मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) -
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।
दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) - Part 1
मंगलमयी भय मोचिनी दुर्गा सुख की खानजिसके चरणों की सुधा स्वयं पिये भगवानदुःखनाशक संजीवनी नवदुर्गा का पाठजिससे बनता भिक्षुक भी दुनिया का सम्राटअम्बा दिव्या स्वरूपिणी का ऐसो प्रकाशपृथ्वी जिससे ज्योतिर्मय उज्जव्वल है आकाशदुर्गा परम सनातनी जग की सृजनहारआदि भवानी महादेवी सृष्टि का आधारजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँसदमार्ग प्रदर्शनी न्यान का ये उपदेशमन से करता जो मनन उसके कटे कलेशजो भी विपत्ति काल में करे दुर्गा जापपूर्ण हो मनोकामना भागे दुःख संतापउत्पन्न करता विश्व की शक्ति अपरम्पारइसका अर्चन जो करे भव से उतरे पारदुर्गा शोकविनाशिनी ममता का है रूपसती साध्वी सतवंती सुख की कला अनूपजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँविष्णु ब्रह्मा रूद्र भी दुर्गा के है अधीनबुद्धि विद्या वरदानी सर्वसिद्धि प्रवीणलाख चौरासी योनियां से ये मुक्ति देमहामाया जगदम्बिके जब भी दया करेदुर्गा दुर्गति नाशिनी सिंघवाहिनी सुखकारवेदमाता ये गायत्री सबकी पालनहारसदा सुरक्षित वो जन है जिस पर माँ का हाथविकट डगरिया पे उसकी कभी ना बिगड़े बातजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँमहागौरी वरदायिनी मैया दुःख निदानशिवदूती ब्रह्मचारिणी करती जग कल्याणसंकटहरणी भगवती की तू माला फेरचिंता सकल मिटाएगी घडी लगे ना देरपारस चरणन दुर्गा के जग जग माथा टेकसोना लोहे को करे अद्भुत कौतक देखभवतारक परमेश्वरि लीला करे अनंतइसके वंदन भजन से पापो का हो अंतजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँजय जय दुर्गे माँ जय जय दुर्गे माँ
दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) - Part 2
दुर्गा माँ दुःख हरने वालीमंगल मंगल करने वालीभय के सर्प को मारने वालीभवनिधि से जग तारने वालीअत्याचार पाखंड की दमिनीवेद पुराणों की ये जननीदैत्य भी अभिमान के मारेदीन हीन के काज संवारेसर्वकलाओं की ये मालिकशरणागत धनहीन की पालकइच्छित वर प्रदान है करतीहर मुश्किल आसान है करतीभ्रामरी हो हर भ्रम मिटावेकण-कण भीतर कजा दिखावेकरे असम्भव को ये सम्भवधन धान्य और देती वैभवमहासिद्धि महायोगिनी मातामहिषासुर की मर्दिनी मातापूरी करे हर मन की आशाजग है इसका खेल तमाशाजय दुर्गा जय-जय दमयंतीजीवन-दायिनी ये ही जयन्तीये ही सावित्री ये कौमारीमहाविद्या ये पर उपकारीसिद्ध मनोरथ सबके करतीभक्त जनों के संकट हरतीविष को अमृत करती पल मेंयही तारती पत्थर जल मेंइसकी करुणा जब है होतीमाटी का कण बनता मोतीपतझड़ में ये फूल खिलावेअंधियारे में जोत जलावेवेदों में वर्णित महिमा इसकीऐसी शोभा और है किसकीये नारायणी ये