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भक्ति रस काव्य व भजन

जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो (Jaldi Jaldi Sawre Bulaya KaroLyrics in Hindi) - Khatu Shyam Bhajan Sunil Sarvottam - BhaktiLok

53 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सर्वेश्वर श्री खाटू श्याम की कृपा

अपने भक्तों को जल्दी बुलाने के लिए श्री खाटू श्याम का यह भजन गाएं और कृपा का अनुभव करें।

जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो आएं हंस के सहारे बुलाया करो जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो कांकर तिलक करूं जयहन की छोड़ दूं इस जंदगी को तुम सोवों समुझे सब कुछ तुम्हें कह दूं.. जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो पार्श्व में जो बसा हो सारा चक्कर पार्श्व में जो बसा हो सारा चक्कर तुम मूर्तियों के हो हंकारो जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो कमल तले आओ सांवरे जो जितनी मेरी जिंदगानी कमल तले आओ सांवरे जो जितनी मेरी जिंदगानी तुम ही हो सब कुछ तुम ही हो सारा चक्कर जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो दिल में बसी हो तुम तुम שלי की छवि दिल में बसी हो तुम तुम שלי की छवि आओ जल्दी से तुम जैन जयो जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो हर गांव में रंग मचाओ सांवरे कोई बात हो घटाओ हर गांव में रंग मचाओ सांवरे कोई बात हो घटाओ तेरा नाम लूं तेरा ही बोलूं जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो तुम बिन सब सूना सब सब रहता इस पथ पे यार मेरा तुम बिन सब सूना सब सब रहता इस पथ पे यार मेरा तेरे नाम का मैं लेता हूं हर बले सुख के संजोग से जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त श्री खाटू श्याम से प्रार्थना करते हैं कि वे जल्दी जल्दी उन्हें बुलाएं। इस अति सरल और मनोहर संदेश के माध्यम से, भक्त अपने ईश्वर से तात्कालिक संपर्क की इच्छा प्रकट करते हैं। 'जल्दी जल्दी सांवरे बुलाया करो' का अर्थ है कि भक्त ईश्वर की कृपा और संरक्षण की तेज़ आवश्यकताओं के बारे में सोचते हैं। जब भक्त कहता है, 'आएं हंस के सहारे बुलाया करो', तो यह उनके हृदय में उत्साह और ख़ुशी का प्रतीक है, जो वे अपने प्रिय ईश्वर का दर्शन करने के लिए अनुभव करते हैं। श्याम के प्रति यह भक्ति भावना उनके जीवन के हर रूप में उनकी उपस्थिति की आकांक्षा करती है।

भजन के भावार्थ में गहराई से देखें तो स्पष्ट होता है कि भक्त श्याम की स्नेहिल और करुणामय छवि को पुकारते हैं। 'कांकर तिलक करूं जयहन की छोड़ दूं इस जंदगी को' के माध्यम से भक्त जीवन की निर्ममता से मुक्ति और ईश्वर संग रहन की चाह रखते हैं। इसके साथ आनंद, आुथेंटिसिटी और दिव्यता का अनुभव भी सामने आता है। उनकी प्रेम और भक्ति के इस अभिव्यक्ति में, कल्याण की भावना है। यह संदेश भक्तों को स्वयं के अंदर दिव्यता की खोज करने के लिए प्रेरित करता है।

इस भजन का शास्त्रार्थ सही भक्ति मार्ग की ओर ले जाता है, जिसमें व्यक्ति ईश्वर के प्रति अपने समर्पण को अनुभव करता है। यहां भक्ति का अर्थ केवल भक्ति करना नहीं है, बल्कि ईश्वर के प्रति निरंतर प्रेम और विश्वास का प्रदर्शन करना है। 'कमल तले आओ सांवरे' की पंक्ति भक्त का यह अनुरोध है कि वे ईश्वर की शरण में आएं और उनकी कृपा से पूरी जीवन यात्रा को सरल बनाएं। सद्गुण और भक्ति का यह संगम दर्शाता है कि भक्ति सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का योगदान भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरा है। श्री खाटू श्याम, जिन्हें भगवान कृष्ण के रूप में पूजा जाता है, अपनी कृपा के लिए ज्ञात हैं, विशेष रूप से भक्तों के प्रति उनकी तात्कालिक मदद। यह भजन, उनकी दयालुता और कृपा का प्रतीक है, जिसका उल्लेख मुख्यतः भक्तिकाल में होता है। खाटू धाम, जो राजस्थान में स्थित है, वहां पर श्री खाटू श्याम का भव्य मंदिर है, जहां भक्त इसे पुकारते हैं, ताकि तुरंत उनके संकट दूर हो सकें।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। यह भजन मानसिक शांति, आंतरिक संतोष, और ईश्वर के प्रति प्रगाढ़ प्रेम को बढ़ाने में अत्यंत सहायक है। इसे गाने या ध्यान करने से भक्त के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो कि सद्गुणों को विकसित करता है। भक्ति में मग्न होना व्यक्ति की नकारात्मक सोच को समाप्त करता है और उसे सच्ची खुशी का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

यह भजन आमतौर पर सुबह या शाम के समय गाना उत्तम माना जाता है। पूजा के समय, एक स्वरूप का दीप जलाना और ताजे फूलों का समर्पण करना शुभ होता है। भक्त को आत्मिक शांति के लिए बैठकर ध्यान और इरादे के साथ भजन गाना चाहिए, जिससे भक्ति का अनुभव गहरा हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भक्त श्री खाटू श्याम से जल्दी अपनी सहायता के लिए प्रार्थना करते हैं। यह ईश्वर के प्रति उनकी अटूट भक्ति और विश्वास को दर्शाता है।

क्या यह भजन विशेष अवसरों पर गाना चाहिए?

यह भजन किसी भी समय गाया जा सकता है, लेकिन इसका श्रवण विशेष रूप से उत्सवों और धार्मिक आयोजनों में अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।

क्या इस भजन से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है?

हां, इस भजन को गाने से सकारात्मकता और आंतरिक शांति मिलने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह तनाव को कम करने और आत्म-सम्मान बढ़ाने में मददगार होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Aug 2026

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