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श्याम चालीसा लिरिक्स (Shyam Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

126 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्याम चालीसा लिरिक्स (Shyam Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

श्याम चालीसा लिरिक्स (Shyam Chalisa Lyrics in Hindi):- 


दोहा


श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।

श्याम चालीसा बणत है, रच चौपाई छंद।।


चौपाई


श्याम-श्याम भजि बारंबारा।

सहज ही हो भवसागर पारा।।


इन सम देव न दूजा कोई।

दिन दयालु न दाता होई।।


भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया।

कही भीम का पौत्र कहलाया।।


यह सब कथा कही कल्पांतर।

तनिक न मानो इसमें अंतर।।


बर्बरीक विष्णु अवतारा।

भक्तन हेतु मनुज तन धारा।।


बासुदेव देवकी प्यारे।

जसुमति मैया नंद दुलारे।।


मधुसूदन गोपाल मुरारी।

वृजकिशोर गोवर्धन धारी।।


सियाराम श्री हरि गोबिंदा।

दिनपाल श्री बाल मुकुंदा।।


दामोदर रण छोड़ बिहारी।

नाथ द्वारिकाधीश खरारी।।


राधाबल्लभ रुक्मणि कंता।

गोपी बल्लभ कंस हनंता।।


मनमोहन चित चोर कहाए।

माखन चोरि-चारि कर खाए।।


मुरलीधर यदुपति घनश्यामा।

कृष्ण पतित पावन अभिरामा।।


मायापति लक्ष्मीपति ईशा।

पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।।


विश्वपति जय भुवन पसारा।

दीनबंधु भक्तन रखवारा।।


प्रभु का भेद न कोई पाया।

शेष महेश थके मुनिराया।।


नारद शारद ऋषि योगिंदरर।

श्याम-श्याम सब रटत निरंतर।।


कवि कोदी करी कनन गिनंता।

नाम अपार अथाह अनंता।।


हर सृष्टी हर सुग में भाई।

ये अवतार भक्त सुखदाई।।


ह्रदय माहि करि देखु विचारा।

श्याम भजे तो हो निस्तारा।।


कौर पढ़ावत गणिका तारी।

भीलनी की भक्ति बलिहारी।।


सती अहिल्या गौतम नारी।

भई श्रापवश शिला दुलारी।।


श्याम चरण रज चित लाई।

पहुंची पति लोक में जाही।।


अजामिल अरु सदन कसाई।

नाम प्रताप परम गति पाई।।


जाके श्याम नाम अधारा।

सुख लहहि दुःख दूर हो सारा।।


श्याम सलोवन है अति सुंदर।

मोर मुकुट सिर तन पीतांबर।।


गले बैजंती माल सुहाई।

छवि अनूप भक्तन मान भाई।।


श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती।

श्याम दुपहरि कर परभाती।।


श्याम सारथी जिस रथ के।

रोड़े दूर होए उस पथ के।।


श्याम भक्त न कही पर हारा।

भीर परि तब श्याम पुकारा।।


रसना श्याम नाम रस पी ले।

जी ले श्याम नाम के ही ले।।


संसारी सुख भोग मिलेगा।

अंत श्याम सुख योग मिलेगा।।


श्याम प्रभु हैं तन के काले।

मन के गोरे भोले-भाले।।


श्याम संत भक्तन हितकारी।

रोग-दोष अध नाशे भारी।।


प्रेम सहित जब नाम पुकारा।

भक्त लगत श्याम को प्यारा।।


खाटू में हैं मथुरावासी।

पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी।।


सुधा तान भरि मुरली बजाई।

चहु दिशि जहां सुनी पाई।।


वृद्ध-बाल जेते नारि नर।

मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर।।


हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई।

खाटू में जहां श्याम कन्हाई।।


जिसने श्याम स्वरूप निहारा।

भव भय से पाया छुटकारा।।


दोहा


श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।

इच्छापूर्ण भक्तों की, करो ना लाओ बार।।


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्याम चालीसा लिरिक्स (Shyam Chalisa Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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