ही ज्वालाजपिए इसके नाम की मालाये ही है सुखेश्वरी माताइसका वंदन करे विधातापग-पंकज की धूलि चंदनइसका देव करे अभिनंदनजगदम्बा जगदीश्वरी दुर्गा दयानिधानइसकी करुणा से बने निर्धन भी धनवानछिन्नमस्ता जब रंग दिखावेभाग्यहीन के भाग्य जगावेसिद्धि दात्री आदि भवानीइसको सेवत है ब्रह्मज्ञानीशैल-सुता माँ शक्तिशालाइसका हर एक खेल निरालाजिस पर होवे अनुग्रह इसकाकभी अमंगल हो ना उसकाइसकी दया के पंख लगाकरअम्बर छूते है कई जाकरराय को ये ही पर्वत करतीगागर में है सागर भरतीइसके कब्जे जग का सब हैशक्ति के बिना शिव भी शव हैशक्ति ही है शिव की मायाशक्ति ने ब्रह्मांड रचायाइस शक्ति का साधक बननानिष्ठावान उपासक बननाकुष्मांडा भी नाम इसकाकण-कण में है धाम इसकादुर्गा माँ प्रकाश स्वरूपाजप-तप ज्ञान तपस्या रूपामन में ज्योत जला लो इसकीसाची लगन लगा लो इसकीकालरात्रि ये महामायाश्रीधर के सिर इसकी छायाइसकी ममता पावन झुलाइसको ध्यानु भक्त ना भुलाइसका चिंतन चिंता हरताभक्तो के भंडार है भरतासाँसों का सुरमंडल छेड़ोनवदुर्गा से मुंह न मोड़ोचन्द्रघंटा कात्यानीमहादयालू महाशिवानीइसकी भक्ति कष्ट निवारेभवसिंधु से पार उतारेअगम अनंत अगोचर मैयाशीतल मधुकर इसकी छैयासृष्टि का है मूल भवानीइसे कभी न भूलो प्राणीदुर्गा माँ प्रकाश स्वरूपाजप तप ज्ञान तपस्या रूपामन में ज्योत जला लो इसकीसाची लगन लगा लो इसकीदुर्गा की कर साधना मन में रख विश्वासजो मांगोगे पाओगे क्या नहीं मेरी माँ के पासखड्ग-धारिणी हो जब आईकाल रूप महा-काली कहाईशुम्भ निशुम्भ को मार गिरायादेवों को भय-मुक्त बनायाअग्निशिखा से हुई सुशोभितसूरज की भाँती प्रकाशितयुद्ध-भूमि में कला दिखाईदानव बोले त्राहि-त्राहिकरे जो इसका जाप निरंतरचले ना उस पर टोना मंत्रशुभ-अशुभ सब इसकी मायाकिसी ने इसका पार ना पायाइसकी भक्ति जाए ना निष्फलमुश्किल को ये डाले मुश्किलकष्टों को हर लेने वालीअभयदान वर देने वालीधन लक्ष्मी हो जब आतीकंगाली है मुंह छुपातीचारों और छाए खुशाहलीनजर ना आये फिर बदहालीकल्पतरु है महिमा इसकीकैसे करू मै उपमा इसकीफल दायिनी है भक्ति जिसकीसबसे न्यारी शक्ति उसकीअन्नपूर्णा अन्न-धनं को देतीसुख के लाखों साधन देतीप्रजा-पालक इसे ध्यातेनर-नारायण भी गुण गातेचम्पाकली सी छवि मनोहरइसकी दया से धर्म धरोहरत्रिभुवन की स्वामिनी ये हैयोगमाया गजदामिनी ये हैरक्तदन्ता भी इसे है कहतेचोर निशाचर दानव डरतेजब ये अमृत-रस बरसावेमृत्युलोक का भय ना आवेकाल के बंधन तोड़े पल मेंसांस की डोरी जोड़े पल मेंये शाकम्भरी माँ सुखदायीजहां पुकारू वहां सहाईविंध्यवासिनी नाम सेकरे जो निशदिन यादउसे ग्रह में गूंजता हर्ष का सुरमय नादये चामुण्डा चण्ड-मुण्ड घातीनिर्धन के सिर ताज सजातीचरण-शरण में जो कोई जाएविपदा उसके निकट ना आयेचिंतपूर्णी चिंता है हरतीअन्न-धनं के भंडारे भरतीआदि-अनादि विधि विधानाइसकी