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जब जब लहराए मोरछड़ी(Jab Jab Lehraye Morchadi Lyrics in Hindi) | Pramod Premi - Bhaktilok

42 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम की कृपा: जब जब लहराए मोरछड़ी

इस भजन के माध्यम से भक्त श्याम की कृपा को अनुभव करते हैं। इसे गाने से मन शांत और प्रसन्न होता है।

जब जब लहराए मोरछड़ी ये कष्ट मिटाये घड़ी घड़ी ये विपदा हरती बड़ी बड़ी मेरे श्याम तुम्हारे हाथों में जब जब लहराए मोरछड़ी इस मोरछड़ी ने भक्तों की नैया को पार लगाया है जो हारा है इस दुनिया से उसको तो मान दिलाया है हर विपदा सारे जग की हरी जब जब लहराए मोरछड़ी मेरे श्याम तुम्हारे हाथों में जब जब लहराए मोरछड़ी ये सब की लाज बचाती है ये सबको पार लगाती है जितने भी आये दीन दुखी ये सबको जीत दिलाती है सारी दुनिया की मौज करी जब जब लहराए मोरछड़ी मेरे श्याम तुम्हारे हाथों में जब जब लहराए मोरछड़ी हर प्रेमी पे उपकार किया पूरा हर एक काम किया सर पे घुमा कर मोरछड़ी सबका सपना साकार किया मेरी झोली भी हरपाल भरी जब जब लहराए मोरछड़ी मेरे श्याम तुम्हारे हाथों में जब जब लहराए मोरछड़ी

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भजन 'जब जब लहराए मोरछड़ी' में श्याम यानी भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महिमा का वर्णन है। यह भजन भक्तों को यह सिखाता है कि जब भी उनकी कष्ट भरी जीवन में विपत्तियों का सामना होता है, तब भगवान उनका उद्धार करते हैं। 'जब जब लहराए मोरछड़ी' का अर्थ है कि जब भी यह मोरछड़ी लहराती है, तब भक्तों के दुख-दारिद्र्य का नाश होता है। यह मोरछड़ी, जो श्याम की पहचान है, भक्तों के जीवन को समृद्ध बनाती है। जैसे-जैसे यह लहराती है, भक्तों की नैया पार लगती है, यही कारण है कि भक्तों ने अपने हृदय में श्याम के प्रति अटूट विश्वास रखा है।

इस भजन में भावार्थ है कि श्याम की कृपा हर एक व्यक्ति की संकट में सच्चे रक्षक बनकर आती है। भजन में यह दर्शाया गया है कि श्याम ने न सिर्फ भक्तों की नैया को पार लगाया, बल्कि उन्होंने उन सभी लोगों का मान भी बढ़ाया है जो जीवन की चुनौतियों से थक चुके हैं। यह विश्वास दिलाता है कि हर विपत्ति से मुक्ति पाने का एकमात्र उपाय भगवान की शरण में जाना है। जब भक्त निराश होते हैं, तब यह भजन उन्हें आशा और शक्ति प्रदान करता है, जिससे वे अपने कष्टों को पार कर सकें।

भजन का मुख्य तत्व भक्ति मार्ग को प्रमुखता देता है। यह श्याम के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा को दर्शाता है। भक्त जब भी इस भजन को गाते हैं, तो वे श्याम के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं और अपने हृदय का भंडार खोल देते हैं। इसमें दीन-दुखियों की सेवा, पोषण और सांत्वना का संदेश है, जिससे श्याम की अनुकंपा प्राप्त होती है। सच्चा भक्त अपने विश्वास को कभी नहीं खोता और भगवान उसकी हर मांगी सुनते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक संदर्भ शास्त्रों में निहित है, जहाँ भगवान कृष्ण ने अपने भक्ति followers की रक्षा के लिए अनेकानेक लीला की हैं। भगवद गीता में, श्रीकृष्ण ने कहा है कि वह हर युग में धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। इसी प्रकार, यह भजन भक्तों को यह समझाता है कि जब भी वे संकट में होते हैं, तब श्याम की लहराती मोरछढ़ी उनके जीवन में नए सूर्योदय का संचार करती है। यह उपासना, सत्य और भक्ति के मार्ग पर चलने वालों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। भक्ति भाव से गाया गया यह भजन नकारात्मक विचारों को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसे गाने से भक्त का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनके जीवन की कठिनाइयों को पार करने की शक्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह सूर्योदय या शाम को स्नान के बाद करना सबसे उत्तम है। भक्त को चाहिए कि वह एक स्थान पर ध्यान पूर्वक बैठे, सामने श्याम का चित्र रखें और एक दीप जलाएं। मन में भक्ति भाव के साथ ध्यान करें और इस भजन को पूरी श्रद्धा से गाएं। यह ध्यान को स्थिर करने और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जब जब लहराए मोरछड़ी का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि जब भी यह मोरछड़ी लहराती है, तब भक्तों के सारे कष्ट मिट जाते हैं। यह भगवान श्याम की कृपा का प्रतीक है।

इस भजन का अनुभव कैसे किया जा सकता है?

इस भजन का अनुभव शुद्ध मन से भक्ति भाव के साथ गाने से किया जा सकता है। इसे करने पर भक्त अपने अंतर में शांति और सुख महसूस करते हैं।

क्या इस भजन को किसी पूजा में शामिल किया जा सकता है?

हाँ, इस भजन को पूजा में शामिल करना बहुत शुभ माना जाता है। यह श्याम की कृपा को आकर्षित करता है और भक्तों को मनचाहा फल देता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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