुझे शिव से नही शिव में मिलना है लिरिक्स (Mujhe Shiv Se Nahi Shiv Mein Milna Hai Lyrics in Hindi) - Hansraj Raghuwanshi Shiv Bhajan - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव में मिलन: आत्मज्ञान का मार्ग

इस भजन के माध्यम से भगवान शिव में सच्चा मिलन और आत्मा के मौन का अनुभव करें।

मुझे शिव से नही शिव में मिलना है लिरिक्स (Mujhe Shiv Se Nahi Shiv Mein Milna Hai Lyrics in Hindi) - कितना रोकु मन्न के शोर कोये कहा रुकता है इस शोर से परे उस मौन से मिलना है मुझे शिव से भी नही शिव में मिलना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है अपने अहम् की अहुति दे जलना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है क्यू मुझे किसी और के कष्टों का कारन बन्ना है चाँद और सीष सुशोभित उस चाँद सा शीतल बन्ना है उस चाँद सा शीतल बन्ना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है जितना मैं भटकाउतना मैला हो आया हूँ कुछ ने है छला मोहे कुछ को मै छल आया हूँ कुछ को मै छल आया हूँ मुझे शिव से नही शिव में मिलना है मुझे शिव से नही शिव में मिलना है

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय आत्मा की परम शांति और शिव के अद्वितीय स्वरूप में विलीन होना है। 'मुझे शिव से नही शिव में मिलना है' का अर्थ है कि भक्त केवल शिव की उपासना नहीं करना चाहता, बल्कि वह स्वयं शिव के अनुभव में होना चाहता है। इस में यह संदेश निहित है कि भक्ति का उच्चतम रूप तब होता है जब हम अपने अहंकार को छोड़कर अपने भीतर के शिव का अनुभव करते हैं। भजन में यह भी कहा गया है कि मन के शोर को रोकते हुए साधक उस मौन की स्थिति में प्रवेश करना चाहता है जहाँ उसे आत्मा की वास्तविकता का अनुभव हो। इस दृष्टिकोण से, भजन साधक को योग और ध्यान के प्रति प्रेरित करता है, जिससे वह शिव की उपासना में पूर्णता प्राप्त कर सके।

इस भजन में भावनाओं की गहराई का अनुभव होता है, जहाँ भक्त स्वयं को अनेक परिस्थितियों में उलझा हुआ पा रहा है। 'जितना मैं भटका उतना मैला हो आया हूँ' यह पंक्ति दर्शाती है कि हमारे जीवन में अनेक बार मायाजाल में फंसकर हम अपने असली स्वरूप से दूर हो जाते हैं। यहाँ पर यह संकेत मिलता है कि सब कुछ छोडकर, केवल आत्म-ज्ञान की खोज में निकलना है। यह भजन न केवल भगवान शिव की आराधना करता है, बल्कि भक्त के अंतर की गहराई में जाकर उसकी कमी, संघर्ष और अंतर्विरोध को भी उजागर करता है। अद्वितीयता का संदेश है कि सुख-दुख दोनों से परे जाकर, हमें उस मौन शिवत्व में मिलना है जहाँ सच्ची शांति और संतोष मन में स्थायी होता है।

इस भजन के माध्यम से शिव का वास्तविक रूप और वह अद्वितीय अनुभव जो भक्त को प्रदान करता है, उसकी गहराई में उतरना संभव होता है। शिव को केवल एक देवता के रूप में नहीं, बल्कि सर्वोच्च चेतना और वास्तविकता के रूप में समझा जाता है। यह भक्ति मार्ग का संकेत है कि कैसे भक्ति और ध्यान के द्वारा हम अपने अंदर के शिव को पा सकते हैं और अपने अहंकार की आहुति देकर आत्मवत की अवस्था में पहुँच सकते हैं। 'मुझे किसी और के कष्टों का कारण नहीं बनना' यह बताता है कि साधक को अन्य लोगों की समस्याओं से अपने को दूर रखते हुए, अपनी आत्मा के उत्थान के लिए प्रयास करना चाहिए। भजन शिव को पहचानने का मार्ग है, जहां भक्ति, प्रेम और ध्यान मिलते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक महत्व शास्त्रों और पुराणों से प्रकट होता है जहाँ भगवान शिव को त्रिदेवों में सर्वोच्च माना गया है। शिव का अस्तित्व केवल सृष्टि के विनाशक के रूप में नहीं, बल्कि सृष्टि के रक्षक और संतुलन के रूप में भी है। महाभारत और पुराणों में शिव को ध्यान एवं साधना का प्रेरक बताया गया है। इस भजन के माध्यम से दर्शाया गया है कि भक्तों को शिव के दिव्य स्वरूप में तल्लीन होना चाहिए, जिससे वे अपने जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकें। शिव का अकार स्वरूप जहाँ साकार और निराकार दोनों रूपों में बंधा हुआ है, वह भक्त को शिवत्व की हर अवस्था का अनुभव कराता है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति, और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार देखने को मिलता है। भक्तों को ध्यान करने से तात्क्षणिक संतोष और दुःख से राहत मिलती है। जब भक्त शिव का स्मरण करता है, तो उसे सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो उसकी आध्यात्मिक यात्रा को सशक्त करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना अधिक फलदायक होता है। भक्त को चाहिए कि वे एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यान लगाएं, दीप जलाएं और धूप तिलक करें। मन को स्थिर रखते हुए, प्रेम और श्रद्धा के साथ भजन का पाठ करें और शिव के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करें। इसका पुनरुत्थान आपके मानसिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य भक्त को शिव में विलीन होना और अपनी आत्मा को पहचानने की प्रेरणा देना है। यह दर्शाता है कि भक्ति का सबसे ऊँचा स्तर तब होता है जब हम अपने अहंकार को छोड़ देते हैं।

भजन को कैसे और कब गाना चाहिए?

इस भजन को सुबह या शाम के समय, एक शांत स्थान पर धूप और दीप के साथ गाना चाहिए। ध्यान लगाते हुए और श्रद्धा पूर्वक गाना अधिक लाभकारी होता है।

क्या यह भजन मानसिक शांति में सहायक है?

जी हाँ, इस भजन का जाप मानसिक शांति और आंतरिक संतोष का अनुभव कराने में बहुत सहायक है। यह साधक को शिव की अनुभूति में भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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