मुट्ठी में है जमानारोली कुम -कुम चन्दन टीकाजिसके सम्मुख सूरज फीकाऋतुराज भी इसका चाकरकरे आराधना पुष्प चढ़ाकरइंद्र देवता भवन धुलावेनारद वीणा यहाँ बजावेतीन लोक में इसकी पूजामाँ के सम न कोई भी दूजाये ही वैष्णो आदिकुमारीभक्तन की पत राखनहारीभैरव का वध करने वालीखण्डा हाथ पकड़ने वालीये करुणा का न्यारा मोतीरूप अनेकों एक है ज्योतिमाँ वज्रेश्वरी कांगड़ा वालीखाली जाए ना कोई सवालीये नरसिंही ये वाराहीनेहमत देती ये मनचाहीसुख समृद्धि दान है करतीसबका ये कल्याण है करतीमयूर कही है वाहन इसकाकरते ऋषि आहवान इसकामीठी है ये सुगंध पवन मेंइसकी मूरत राखो मन मेंनैना देवी रंग इसी कापतितपावन अंग इसी काभक्तो के दुःख लेती ये हैनैनो को सुख देती ये हैनैनन में जो इसे बसातेबिन मांगे ही सब कुछ पातेशक्ति का ये सागर गहरादे बजरंगी द्वार पे पहराइसके रूप अनूप की समता करे ना कोयपूजे चरण-सरोज जो तन मन शीतल होयकालीका रूप में लीला करतीसभी बलाएं इससे डरतीकही पे है ये शांत स्वरूपाअनुपम देवी अति अनूपाअर्चना करना एकाग्र मन सेरोग हरे धनवंतरी बन केचरणपादुका मस्तक धर लोनिष्ठा लगन से सेवा कर लोमनन करे जो मनसा माँ कागौरव उत्तम पाय जवाकामन से मनसा-मनसा जपनापूरा होगा हर इक सपनाज्वाला-मुखी का दर्शन कीजोभय से मुक्ति का वर लीजोज्योति यहाँ अखण्ड हो जलतीजो है अमावस पूनम करतीश्रद्धा-भाव को कम ना करनादुःख में हंसना गम ना करनाघट-घट की माँ जाननहारीहर लेती सब पीड़ा तुम्हारीबगलामुखी के द्वारे जानामनवांछित ही वैभव पानाउसी की माया हंसना रोनाउससे बेमुख कभी ना होनाशीतल-शीतल रस की धाराकर देगी कल्याण तुम्हाराधुनी वहां पे रमाये रखनामन से अलख जगाये रखनाभजन करो कामाख्या जी काधाम है जो माँ पार्वती कासिद्ध माता सिद्धेश्वरी हैराजरानी राजेश्वरी हैधूप दीप से उसे मनानाश्यामा गौरी रटते जानाउकिनी देवी को जिसने आराधादूर हुई हर पथ की बाधानंदा देवी माँ जो ध्याओगेसच्चा आनंद वही पाओगेकौशिकी माता जी का द्वारादेगा तुझको सदा सहाराहरसिद्धि के ध्यान में जाओंगे जब खोसिद्ध मनोरथ सब तुम्हरे पल में जायेंगे होमहालक्ष्मी को पूजते रहियोधन सम्पत्ति पाते ही रहिओघर में सच्चा सुख बरसेगाभोजन को ना कोई तरसेगाजिव्ह्दानी करते जो चिंतनछुट जायेंगे यम के बंधनमहाविद्या की करना सेवाज्ञान ध्यान का पाओगे मेवाअर्बुदा माँ का द्वार निरालापल में खोले भाग्य का तालासुमिरन उसका फलदायककठिन समय में होए सहायकत्रिपुर-मालिनी नाम है न्याराचमकाए तकदीर का तारादेविकानाभ में जाकर देखोस्वर्ग-धाम वो माँ का देखोपाप सारे धोती पल मेंकाया कुंदन होती पल मेंसिंह चढ़ी माँ अम्बा देखोशारदा माँ जगदम्बा देखोलक्ष्मी का वहां प्रिय वासापूरी होती सब की आशाचंडी माँ की ज्योत जगानासच्चा सेवी समझ वहां जानादुर्गा भवानी के दर जाकेआस्था से एक चुनर चढ़ा केजग की खुशियाँ पा जाओगेशहंशाह