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Punjabi Devi Bhajan

बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी लिरिक्स (Bada Pyara Saja Hai Tera Dwar Bhavani Lyrics in Hindi) - Devi Bhajan - Bhaktilok

77 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति और श्रद्धा का संगम: माता भवानी का द्वार

इस भजन में माता भवानी के प्रति गहरी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त की गई है। यह सुनकर मन में अपार शांति और सुकून का अनुभव होता है।

बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी, नंगे पाँव जो आता, उसका होता है वारी। कर जहाँ तेरा नाम है, ठक ठक गूंजे ताली। बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी। कौशल्या के लाल के सामने किया है ये सजना, धन्यवाद करते सब लोग, सब खुश हैं तेरा जाना। बैठी माँ के संग सभी, सबकी खुशियों का है ठिकाना। बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी। शंकर, पार्वती संग है, जहाँ है सबकी मूरत, तू कर दे सबका उद्धार, केवल तेरा ही है मंत्र। हे भवानी, कर दे दीनों पर अपनी कृपा, बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी। हर मौसम में करे भक्ति, हर दिन तेरा गुण गाए, तेरा नाम जपते सब, जीवन में सुख पाए। हे माँ, तेरा चरणों में, तू सदा सबको सजाए। बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माता भवानी के प्रति प्रेम और भक्ति को व्यक्त करना है। 'बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी' पंक्ति से यह स्पष्ट होता है कि भक्तजन माता के दरवाज़े को स्वर्ग से भी सुंदर मानते हैं। जब कोई नंगे पांव इस पवित्र स्थान पर आता है, तब उसका स्वागत होता है और उसे आशीर्वाद मिलता है। इस बात से यह सन्देश मिलता है कि सच्चे मन से माता के दर पर जाने वाले भक्तों को माता हमेशा सहायता करती हैं। यहाँ पर भक्तों का समर्पण, प्रेम एवं श्रद्धा का भाव प्रस्तुत किया गया है, जो इस भजन की आत्मा है।

भावार्थ की दृष्टि से, भजन में मौसम, खुशी और माता की कृपा का ज़िक्र किया गया है। 'हर मौसम में करे भक्ति' का अर्थ है कि भक्त हर परिस्थिति में अपने आराध्य की पूजा करता है। यहाँ तक कि माता के दर पर सभी भक्त मिलकर उनके गुणगान करते हैं। इस भजन में भक्तों की एकता और सामूहिकता का भाव झलकता है, जो भक्ति के मार्ग को आसान बनाता है। माता के दर पर प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने से जीवन में सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख की प्राप्ति होती है।

इस भजन में जो मुख्य तत्व हैं, वे भक्ति मार्ग की सच्चाई को प्रस्तुत करते हैं। भक्त की अनुशासन, श्रद्धा और समर्पण वैराग्य की भावना से भरा होता है। 'हे माँ, तेरा चरणों में, तू सदा सबको सजाए' यह स्पष्ट करता है कि जब भक्त अपने जीवन को माँ के चरणों में अर्पित करता है, तो सुख-दुख का अनुभव लागू नहीं होता। यह भक्ति मार्ग का सार है, जहाँ भक्त अपने जीवन को पूर्ण रूप से देवी की भक्ति में समर्पित कर देता है। इस प्रकार, भक्ति का यह मार्ग विस्तृत और अपार है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय संस्कृति में देवी पूजा की गहरी जड़ों का प्रतीक है। देवी पूजा का उल्लेख पुराणों, महाभारत और रामायण में मिलता है, जहाँ देवी को माता के रूप में पूजा जाता है। माता भवानी, जो शक्ति, करुणा और ज्ञान का प्रतीक हैं, का आराधन हर युग में होता रहा है। इस भजन के माध्यम से भक्त देवी की अनुकंपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं, जैसे कि देवी भवानी ने अपनी भक्तों को हमेशा रक्षक रूप में समर्थित किया है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का पाठ या साधना करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उत्थान और उज्ज्वल ऊर्जा का अनुभव होता है। यह न केवल भक्त की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि जीवन में स्थिरता, सुकून और कठिनाईयों का सामना करने की शक्ति देता है। नियमित रूप से इसका गायन करने से समस्त नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम को करना लाभकारी है। पूजा स्थल पर एक दीप जलाएँ और माता को पुष्प, फलों या नैवेद्य के माध्यम से श्रद्धा के साथ अर्पण करें। इसे पूर्ण मनोयोग और एकाग्रता के साथ बैठकर गाना चाहिए। पांवों को शीश पर रखकर मानसिक शांति और समर्पणभाव से पाठ करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बड़ा प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी भजन किसका है?

यह भजन माँ भवानी के प्रति भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करने वाला है, जो मुख्यतः शक्ति की देवी के रूप में पूजी जाती हैं।

इस भजन का गान करते समय कौन-कौन से वस्त्र पहनना चाहिए?

भजन गाते समय भक्तों को पवित्र और साधारण वस्त्र पहनना चाहिए, जिससे मन की शुद्धता बनी रहे और भक्ति का भाव विकसित हो सके।

क्या यह भजन किसी विशेष अवसर पर गाया जा सकता है?

यह भजन हर अवसर पर गाया जा सकता है, खासकर नवरात्रि, देवी पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसे गाने से विशेष फल और कृपा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 22 Aug 2026

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