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शिवजी बिहाने चले पालकी सजाई के लिरिक्स (Shivji Bihane Chale Palaki Sajai Ke Lyrics in Hindi) - Shiv Bhajan Jaya Kishori - Bhaktilok

86 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव का बारात: राधा रानी का भव्य विवाह

भक्ति का अहसास कराते हुए, शिव के इस भजन का गान करें और धन्यता का अनुभव करें।

शिवजी बिहाने चले पालकी सजाई के भभूति रमाय के हो राम संग संग बाराती चलेढोलवा बजाय के घोडा दौडाई के हो राम विष्णु जी और लक्ष्मी जी तो गरुड़ के ऊपर चढ़ आये दाड़ी वाले ब्रम्हा जी तोहंस सवारी ले आये बड़ी शान से इन्द्र आयेएरावत लेके हाथीभैसे पे यमराज विराजे और यमदूत सभी साथी मस्ती में हरी गुण गाते नारद जी खुशी मनाते शंकर के बने बाराती विणा बजायी के चारो को सजाई के हो राम शिवजी बिहाने चले पालकी सजाई के भभूति रमाय के हो राम मस्तक पर है त्रिलोचन और दूध सा चन्द्र विराज रहा डमडम डमरू बाज रहा और त्रिशूल हाथ में साज रहा भोले बाबा को पहनायेनर मुंडो कि नित माला बाघम्बर के खाल ओढ़ाये और कंधे पर मृग छालागंगा कि धारा बहती कल कल कल कल कहती बुरी नजर से इनको रखना बचायी के हो राम शिवजी बिहाने चले पालकी सजाई के भभूति रमाय के हो राम

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में शिवजी के विवाह का भव्य वर्णन किया गया है, जहाँ बारात सजाई गई है। पहले पद में यह दर्शाया गया है कि शिवजी अपनी पालकी सजाए चल रहे हैं और उनके साथ बाराती भी हैं। जैसे जैसे विवाह का उत्सव आगे बढ़ता है, विभिन्न देवता जैसे विष्णु, लक्ष्मी, ब्रह्मा, और इंद्र भी इस उत्सव में शामिल होते हैं। इन्हें देखकर भक्तों का हृदय आनंदित हो जाता है। भगवान का दिव्य स्वरूप, त्रिशूल और डमरू साथ में उनका काजल से सजाया हुआ मस्तक, भक्तों के मन में भक्ति को और बढ़ाता है। भक्ति की भावना में डूबे भक्त गाते हैं कि शिवजी बिहाने चले हैं, यह एक अद्भुत दृश्य है, जहाँ सारा ब्रह्माण्ड भगवान के विवाह में शामिल है।

भजन का भावार्थ यह है कि शिव भगवंत का विवाह न केवल एक व्यक्तिगत प्रसंग है, बल्कि यह एक ब्रह्मांडीय उत्सव है जहाँ सभी देवता, संत, और भक्त शामिल होते हैं। भव्यता और धूमधाम से सजाई गई बारात एक सामूहिक भक्ति के प्रतीक के रूप में प्रकट होती है। सब लोग आकर शिव की महिमा गाते हैं, और इस पवित्र अवसर के प्रति उनकी श्रद्धा प्रगाढ़ होती है। जब नारद जी जैसे भक्त खुशी मनाते हैं, तो यह सभी भक्तों में सुख और प्रेम फैलाता है। यह भजन सुनकर भक्तों का मन प्रसन्नता से भरा होता है और उनकी भक्ति और अधिक दृढ़ होती है।

इस भजन का मुख्य theological पहलू भक्ति मार्ग का अनुसरण और शिव के प्रति पूर्ण समर्पण है। शिव को त्रिलोचन कहा गया है, जिसका तात्पर्य है 'तीनों विश्वों का स्वामी'। यह दर्शाता है कि शिवजी का विवाह केवल एक शारीरिक विधान नहीं है, बल्कि यह आत्मा के उच्चतम स्तर पर प्रेम का वैश्विक भाव है। भक्तों को यह भजन सुनाते समय यह अनुभव होता है कि वे शिव के करीबी बन गए हैं और उनका भाग्य पूरे ब्रह्माण्ड के साथ ही जुड़ गया है। यह भक्ति का मार्ग स्वयं को समर्पित करने, प्यार और श्रद्धा से भरा हुआ है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव का विवाह इस भजन का मुख्य तत्व है, जो न केवल भक्तों को भक्ति के उच्चतम भाव में ले जाता है, बल्कि यह पौराणिक कथाओं से भी जुड़ा है। शिव-पार्वती का विवाह महाभारत, रामायण और पुराणों में उल्लेखित है, जहां यह बताया गया है कि शिव और पार्वती का संबंध प्रेम, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। इस भजन में शिव की विभिन्न विशेषताओं को दर्शाते हुए, भक्तों को एकत्रित किया गया है, जो उनके प्रेम और समर्पण के अनूठे उदाहरण हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का गान करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वह एकाग्रता के साथ अपनी समस्याओं का सामना करने में सक्षम होता है। यह भक्ति साधना शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर भी मददगार सिद्ध होती है, जिससे आत्मिक तथा शारीरिक दोनों स्तरों पर बल मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिवजी बिहाने चले पालकी सजाई के भजन का पाठ सुबह और शाम सबसे उचित होता है। पूजा स्थल को साफ करके वहां एक दिया जलाएं और भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति के सम्मुख बैठें। सही मुद्रा में बैठकर, मन को शांत करके भजन का गान करें। ध्यान रखें कि गाते समय आपका मन पूर्णतया भगवान के प्रति समर्पित हो जाए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या इस भजन का विशेष महत्व है?

हाँ, इस भजन का विशेष महत्व है क्योंकि यह भगवान शिव के विवाह के पावन उत्सव को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। यह भक्ति के भाव को जागृत करता है और भक्तों के साथ उनके बंधन को मजबूत करता है।

कितनी बार इस भजन का पाठ करना चाहिए?

इस भजन का पाठ प्रतिदिन कम से कम एक बार करना चाहिए, विशेषकर मंगलवार और सोमवार को, जो शिव के पूजा का विशेष दिन माना जाता है।

क्या इस भजन का गान सुनने के कोई विशेष लाभ हैं?

इस भजन का गान सुनने से मन को शांति मिलती है और भक्ति भाव प्रगाढ़ होता है। यह भक्तों को शिव के प्रति अधिक प्रेम और सम्मान की भावना पैदा करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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