बनकर आ जाओगेवहां पे कोई फेर नहीं हैदेर तो है अंधेर नहीं हैकैला देवी करौली वालीजिसने सबकी चिंता टालीलीला माँ की अपरम्पाराकरके ही विशवास तुम्हाराकरणी माँ की अदभुत करणीमहिमा उसकी जाए ना वरणीभूलो ना कभी चौथ की माताजहाँ पे कारज सिद्ध हो जाताभूखो को जहाँ भोजन मिलताहाल वो जाने सबके दिल कासप्तश्रंगी मैया की साधना कर दिन रैनकोष भरेंगे रत्नों से पुलकित होंगे नैनमंगलमयी सुख धाम है दुर्गाकष्ट निवारण नाम है दुर्गासुख्दरूप भव तरिणी मैयाहिंगलाज भयहारिणी मैयारमा उमा माँ शक्तिशालादैत्य दलन को भई विकरालाअंत:करण में इसे बसालोमन को मंदिर रूप बनालोरोग शोक बाहर कर देतीआंच कभी ना आने देतीरत्न जड़ित ये भूषण धारीदेवता इसके सदा आभारीधरती से ये अम्बर तक हैमहिमा सात समंदर तक हैचींटी हाथी सबको पालेचमत्कार है बड़े निरालेमृत संजीवनी विध्यावालीमहायोगिनी ये महाकालीसाधक की है साधना ये हीजपयोगी आराधना ये हीकरुणा की जब नजर घुमावेकीर्तिमान धनवान बनावेतारा माँ जग तारने वालीलाचारों की करे रखवालीकही बनी ये आशापुरनीआश्रय दाती माँ जगजननीये ही है विन्धेश्वारी मैयाहै वो जगभुवनेश्वरी मैयाइसे ही कहते देवी स्वाहासाधक को दे फल मनचाहाकमलनयन सुरसुन्दरी माताइसको करता नमन विधातावृषभ पर भी करे सवारीरुद्राणी माँ महागुणकारीसर्व संकटो को हर लेतीविजय का विजया वर है देतीयोगकला जप तप की दातीपरमपदों की माँ वरदातीगंगा में है अमृत इसकाआत्म बल है जागृत इसकाअन्तर्मन में अम्बिके रखे जो हर ठौरउसको जग में देवता भावे ना कोई औरपदमावती मुक्तेश्वरी मैयाशरण में ले शरनेश्वरी मैयाआपातकाल रटे जो अम्बाथामे हाथ ना करत विलम्बामंगल मूर्ति महा सुखकारीसंत जनों की है रखवारीधूमावती के पकड़े पग जोवश में करले सारे जग कोदुर्गा भजन महा फलदायीप्रलय काल में होत सहाईभक्ति कवच हो जिसने पहनावार पड़े ना दुःख का सहनामोक्षदायिनी माँ जो सुमिरेजन्म मरण के भव से उबरेरक्षक हो जो क्षीर भवानीचले काल की ना मनमानीजिस ग्रह माँ की ज्योति जागेतिमर वहां से भय से भागेदुखसागर में सुखी जो रहनादुर्गा नाम जपो दिन रैनाअष्ट-सिद्धि नौ निधियों वालीमहादयालु भद्रकालीसपने सब साकार करेगीदुखियों का उद्धार करेगीमंगला माँ का चिंतन कीजोहरसिद्धि ते हर सुख लीजोथामे रहो विश्वास की डोरीपकड़ा देगी अम्बा गौरीभक्तो के मन के अंदररहती है कण-कण के अंदरसूरज चाँद करोड़ो तारेज्योत से ज्योति लेते सारेवो ज्योति है प्राण स्वरूपातेज वही भगवान स्वरूपाजिस ज्योति से आये ज्योतिअंत उसी में जाए ज्योतिज्योति है निर्दोष निरालीज्योति सर्वकलाओं वालीज्योति ही अन्धकार मिटातीज्योति साचा राह दिखातीअम्बा माँ की ज्योति में तू ब्रह्मांड को देखज्योति ही तो खींचती हर मस्तक की रेख
दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) - Part 3
