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भक्ति रस काव्य व भजन

मन तेरा मंदिर आखेँ दिया बाती लिरिक्स(Man Tera Mandir Aankhen Diya Bati Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

84 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मन तेरा मंदिर: भक्ति का अनोखा गीत

इस भक्ति गीत को गाकर, श्रद्धालु अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती रोम रोम जिव्हा, तेरा नाम पुकारती आरती, ओ मैया आरती ओ ज्योतावाली ये माँ तेरी आरती ।। मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती हे महालक्ष्मी माँ गौरी तू अपनी आप है जौहरी तेरी कीमत तु ही जाने तु बुरा भला पहचाने ये कहते दिन और रातें तेरी लिखी ना जाये बातें कोइ माने या ना माने हम भक्त तेरे दिवाने कोइ माने या ना माने हम भक्त तेरे दिवाने तेरे पावँ सारी दुनियाँ पखारती मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती रोम रोम जिव्हा, तेरा नाम पुकारती आरती, ओ मैया आरती ओ ज्योतावाली ये माँ तेरी आरती ।। हे गुणवंती सतवंती हे पदवंती रसवंती मेरी सुनना ये विनंती मेरा चोला रंग बंसती हे दुखः भजंन सुखदाती, हमे सुख देना दिन रात्री जो तेरी महिमा गाये वो मुँह माँगी मुरादे पायेजो तेरी महिमा गाये वो मुँह माँगी मुरादे पाये हर आँख तेरी और निहारती मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती रोम रोम जिव्हा, तेरा नाम पुकारती आरती, ओ मैया आरती ओ ज्योतावाली ये माँ तेरी आरती ।। ओ तेरे पाँव सारी दुनियाँ पखारती औ लाटावाली ये माँ तेरी आरती औ हर आँख तेरी ओर निहारती औ ज्योतावाली ये माँ तेरी आरती औ तु तो भक्तों की बिगडी सँवारती मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन 'मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती' भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्वितीय प्रतीक है। इसमें मन को एक मंदिर के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें हम ईश्वर की आराधना करते हैं। विशेष रूप से, जब हम कहते हैं 'रोम रोम जिव्हा, तेरा नाम पुकारती', तो यह दिखाता है कि भक्त का हर अंग, हर तत्व उस दिव्य नाम को स्मरण कर रहा है। हम सभी जानते हैं कि जब मन का मंदिर शुद्ध होता है, तब ही ईश्वर की कृपा से जीवन में शांति और समृद्धि आती है। यह भजन भक्ति की सात्विकता और समर्पण का उद्घाटन करता है। इसके माध्यम से, भक्त साधना के उस स्तर तक पहुँचता है, जहां उसकी दृष्टि केवल ईश्वर पर होती है, न कि सांसारिक वस्तुओं पर।

इस भजन के भावार्थ में गहराई से जाकर, हमें अहसास होता है कि भक्त अपने आराध्य का परम प्रेम और समर्पण व्यक्त कर रहा है। 'हे महालक्ष्मी माँ गौरी, तू अपनी आप है जौहरी' इस पंक्ति में भक्त यह मानता है कि देवी माँ में स्वयं की अद्वितीयता और मूल्य है, और यह वह आकृति है जो भक्त की हर चिंता और द्वंद्व को दूर करती है। भजन में 'जो तेरी महिमा गाये, वो मुँह माँगी मुरादे पायें' यह दर्शाता है कि ईश्वर की स्तुति करना स्वयं में एक ऐसा कर्म है, जो भक्त को सभी सुखों की प्राप्ति करता है। भक्त की समर्पण भावना इस भजन में गहराई से झलकती है, जो उसे अपने आराध्य के निकट लाती है।

भक्ति मार्ग का यह भजन ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और श्रद्धा का परिचायक है। 'हे गुणवंती सतवंती' में भक्त देवी माँ की गुणों की महिमा गाता है, यह दर्शाते हुए कि कैसे ईश्वर अलग-अलग रूपों में भक्तों का उद्धार करता है। भक्ति केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि एक संबंध है, जो भक्त और ईश्वर के बीच के प्रेम को प्रकट करता है। भक्त इस भजन के माध्यम से सच्ची भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करता है, जो न केवल आत्मा की उन्नति करती है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में प्रेम और शांति का संचार करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि समाजिक भी है, क्योंकि यह भक्तों से एकता, प्रेम और करुणा की भावना को प्रकट करता है। 'माँ के पाँव सारी दुनियाँ पखारती' इस पंक्ति में भक्तिवाद की मर्म को उजागर करता है, जो यह मानता है कि माँ का आशीर्वाद सभी के लिए आवश्यक है। पौराणिक कथाएँ जैसे कि भागवत पुराण और देवी भागवत में माँ की सर्वत्र उपस्थिति का वर्णन मिलता है। यह भजन ऐसे समय में गाया जाता है, जब भक्त ईश्वर के प्रति अपनी सारी चिंताओं को छोड़कर केवल प्रेम और भक्ति में स्थित हो।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप मानसिक शांति, ताजगी, और दिव्यता का अनुभव देता है। इसे गाने से मन में स्थिरता आकर, कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। नियमित रूप से यह भजन गाने से एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो जीवन में सौभाग्य और आशीर्वाद को आमंत्रित करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम के समय करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्तों को पूजा स्थल पर स्वच्छता और शांति बनाए रखना चाहिए, और एक दीपक जलाकर तथा फूलों की सजावट करके भक्ति भाव से यह भजन गाना चाहिए। उचित मुद्रा में बैठकर, मन को शुद्ध कर, परमात्मा की ओर ध्यान लगाना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस भजन का मुख्य उद्देश्य मन को ईश्वर का निवास स्थान मानकर उसकी आराधना करना है। यह भक्त को भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस भजन को अधिकतर किस समय गाना चाहिए?

यह भजन सुबह या शाम की आराधना में गाया जाना चाहिए, जब मन एकाग्रता के साथ सच्चे भाव से ईश्वर को समर्पित कर सके।

क्या इस भजन का कोई विशेष धार्मिक महत्व है?

हाँ, यह भजन देवी-देवताओं की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों को एकता, प्रेम और करुणा की ओर प्रेरित करता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 29 Aug 2026

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