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भक्ति रस काव्य व भजन

हाथ जोड़ विनती करूँ सुनियो चित्त लगाए(Haath Jod Vinti Karu Suniyo Chitt Lagaye lyrics in Hindi) | Liyaqat Ali - Bhaktilok

116 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम भक्तों का स्मरण: हाथ जोड़ विनती

भगवान श्याम से शरण की कृपा की प्रार्थना हेतु यह भजन अति प्रिय है। इसे श्रद्धा से गाए।

हाथ जोड़ विनती करूं सुणियों चित्त लगाय,दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज,धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर सुजान,अनुपम छवि श्री श्याम की, दर्शन से कल्याण ।श्याम श्याम तो मैं रटूं श्याम है जीवन प्राण,श्याम भक्त जग में बड़े उनको करूँ प्रणाम,खाटू नगर के बीच में बण्यों आपको धाम,फाल्गुन शुक्ला मेला भरे जय जय बाबा श्याम ।फाल्गुन शुक्ला द्वादशी उत्सव भारी होए,बाबा के दरबार से खाली जाये न कोय,उमा पति लक्ष्मी पति सीता पति श्री राम,लज्जा सब की रखियो खाटू के बाबा श्याम ।पान सुपारी इलायची इत्तर सुगंध भरपूर,सब भक्तों की विनती दर्शन देवो हुजूर,आलू सिंह तो प्रेम से धरे श्याम को ध्यान,श्याम भक्त पावे सदा श्याम कृपा से मान ।हाथ जोड़ विनती करूँ सुणियों चित्त लगाय,दास आ गयो शरण में रखियो इसकी लाज,धन्य ढूंढारो देश हैं खाटू नगर सुजान,अनुपम छवि श्री श्याम की दर्शन से कल्याण ।जय श्री श्याम बोलो जय श्री श्यामखाटू वाले बाबा जय श्री श्यामलीलो घोड़ो लाल लगामजिस पर बैठ्यो बाबो श्याम॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन की प्रमुख थीम आध्यात्मिक भक्ति और भगवान श्याम के प्रति समर्पण है। पहले श्लोक में, भक्त अपने हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करता है कि भगवान श्याम उसकी विनती सुनें। यहाँ 'चित्त लगाय' का अर्थ है ध्यान को पूरी तरह से भगवान में लगाना। इस तरह भक्त उनकी लाज रखे जाने की प्रार्थना करते हैं। आगे लिखा गया है कि खाटू नगर, जहाँ भगवान श्याम की विशेष उपस्थिति है, श्रद्धालुओं के लिए धन्य है। भक्त यहां 'अनुपम छवि श्री श्याम की' की बात करते हैं, जिसमें उनकी दिव्यता का वर्णन है, जो दर्शन से ही प्राप्त होती है। भक्त की इस प्रार्थना में भगवान श्याम से उनके जीवन के उदात्तीकरण की आशा दिखाई देती है।

भक्ति की भावना इस भजन में गहराई से व्याप्त है। 'श्याम श्याम तो मैं रटूं' यह दर्शाता है कि भक्त भगवान श्याम को अपनी आत्मा का अभिन्न हिस्सा मानता है। यहां 'श्याम भक्त जग में बड़े' का विचार सामने आता है कि भक्तों का सच्चा प्रेम और भक्ति ही उन्हें भगवान के निकट लाती है। 'खाटू नगर के बीच में' का उल्लेख यह दर्शाता है कि भक्ति का स्थान केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह भावनाओं और विश्वास का केंद्र है। भगवान के प्रति यह प्रेम और समर्पण भजन के प्रत्येक छंद में स्पष्ट होता है।

भक्ति मार्ग का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत इस भजन में निहित है। यहाँ भक्त भगवान को उसके विविध रूपों में पहचानता है: 'उमा पति लक्ष्मी पति सीता पति श्री राम'। यह परिचय भक्तों की विविधता और उनकी भक्ति के विभिन्न आयामों को दर्शाता है। भक्ति में अटूट विश्वास रखना और समर्पण से भरे भाव से प्रार्थना करना इस भजन का एक मूल संदेश है। इसके अतिरिक्त, भक्ति में प्रेम, दर्द और उम्मीद की गहराई समझी जा सकती है, जहाँ भक्त मांगता है कि भगवान उसकी लाज रखे। ये सभी तत्व भक्ति मार्ग के गहन अर्थ को दर्शाते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खाटू श्याम का संदर्भ हिन्दू धर्म में विशेष स्थान रखता है, जहाँ भक्त अपनी समस्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए बाबा श्याम की शरण लेते हैं। 'पान सुपारी इत्यादि' का उल्लेख भक्ति में साधारणता और सच्चाई दिखाता है। इस भजन में, भक्तों को उत्सवों की भव्यता के समय शांति और समर्पण का अनुभव होता है, जो हिन्दू धर्म के पर्व और अनुष्ठानों का एक अंश है। यह भजन विशेष रूप से फाल्गुन शुक्ला मेला के संदर्भ में प्रचलित है, जो भगवान की कृपा को अनुभव करने का एक अवसर है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आंतरिक संतुलन और आध्यात्मिक उत्थान में सहायक होता है। इसे नियमित रूप से गाने से भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो मानसिक थकान को दूर करता है। इसके अतिरिक्त, इससे आत्म विश्वास बढ़ता है और भक्त अपने जीवन में सुख-शांति की अनुभूति कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ प्रात: समय में या संध्या के समय बेहद फलदायी होता है। पूजा करते समय एक दीया जलाना और ठंडी स्थान पर बैठकर मन को स्थिर करना आवश्यक है। साथ ही, चंदन, फल अथवा कोई विशेष प्रसाद अर्पित करना चाहिए। ध्यान और श्रद्धा से इस भजन का गान भक्तों को एकत्रित करता है और भक्ति का अनुभव कराता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन में भगवान श्याम को किस रूप में संबोधित किया गया है?

इस भजन में भगवान श्याम को सर्वशक्तिमान एवं प्रेम के प्रतीक के रूप में संबोधित किया गया है। भक्त उनकी कृपा एवं संरक्षण की कामना करते हैं।

क्या यह भजन किसी विशेष उत्सव से जुड़ा है?

हाँ, यह भजन फाल्गुन के महीने में मनाए जाने वाले खाटू श्याम के मेले से जुड़ा है, जहाँ भक्त विशेष श्रद्धा के साथ इसे गाते हैं।

इस भजन के पाठ का धार्मिक महत्व क्या है?

इस भजन का धार्मिक महत्व भक्तों को भगवान श्याम की कृपा प्राप्त करने एवं उनकी शरण में जाने का अवसर प्रदान करता है, जिससे मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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