जगदम्बा जगतारिणी जगदाती जगपालइसके चरणन जो हुए उन पर होए दयालमाँ की शीतल छाँव में स्वर्ग सा सुखहोयेजिसकी रक्षा माँ करे मार सके ना कोयकरुणामयी कापालिनी दुर्गा दयानिधानजैसे जिसकी भावना वैसे दे वरदानमाँ श्री महां – शारदे ममता देत अपारहानि बदले लाभ में जब ये हिलावे तारजै जै अंबे माँ जै जगदम्बे माँनश्वर हम खिलौनों की चाबी माँ के हाथजैसे इशारा माँ करे नाचे हम दिन-रातभाग्य लिखे भाग्येश्वरी लेकर कलम-दवातकठपुतली के बस में क्या सब कुछ माँ के हाथपतझड़ दे या दे हमें खुशियों का मधुमासमाँ की मर्जी है जो दे हर सुख उसके पासमाँ करुणा के नाव पर होंगे जो भी सवारबाल भी बांका होए ना वैरी जो हो संसारजै जै अम्बे माँ जै जगदम्बे माँमंगला माँ के भक्त के ग्रह में मंगलाचारकभी अमंगल हो नहीं पवन चले सुखकारशक्ति ही को लो शक्ति मिलती इसके धामकामधेनु के तुल्य है शिवशक्ति का नामजन-जन वृक्ष है एक भला बुरे है लाख बबूलबदी के कांटे छोड़ के चुन नेकी के फूलमाँ के चरण-सरोज की कलियों जैसे सुगंधस्वर्ग में भी ना होगा जो है यहाँ आनंदजै जै माँ जै जगदम्बे माँपाप के काले खेल में सुख ना पावे कोयकोयले की तो खान में सब कुछ काला होयनिकट ना आने दो कभी दुष्कर मोह के लागमानव चोले पर नहीं लगने दे जो दागजै जै माँ जै जगदम्बे माँनवदुर्गा के नाम का मनन करो सुखकारबिन मोल बिन दाम ही करेगी माँ उपकारभव से पार लगाएगी माँ की एक आशीषतभी तो माँ को खोजते श्री हरी जगदीशजै जै अम्बे माँ जै जगदम्बे माँजै जै अम्बे माँ जै जगदम्बे माँजै जै अम्बे माँ जै जगदम्बे माँजै जै अम्बे माँ जै जगदम्बे माँ
दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) - Part 4
विधि- पूर्वक ही जोत जलाकरमाँ-चरणन में ध्यान लगाकरजो जन मन से पूजा करेंगेजीवन-सिन्धु सहज तरेंगेकन्या रूप में जब दे दर्शनश्रद्धा – सुमन कर दीजो अर्पणसर्वशक्ति वो आदिकौमारीजाइये चरणन पे बलिहारीत्रिपुर रूपिणी ज्ञान महिमाभगवती वो वरदान महिमाचंड -मुंड नाशक दिव्या-स्वरूपात्रिशुलधारिणी शंकर रूपाकरे कामाक्षी कामना पूरीदेती सदा माँ सबरस पूरीचंडिका देवी का करो अर्चनसाफ़ रहेगा मन का दर्पणसर्व भूतमयी सर्वव्यापकमाँ की दया के देव याचकस्वर्णमयी है जिसकी आभाकरती नहीं है कोई दिखावाकही वो रोहिणी कही सुभद्रादूर कर्त अज्ञान की निंद्राछल कपट अभिमान की दमिनीनरप सौ भाग्य हर्ष की जननीआश्रय दाति माँ जगदम्बेखप्पर वाली महाबली अम्बेमुंडन की जब पहने मालादानव -दल पर बरसे ज्वालाजो जन उसकी महिमा गातेदुर्गम काज सुगम हो जातेजै विध्या अपराजिता माईजिसकी तपस्या महाफलदाईचेतना बुद्धि श्रधा माँ हैदया शान्ति लज्जा माँ हैसाधन सिद्धि वर है माँ काजहा बुद्धि वो घर है माँ कासप्तशती में दुर्गा दर्शनशतचंडी है उसका चिन्तनपूजा ये सर्वार्थ- साधकभवसिंधु की प्यारी नावकदेवी-कुण्ड के अमृत से तन मन निर्मल होयपावन ममता के रस में पाप