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भक्ति रस काव्य व भजन

भये प्रगट कृपाला दीन दयाला(Bhaye Pragat Kripala Lyrics in hindi) । by Tripti Shakya - Bhaktilok

145 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री राम के बाल स्वरूप की भक्ति

इस भजन से श्री राम के दिव्य स्वरूप की भक्तिपूर्वक स्तुति करें और कृपा की प्राप्ति करें।

भये प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी । हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी । भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी ॥ कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि बिधि करूं अनंता । माया गुन ग्यानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता ॥ करुना सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता । सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भयउ प्रगट श्रीकंता ॥ ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम रोम प्रति बेद कहै । मम उर सो बासी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै ॥ उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै । कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥ माता पुनि बोली, सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा । कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला, यह सुख परम अनूपा ॥ सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होइ बालक सुरभूपा । यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा ॥ भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी । हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान श्री राम के बाल स्वरूप का गुणगान किया गया है, जिन्हें कृपालु, दीनदयाल, और कौसल्या हितकारी कहा गया है। यह दर्शाता है कि भगवान का जन्म दुखियों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए हुआ है। भजन के पहले अंतरे में माता कौसल्या की खुशी और संतोष का वर्णन है, जो उनके पुत्र के दिव्य स्वरूप से अभिभूत हैं। श्री राम का रूप 'अद्भुत' है, जिसमें उनकी सुंदरता और आकर्षण का पूरा दर्शन होता है। उनके नेत्रों की 'सोभासिंधु' तथा शरीर की रंगत रूप में अनोखी है, जो भक्तों के मन को हर लेती है। यह संदेश भी दिया गया है कि भगवान श्री राम केवल एक भक्त के रूप में प्रकट होते हैं, जो सम्पूर्ण विश्व के लिए करुणा और प्रेम का सागर हैं।

इस भजन में भक्त अपनी भक्ति और प्रेम से प्रभु का ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करते हैं। माँ कौसल्या का नाम लेकर भक्ति का भाव प्रकट किया गया है, जो अपने पुत्र श्री राम की बाल लीला की याद दिलाती है। भजन की पंक्तियों में 'निज आयुध भुजचारी' का उल्लेख है, जो यह संकेत करता है कि भगवान केवल शक्ति के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे प्रेम, स्नेह, और करुणा के भी प्रतीक हैं। जब भक्त श्री राम की बाल लीलाओं का गुणगान करते हैं तो उनका मन भर जाता है और उन्हें दुनिया के दुखों से मुक्ति का मार्ग दिखता है। यह भावप्रकृति सही मायनों में भक्तों के लिए एक अमृत का सागर है।

भजन में भक्ति मार्ग का आदर्श प्रस्तुत किया गया है। भक्त को यह संदेश दिया गया है कि जब वह भगवान की दिव्यता का ध्यान करते हैं, तो उनके मन में शांति और सार्थकता उत्पन्न होती है। भक्ति के द्वारा, व्यक्ति ईश्वर से सीधा संबंध स्थापित कर सकता है और अपने जीवन में सुख की अनुभूति कर सकता है। यह भजन भगवान श्री राम की महिमा का अनुग्रह कर उन्हें सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के प्रति दयालुता और करुणा के प्रतीक के रूप में स्थापित करता है। संतों ने इस भक्ति के माध्यम से हमें यह सिखाया है कि ईश्वर में प्रेम और विश्वास रखना ही जीवन का सही मार्ग है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान श्री राम का बाल स्वरूप भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। रामायण के अनुसार, श्री राम का जन्म धरती पर दुष्टों के समूल नाश और भक्तों की रक्षा के लिए धरती पर हुआ था। यह भजन इस बात की पुष्टि करता है कि श्री राम का स्वरूप केवल शक्ति नहीं, बल्कि समर्पण, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। जब राम का बाल स्वरूप प्रकट होता है, तो यह भक्तों के लिए एक अवसर होता है कि वे उनके प्रति अपनी भक्ति और आस्था प्रकट कर सकें। यह भजन हमें रामायण के मर्म को समझने और राम के प्रिय भक्तों में शामिल होने का अवसर प्रदान करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा, और सामर्थ्य प्राप्त होता है। यह संकट के समय में भगवान की कृपा का अनुभव करने का साधन है। नियमित रूप से इसका जाप करने से आत्मबल में वृद्धि होती है और भक्त अपने जीवन में सकारात्मकता का अनुभव करते हैं। यह भजन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक साबित होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सही समय सुबह और संध्या का होता है। सुबह ये मंत्र सूर्य को अर्घ्य देने के बाद और संध्या को दीयों की लौ के बीच में गाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भजन गाते समय भक्त को एक शांत स्थान पर बैठकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। फूल, फल, और दीपक की अर्चना करते हुए भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में श्री राम के किस स्वरूप की चर्चा की गई है?

इस भजन में भगवान श्री राम के बाल स्वरूप की चर्चा की गई है, जो दीन-दुखियों के उद्धारक और कौसल्या के प्रिय पुत्र हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश दया, करुणा और भक्तिपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा है, जिसमें भगवान श्री राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई है।

क्या इस भजन का जाप करने से लाभ होता है?

हाँ, इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, अध्यात्मिक ऊर्जा और संकटों से मुक्ति मिलती है, जिससे भक्त का जीवन सुकून और सकारात्मकता से भरा रहता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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