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भक्ति रस काव्य व भजन

किया तप इस कदर हुआ शिव पे असर(Kiya Tap Is kadar Hua Shiv Pe Asar Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

78 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव की कृपा: गोरा विवाह का अद्भुत प्रसंग

यह भजन शिव की अनुकंपा और प्रेम भरे विवाह की महिमा का बखान करता है, भक्ति के भाव से गाए जाने हेतु प्रेरित करता है।

किया तप इस कदर हुआ शिव पे असरतेरा भोले से गोरा विवाह हो गयाशुभ घड़ी आ गई फिर ख़ुशी छा गईरूप शिव जी का तेरे तो मन भा गयाकिया तप इंस कदर हुआ शिव पे असरतेरा भोले से गोरा विवाह हो गया।।क्या वो बारात थी नाथो के नाथ कीशिव से मिलने को गोरा भी बेताब थीआरती के दिए फूल माला लिएशिव के स्वागत में सारा नगर आ गयाशिव के स्वागत में सारा नगर आ गयाकिया तप इंस कदर हुआ शिव पे असरतेरा भोले से गोरा विवाह हो गया।।देव गण झूमते भूत भी नाचतेइनकी हुंकार सुनके सभी कांपतेभोले लीला करे सखियाँ सारी डरेदेखा गोरा ने मन उनका चकरा गयादेखा गोरा ने मन उनका चकरा गयाकिया तप इंस कदर हुआ शिव पे असरतेरा भोले से गोरा विवाह हो गया।।गोरा सोचे मेरा तो ये शंकर नहींआँखे खोली तो शिव जैसा सुन्दर नहींदेखि सुन्दर छवि करते अचरज सभीये चमत्कार कैसा गजब ढा गयाये चमत्कार कैसा गजब ढा गयाकिया तप इंस कदर हुआ शिव पे असरतेरा भोले से गोरा विवाह हो गया।।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में शिव भगवान और उनकी पत्नी पार्वती के विवाह का एक भावनात्मक चित्रण किया गया है। 'किया तप इस कदर हुआ शिव पे असर' से यह पता चलता है कि कड़ी तपस्या के परिणामस्वरूप भगवान शिव पर गहरा असर हुआ, जिसके फलस्वरूप गोरा का शिव से विवाह सम्पन्न हुआ। 'शुभ घड़ी आ गई फिर ख़ुशी छा गई' में इस बात का उल्लेख है कि जब प्रेम और भक्ति संपूर्ण होती है, तब सुख और शांति का संचार होता है। यह विवाह केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि अनुपम आनंद का प्रतीक भी है, जिसे सम्पूर्ण नगर जय-जयकार की ध्वनि से भरा हुआ देखा गया। इस प्रकार, भजन न केवल शिव का गुणगान करता है, बल्कि प्रेम और भक्ति के अद्भुत फल को भी दर्शाता है।

भजन में गोरा की मनोभावनाओं को भी उजागर किया गया है, जो शिव के प्रति उसकी गहरी आकर्षण और श्रद्धा को दर्शाता है। 'क्या वो बारात थी नाथो के नाथ की' दर्शाता है कि गोरा अपने विवाह के अवसर पर कितनी उत्सुक थी। इस उत्सुकता में उसकी पवित्र भावना और श्रद्धा का संकेत भी छिपा है। आगे, गोरा का विचार करना कि 'मेरा तो ये शंकर नहीं' यह दर्शाता है कि भक्ति के मार्ग में कभी-कभी सच्चाई का सामना भी करना पड़ता है। शिव की परिकल्पना और उनके वास्तविक स्वरूप का भिन्न होना एक गहरा भावार्थ प्रदान करता है, जो भक्ति और प्रेम की गहराइयों की ओर संकेत करता है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की भूमिका को समझा जा सकता है। यह केवल एक विवाह का वर्णन नहीं, बल्कि मानव जीवन में भक्ति की अनिवार्यता और उसके परिणाम का भी प्रतिपादन करता है। भक्ति का मार्ग कठिनाइयों से भरा हो सकता है, लेकिन दृढ़ विश्वास और निष्काम प्रेम से सभी आडंबर समाप्त हो सकते हैं। शिव और पार्वती का विवाह आदर्श प्रेम कहानी है, जिसका उद्देश्य केवल भक्ति के प्रति अनुराग को बढ़ाना ही नहीं, बल्कि एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना भी है। इस भजन के माध्यम से हम शिव की कृपा और उनके प्रति सच्चे प्रेम का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भारतीय पौराणिक कथाओं में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की कथा अति महत्वपूर्ण है। यह कथा विभिन्न पुराणों, जैसे कि शिव पुराण और मार्कंडेय पुराण में वर्णित है। इसे प्रेम और भक्ति का आदर्श उदाहरण माना जाता है, जहाँ पार्वती ने कठिन तपस्या के माध्यम से शिव को प्रसन्न किया। शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए तपस्या, भक्ति और श्रद्धा की आवश्यकता होती है। इस भजन के माध्यम से इस पवित्र कथा को दोहराते हुए, भक्तों को शिव की महिमा का अनुभव होता है, जिससे वे भक्ति मार्ग पर अग्रसर होते हैं।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का पाठ मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और भगवान शिव के प्रति भक्ति को बढ़ावा देता है। इसके जाप से मन की अशांति दूर होती है तथा भक्त की चिंताओं का निवारण होता है। अध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ, यह भजन मानसिक शक्ति का संचार करता है, जिससे भक्त के जीवन में सुख और शांति का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन को सुबह या शाम के समय गाने की अनुशंसा की जाती है। भक्त को चाहिए कि वह पूजा स्थल को सुगंधित करें और शिव की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं। फूल, माला और मिठाई का भोग अर्पित करें। ध्यानपूर्वक और श्रद्धापूर्वक बैठकर भजन का कीर्तन करें, ताकि मन एकाग्र रह सके और भक्ति भाव से भरा रह सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के माध्यम से शिव की कौन सी लीला का वर्णन किया गया है?

इस भजन में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का वर्णन किया गया है, जो भक्ति और तपस्या का अद्भुत फल है।

गोरा का शिव से विवाह के पीछे की भक्ति का क्या महत्व है?

गोरा की शिव के प्रति भक्ति दर्शाती है कि कठिनाईयों का सामना कर शिव की कृपा प्राप्त करना संभव है, यह सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टिकोन से महत्वपूर्ण है।

इस भजन का पाठ करते समय कौन-कौन सी सामग्री का प्रयोग करना चाहिए?

भजन के पाठ के समय फूल, माला और मिठाई को अर्पित करना चाहिए, ताकि पूजा में श्रद्धा और प्रेम का संचार हो।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 23 Aug 2026

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