जन्म के धोयअष्टभुजा जग मंगल करणीयोगमाया माँ धीरज धरनीजब कोई इसकी स्तुति करताकागा मन हंस बनतामहिष-मर्दिनी नाम है न्यारादेवों को जिसने दिया सहारारक्तबीज को मारा जिसनेमधु-कैटभ को मारा जिसनेधूम्रलोचन का वध कीन्हाअभय-दान देवन को दीन्हाजग में कहाँ विश्राम इसकोबार-बार प्रणाम है इसकोयज्ञ हवन कर जो बुलातेभ्रामरी माँ की शरण में जातेउनकी रखती दुर्गा लाजबन जाते है बिगड़े काजसुख पदार्थ उनको है मिलतेपांचो चोर ना उनको छलतेशुद्ध भाव से गुण गातेचक्रवर्ती है वो कहलातेदुर्गा है हर जन की माताकर्महीन निर्धन की माताइसके लिए कोई गैर नहीं हैइसे किसी से बैर नहीं हैरक्षक सदा भलाई की मैयाशत्रु सिर्फ बुराई की मैयाअनहद ये स्नेहा का सागरकोई नहीं है इसके बराबरदधिमति भी नाम है इसकापतित-पावन धाम है इसकातारा माँ जब कला दिखातीभाग्य के तारे है चमकातीकौशिकी देवी पूजते रहियेहर संकट से जूझते रहियेनैया पार लगाएगी माताभय हरने को आएगी माताअम्बिका नाम धराने वालीसूखे वृक्ष सलाने वालीपारस मणियाँ जिसकी मालादया की देवी माँ कृपालामोक्षदायिनी के द्वारे भक्त खड़े कर जोड़यमदूतो के जाल को घडी में दे जो तोड़भैरवी देवी का करो वंदनग्वालबाल से खिलेगा आँगनझोलियाँ खाली ये भर देतीशक्ति भक्ति का वर देतीविमला मैया ना विसराओभावना का प्रसाद चढाओमाटी को कर देती चंदनदाती माँ ये असुर निकंदनतोड़ेगी जंजाल ये सारेसुख देती तत्काल ये सारेपग-पंकज की धुलि पा लोमाथे उसका तिलक लगा लोहर एक बाधा टल जाएगीभय की डायन जल जाएगीभक्तों से ये दूर नहीं हैदाती है मजबूर नहीं हैउग्र रूप माँ उग्र ताराजिसकी रचना यह जग साराअपनी शक्ति जब दिखलातीउंगली पर संसार नचातीजल थल नील गगन की मालिकअग्नि और पवन की मालिकदशों दिशाओं में यह रहतीसभी कलाओं में यह रहतीइसके रंग में इश्वर रंगाये ही है आकाश की गंगाइन्द्रधनुष है माया इसकीनजर ना आती काया इसकीजड़ भी ये ही चेतन ये हीसाधक ये ही साधन ये हीये महादेवी ये महामायाकिसी ने इसका पार ना पायाजड़ भी ये ही चेतन ये हीसाधक ये ही साधन ये हीये महादेवी ये महामायाकिसी ने इसका पार ना पायाये है अर्पणा ये श्री सुन्दरीचन्द्रभागा ये है सावित्रीनारायणी का रूप यही हैनंदिनी माँ का स्वरूप यही हैजप लो इसके नाम की मालाकृपा करेगी ये कृपालाध्यान में जब तुम खो जाओगेमाँ के प्यारे हो जाओगेइसका साधक कांटो पे फुल समझ कर सोएदुःख भी हंस के झेलता कभी ना विचलित होएसुख-सरिता देवी सर्वानीमंगल-चण्डी शिव शिवानीआस का दीप जलाने वालीप्रेम सुधा बरसाने वालीअम्बा देवी की करो पूजाऐसा मंदिर और ना दूजामनमोहिनी मूरत माँ कीदिव्या ज्योति है सूरत माँ कीललिता ललित-कला की मालकविकलांग और लाचार की पालकअमृत वर्षा जहां भी करतीरत्नों से भंडार है भरतेममता की माँ मीठी लोरीथामे बैठी जग की डोरीदुश्मन सब और गुनी ज्ञानीसुनते माँ की अमृतवाणीसर्व