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भक्ति रस काव्य व भजन

शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना लिरिक्स (Shambhu Re o Shambhu Re Tera Na Jana Lyrics in Hindi) - By Hansraj Raghuwanshi Bhushan Kumar Shiv Bhajan - Bhaktilok

53 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव की अनंत महिमा: शंभू की पहचान

शिव भक्ति में डूबकर यह भजन गाए, शंभू की अद्वितीय कृपा का अनुभव करें।

शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना वेदों की महिमा शंभू जाने वेदों की महिमा शंभू जाने शंभू की महिमा वेद भी ना जाने शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना। लंका मे लंकेश बिठाया खुद बैठा तू जोगी बनके हो हो.. लंका मे लंकेश बिठाया खुद बैठा तू जोगी बनके सबको तूने राजा बनाय खुद बैठा तू साधु बनके साधु रे ओ साधु रे तेरा भेद ना जाना वेदों की महिमा साधु जाने साधु की महिमा वेद भी ना जाने शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना। देव असुर को अमृत देकर खुद पीवे तू विष का प्याला हो हो.. देव असुर को अमृत देकर खुद पीवे तू विष का प्याला तुझ जैसा ना कोई भयंकर ना कोई है भोला भाला भोले रे ओ भोले रे तेरा वेद ना जाना भोले की महिमा भोला जाने भोले की महिमा जाने ना कोई शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना ||

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त शंभू, अर्थात् भगवान शिव की अनंत महिमा का बखान कर रहे हैं। "शंभू रे ओ शंभू रे तेरा भेद ना जाना" पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भक्त यह स्वीकार कर रहा है कि भगवान शिव की अद्वितीयता और गहराई को जानने में सक्षम नहीं है। हालांकि भक्ति और ज्ञान के माध्यम से भक्तों को भगवान की कृपा प्राप्त होती है। यह भी बताया गया है कि वेद और शास्त्र भी भगवान शिव के स्वरूप और महिमा को पूर्ण रूप से नहीं समझ पाते। इस भजन में लंका के प्रसंग का उल्लेख भी है, जहाँ भगवान शिव लंकेश के रूप में विद्यमान हैं। यह दर्शाता है कि शिव सभी व्यवस्थाओं का पालन करते हैं और उन्हें अपने साधक के उद्धार के लिए राजा और साधु की भूमिका में भी प्रकट होना पड़ता है।

इस भजन में भक्त की भावनाएँ अत्यंत गहन हैं। वह शंभू को भोला भाला, और शक्तिशाली के रूप में स्वीकार करता है। "तुझ जैसा ना कोई भयंकर" यह पंक्ति भगवान शिव की विशेषताएँ बताती है, जहाँ वे विषपान कर भी जगत की रक्षा करते हैं। यह दर्शाता है कि भगवान अपने भक्तों के लिए कितना समर्पित हैं, जबकि मनुष्यों का स्वार्थ उन पर आक्षेप डालता है। भक्त शिव की महानता पर चर्चा करते हुए यह महसूस करता है कि इस दिव्य शक्ति को जानना महज एक साधारण कार्य नहीं है, बल्कि इस पर ध्यान लगाना, साधना करना और श्रद्धा के साथ उन्हें मनाना आवश्यक है। भक्त का यह भाव दर्शाता है कि हालांकि वेद और ग्रंथ शिव की जानकारी को नहीं जान पाते, फिर भी शंकर की कृपा पर विश्वास रखा जाना चाहिए।

भगवान शिव की महिमा का सम्बोधन सिर्फ साधारण रूप से नहीं किया जा सकता। उनके चरित्र में भक्ति मार्ग का गहन तत्व देखने को मिलता है। इस भजन में शिव की भक्ति न केवल व्यक्तिगत मोड़ पर है, बल्कि वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त एक प्रणाली का प्रतीक हैं। यह भक्ति मार्ग केवल भक्ति करने का नहीं, बल्कि भगवान की महिमा का ध्यान करने का भी है। भक्ति का यह पाठ हमें शिव के अद्वितीय स्वरूप के प्रति और निकट लाता है। अद्वितीय अथवा

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय पंथ में शिव की अद्वितीयता और गहराई को समझने में है। यह रूमी के उपदेशों के समान है, जिसमें भक्ति और ज्ञान का संतुलन प्रदर्शित किया जाता है। शंकर के विषपान और भूला रूप का महत्व रामायण में भी मिलता है, जहाँ उन्होंने देव-दानव के बीच संतुलन स्थापित किया। यह शिव की लीला और उसके कृत्रिम सृजन के प्रतीक हैं, जिन्हें समझना हर भक्त के लिए आवश्यक होता है। विविध पुराणों में भी शिव की महिमा का बखान है, विशेष रूप से श्वेताश्वतरोपनिषद और यजुर्वेद में।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है। नियमित रूप से भजन गाने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है। यह भक्ति व्यक्तित्व में सकारात्मकता लाती है और व्यक्ति को जीवन के संघर्षों में संतुलित रहने में सहायता करती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन सुबह या संध्या के समय गाना उत्तम माना जाता है। विधिपूर्वक एक स्थान पर बैठकर, प्रकाशयंत्र जैसे दीया जलाकर, शिव प्रतिमा या चित्र के सामने इस भजन का पाठ करें। यह स्थिति मानसिक ध्यान को डालेगी और शिव की कृपा को आकर्षित करेगी। मन में श्रद्धा और भक्ति रखकर भजन का उच्चारण करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मूल संदेश क्या है?

इस भजन का मूल संदेश भगवान शिव की अद्वितीयता और उनकी कृपा का अनुभव है। भक्त स्वीकारता है कि शिव का भेद जानना संभव नहीं है, फिर भी उनका ध्यान करना आवश्यक है।

भजन में देव-दानव का उल्लेख क्यों किया गया है?

भजन में देव-दानव के मिथक का उल्लेख भगवान शिव की शक्तियों और उनकी भूमिका की महत्वपूर्णता को दर्शाने के लिए किया गया है। शिव ने विष का पान कर जगत की रक्षा की, जो उनके बलिदान का प्रतीक है।

इस भजन का जाप करने के लाभ क्या हैं?

इस भजन का जाप मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए लाभदायक है। यह व्यक्ति को शिव की कृपा के साथ-साथ आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 18 Aug 2026

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