समर्थ सर्वज्ञ भवानीपार्वते ही माँ कल्याणीजै दुर्गे जै नर्मदा माताहर ही घर गुण तेरा गाताये ही उमा मिथिलेश्वरी हैभयहरिणी भक्तेश्वरी हैसेवक झुकते द्वार पे इसकेदौलत दे उपकार ये इसकेमाला धारी ये मृगवाहीसरस्वती माँ ये वाराहीअजर अमर है ये अनंतासकल विश्व की इसको चिंताकन्याकुमारी धाम निरालाधन पदार्थ देने वालादेती ये संतान किसी कोमिल जाते वरदान किसी कोजो श्रद्धा विश्वास से आताकोई क्लेश ना उसे सताताजहाँ ये वर्षा सुख की करतीवहां पे सिद्धिय पानीभरतीविधि विधाता दास है इसकेकरुणा का धन पाते इससेयह जो मानव हँसता रोतामाँ की इच्छा से ही होताश्रद्धा दीप जलाए के जो भी करे अरदासउसकी माँ के द्वार पे पूर्ण हो सब आसकोई कहे इसे महाबली माताजो भी सुमिरे वो फल पातानिर्बल को बल यही से मिलताघडियों में ही भाग्य बदलताअच्छरू माँ के गुण जो गावेपूजा न उसकी निष्फल जावेअच्छरू सब कुछ अच्छा करतीचिंता संकट भय वो हरतीकरुणा का यहाँ अमृत बहतामानव देख चकित है रहताक्या क्या पावन नाम है माँ केमुक्तिदायक धाम है माँ केकही पे माँ जागेश्वरी हैकरुणामयी करुणेश्वरी हैजो जन इसके भजन में जागेउसके घर दर्द है भागेनाम कही है अरासुर अम्बापापनाशिनी माँ जगदम्बाकी जो यहाँ अराधना मन सेझोली भरेगी सबकी धन सेभुत पिशाच का डर न रहेगासुख का झरना सदा बहेगाहर शत्रु पर विजय मिलेगीदुःख की काली रात टलेगीकनकावती करेरी माईसंत जनों की सदा सहाईसच्चे दिल से करे जो पूजनपाये खुदा से मुक्ति दुर्जनहर सिद्धि का जाप जो करताकिसी बला से वो नहीं डरताचिंतन में जब मन खो जाताहर मनोरथ सिद्ध हो जाताकही है माँ का नाम ‘खनारी ‘शान्ति मन को देती न्यारीइच्छापूर्ण करती पल मेंशहद घुला है यहाँ के जल मेंसबको यहाँ सहारा मिलतारोगों से छुटकारा मिलताभला जिसने करते रहनाऐसी माँ का क्या है कहनाक्षीरजा माँ अम्बिके दुःख हरन सुखधामजन्म जन्म के बिगड़े हुए यहाँ पे सिद्ध कामझंडे वाली माँ सुखदातीकांटो को भी फुल बनातीयहाँ भिखारी भी जो आतादानवीर वो है बन जाताबांझो को यहाँ बालक मिलतेइसकी दया से लंगड़े चलतेश्रद्धा भाव प्यार की भूखीममता नदिया कभी न सुखीयहाँ कभी अभिमान ना करनाकंजको का अपमान ना करनाघट-घट की ये जाननहारीइसको सेवत दुनिया सारीभयहरिणी भंडारिका देवीइसको चाहा देवों ने भीचरण -शरण में जो भी आयेवो कंकड़ हीरा बन जाएबुरे ग्रह का दोष मिटातीअच्छे दिनों की आस जगातीकैसा पल दे ये महामाताहो जाती है दूर निराशाउन्निती के ये शिखर चढ़ावेरंको को ये राजा बनावेममता इसकी है वरदानीभूल के भी ना भूलो प्राणीकही पे कुंती बन के बिराजेचारो और ही डंका बाजेसपने में भी जो नहीं सोचायहा पे वो कुछ मिलते देखाकहता कोई समुंद्री माताकृपा समुंद्र का रस है पातादागी चोले यहाँ पर धुलतेबंद नसीबों के दर खुलतेदया समुंद्र की लहराएबिगड़ी कईयों की बन जाएलहरें समुंद्र में है जितनीकरुणा की है नेहमत उतनीजितने ये उपकार है करती है करतीहो नहीं सकती किसी से गिनतीजिसने डोर लगन की बाँधीजग में उत्तम पाये उपाधिसर्व मंगल जगजननी मंगल करे अपारसबकी मंगल – कामना करता इस का द्वारभादवा मैया है अति प्यारीअनुग्रह करती पातकहारीआपतियों का करे निवारणआप कर्ता आप ही कारणझुग्गी में वो मंदिर में वोबाहर भी वो अंदर भी वोवर्षा वो ही बसंत वो हीलीला करे अनंत वो हीदान भी वो ही दानी वो हीप्यास भी वो ही पानी वो हीदया भी वो दयालु वो हीकृपा रूप कृपालु वो हीइक वीरा माँ नाम उसी काधर्म कर्म है काम उसी काएक ज्योति के रूप करोड़ोकिसी रूप से मुंह ना मोड़ोजाने वो किस रूप में आयेजाने कैसा खेल रचाएउसकी लीला वो ही जानेउसको सारी सृष्टि मानेजीवन मृत्यु हाथ में उसकेजादू है हर बात में उसकेवो जाने क्या कब है देनाउसने ही तो सब कुछ है देनाप्यार से मांगो याचक बनकेकी जो विनय उपासक बनकेवो ही नैय्या वो ही खैव्य्यावो रचना है वो ही रचैय्याजिस रंग रखे उस रंग रहियेबुरा भला ना कुछ भी कहियेराखे मारे उसकी मर्जीडोबे तारे उसकी मर्जीजो भी करती अच्छा करतीकाज हमेशा सच्चा करतीवो कर्मन की गति को जानेबुरा भला वो सब पहचानेदामन जब है उसका पकड़ाक्या करना फिर तकदीर से झगड़ामालिक की हर आज्ञा मानोउसमे सदा भला ही जानोशांता माँ की शान्ति मांगू बन के दासखोटा खरा क्या सोचना कर लिया जब विश्वास‘रेणुका माँ’ पावन मंदिरकरता नमन यहाँ पर अम्बरलाचारों की करे रखवालीकोई सवाली जाए न खालीममता चुनरी की छाँव मेंस्वर्ग सी सुंदर है गाँव मेंबिगड़ी किस्मत बनती देखीदुःख की रैना ढलती देखीइस चौखट से लगे जो माथागर्व से ऊचा वो हो जातारसना में रस प्रेम का भरलोबलि-देवी का दर्शन करलोविष को अमृत करेगी मैय्यादुःख संताप हरेगी मैय्याजिन्हें संभाला वो इसे मानेमूढ़ भी बनते यहाँ सयानेदुर्गा नाम की अमृत वाणीनस-नस बीच बसाना प्राणीअम्बा की अनुकम्पा होगीवन का पंछी बनेगा योगीपतित पावन जोत जलेगीजीवन गाडी सहज चलेगीरहेगा न अंधियारा घर मेंवैभव होगा न्यारा घर मेंभक्ति भाव की बहेगी गंगाहोगा आठ पहर सत्संगछल और कपट न छलेगाभक्तों का विश्वास फलेगापुष्प प्रेम के जाएंगे बांटेजल जाएंगे लोभ के कांटेजहाँ पे माँ का होय बसेराहर सुख वहां लगाएगा डेराचलोगे तुम ‘निर्दोष’ डगर पेदृष्टि होती माँ के घर पेपढ़े सुने जो अमृतवाणीउसकी रक्षक आप भवानीअमृत में जो खो जाएगावो भी अमृत हो जायेगाअमृत अमृत में जब मिलताअमृत-मयी है जीवन बनतादुर्गा अमृत वाणी के अमृत भीगे बोलअंत:करण में तू प्राणी इस अमृत को घोल
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "दुर्गा अमृतवाणी (Durga Amritwani Lyrics in Hindi) - Durga Maa Bhajan Durga Amritwani - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
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